छह दशक की मांग, कई आंदोलन, दो पदयात्रा, पर सपना अधूरा

-ब्यावर जिला की मांग, कई बार हुई मुखर, अब तक नहीं हो सकी पूरी, इस बार भी नतीजा रहा सिफर
-पहले भी 37 दिन तक युवक कांगे्रस ने दिया था धरना

By: Bhagwat

Published: 30 Sep 2020, 04:58 PM IST

ब्यावर. मगरा मेरवाड़ा स्टेट के राजस्थान में विलय के साथ से ही ब्यावर को जिला बनाने की शुरु हुई मांग अब तक पूरी नहीं हो सकी है। करीब छह दशक से ब्यावर को जिला बनाने की मांग की जा रही है। इस मांग को लेकर कई आंदोलन किए गए। कांग्रेस शासन में रही तो भाजपा ने आंदोलन किए एवं भाजपा शासन में रही तो कांग्रेस ने आंदोलन किए लेकिन हर बार नतीजा सिफर ही रहा। विधायक शंकरसिंह रावत ने जिला व जिले की मांग को बार-बार सदन में उठाया। वर्ष 2012 में भी विधायक शंकरसिंह रावत ने जिला व जल की मांग केा लेकर पद यात्रा की थी। इस पद यात्रा के बाद भी ब्यावर को जिला नहीं मिला, जवाजा बीसलपुर परियोजना को स्वीकृति जरुर मिली। करीब आठ साल बाद एक बार फिर जिला सहित 13 सूत्री मांगों को लेकर एक बार फिर चांगगेट पर 15 दिन तक धरना दिया एवं इसके बाद पद यात्रा शुरु की। इसके बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात हुई। इस मुलाकात के बाद नतीजा सिफर रहा। तीन लाख लोगों का सपना एक बार फिर अधूरा रह गया।

चांगगेट पर दिया था 37 दिन धरना
ब्यावर जिले की मांग को लेकर पूर्व में भी चांगगेट पर 37 दिन तक युवक कांग्रेस की ओर से धरना दिया गया था। उस समय भाजपा का शासन था एवं भैरोंसिंह शेखावत मुख्यमंत्री थे। तत्कालीन युवक कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश शर्मा के नेतृत्व में दिए गए इस धरनके दौरान तीन बार ब्यावर बंद रहा। 11 दिन तक पृथ्वीराज गहलोत आमरण अनशन पर बैठे थे। उस समय भी ब्यावर जिला नहीं बन सका।

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