बागवानी के लिए छोड़ी नौकरी, आज किसानों के लिए  प्रेरणास्त्रोत बने सुधाकर

बागवानी के लिए छोड़ी नौकरी, आज किसानों के लिए  प्रेरणास्त्रोत बने सुधाकर
Farmer Sudhakar

पांच एकड़ जमीन में दो हजार से अधिक पेड़, कई लोगों को दे रहे रोजगार

बस्ती. खेती और बागबानी ने एक शख्स को इतना आकर्षित किया कि उसने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया और आज बागबानी की बदौलत वह किसानों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गये हैं।  सदर विकास खंड के परिवारपुर गांव के सुधाकर के पास आज पांच एकड़ जमीन में दो हजार से अधिक पेड़ हैं। आम,कटहल, आंवला, यूकेलिप्टस, सागवान, बांस सहित फूल और शोभाकार पेड़-पौधे उनकी बाग की शोभा बढ़ा रहे हैं।


सदर विकास खंड के परिवारपुर गांव के सुधाकर को खेती और बागवानी ने ऐसा आकर्षित किया कि लिपिक की नौकरी छोड़ दी। पिता की मृत्यु के बाद उनकी जगह चीनी मिल में मिलने वाली केन मैनेजर की नौकरी भी उन्होंने नहीं की। बीए तक की शिक्षा ग्रहण
करने वाले सुधाकर  क्षेत्र के अच्छे किसान भी हैं। बकौल सुधाकर  वह वर्ष 1982 में जय प्रभा इंटर कालेज भिउरा में लिपिक की नौकरी कर रहे थे,  तब भी मन खेती में ही लगता था। नौकरी ठीक से नहीं हो पाती तो उसे छोड़ दिया।


यह भी पढ़ें:  घर के छत पर करें खेती, सरकार देगी आपको 50 प्रतिशत अनुदान, कैसे यहां पढि़ए


सुधाकर के पिता सियाराम बस्ती चीनी मिल में केन मैनेजर के पद पर तैनात थे। 1994 में उनके आकस्मिक निधन के बाद मिल ने केन मैनेजर का पद देने की पेशकश की गई, उसे भी उन्होंने ठुकरा दी। खुद को अपनी बगिया और खेत को समर्पित कर दिया।
सुधाकर बताते हैं कि अपनी बाग के पेड़ अपने बच्चे जैसे लगते हैं। बाग में खड़ा होने पर लगता है कि पर्यावरण की सुरक्षा के लिए थोड़ा ही सही कुछ तो योगदान मैं भी कर सका।


सुधाकर बताते हैं कि शुरू में पौधों की सिंचाई के लिए पंपिंग सेट का प्रचलन था, उससे इतना धुंआ निकलता था कि मन घबरा जाता था। पांच साल पूर्व जब सोलर पंप आसानी से मिलने लगे तो मैंने भी सोलर पंप लगा लिया। अब घर की बिजली, खेत और बाग की सिचाईं आसानी से हो जाती है। सीजन में उनकी बगिया से आम और कटहल के फल 50 हजार रुपये दे देते हैं। सुधाकर के बाग में दर्जन भर लोगों को बाग की देखरेख व खेती के काम में लगा रखा है। अपने साथ उनकी भी रोजी-रोटी का जुगाड़ हो जाता है। वह अन्य ग्रामीणों के लिए मिसाल बने हुए हैं। साथ ही साथ अब वह अन्य लोगों को पौधे लगाने और उससे होने वाले फायदों के बारे में बताकर पर्यावरण के प्रति भी जागरूक कर रहे हैं।
खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned