नौ माह से बंद पड़ा है कोटेज एवं आईसीयू वार्ड

अमृतकौर चिकित्सालय में पिछले नौ माह से कोटेज व आईसीयू वार्ड पड़े है बंद, मार्च माह में कोरोना वैश्विक महामारी के चलते व्यवस्थाओं के तहत किया था बंद, अब तक बंद पड़ा है वार्ड, इनका आठ माह से नहीं लिया जा रहा है उपयोग

By: Bhagwat

Published: 11 Jan 2021, 09:51 AM IST

ब्यावर. अमृतकौर चिकित्सालय में करीब नौ माह से आईसीयू वार्ड एवं कोटेज वार्ड बंद पड़े हैं। कोरोना वैश्विक महामारी का प्रकोप बढऩे के साथ कोरोना संक्रमितों की व्यवस्थाओं को देखते हुए इन्हें बंद कर दिया गया। तब से ही यह वार्ड बंद पड़े है। हालांकि कोरोना संक्रमण के दौरान इन वार्डो का कोई उपयोग नहीं हो सका। हाल में कोरोना संक्रमितों के लिए जो वार्ड बनाया गया है। उस वार्ड में भी कोई मरीज भर्ती नहीं है। यहां से अधिकांश मरीजों को हाई सेंटर के लिए रेफर कर दिए। अब कोरोना संक्रमितों के आंकड़ों में कमी आई है। संक्रमित आने पर उन्हें होम आइसोलेट करने की व्यवस्था शुरु कर दी गई। इसके बावजूद कोटेज व आईसीयू वार्ड को वापस शुरु नहीं किया जा सका है। अमृतकौर चिकित्सालय जिला अस्पताल है। जहां पर आसपास के क्षेत्रों के मरीज उपचार करवाने आते है । पाली जिले के रायपुर व जैतारण, भीलवाड़ा जिले के आसींद व बदनोर, नागौर जिले में रियाबड़ी व मेड़ता, राजसमंद जिले का भीम व देवगढ़ क्षेत्र के मरीज यहां पर उपचार करवाने आते है। हृदय रोग से संबंधित रोगियों को इन क्षेत्रों में उपचार नहीं मिल पाता है। इसके अलावा विशेषज्ञों की सुविधा के लिए मरीज यहां पर आते है। ऐसे में सीएचसी और पीएचसी से रेफर होने के बाद मरीज यहां पर ही आता है। यहां पर भी वार्ड बंद होने से मरीजों को हाई सेंटर के लिए रेफर कर दिया जाता है। इससे मरीजों को रेफर के बाद फिर रेफर की पीड़ा झेलनी पड़ती है। समय पर उपचार नहीं मिलता है तो कई बार जीवन संकट में आ जाता है। जबकि नवंबर, दिसंबर व जनवरी माह मेंहृदय रोगियों की संख्या बढ़ जाती है। इसके बावजूद आईसीयू वार्ड की सुविधा शुरु नहीं की जा रही है। इन दिनों कोरोना संक्रमितो का आंकड़ा कम होने से कोरोना संक्रमितों के लिए बनाए गए वार्ड में भी मरीजों की संख्या कम है।इसलिए है जरूरी...अमृतकौर चिकित्सालय चार जिलों की सरहद पर यह अस्पताल स्थित है। यहां पर उपचार करवाने आते है। यहां पर आउटडोर व इनडोर मरीजों का आंकड़ा भी अधिक है। बाहर से आने वाले वरिष्ठ जनों को कोटेज की सुविधा मिल जाने से उन्हें उपचार करवाने में आसानी रहती हैं। यह सुविधा नहीं होने से उपचार करवाने वाले मरीजों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मजबूरी में कई मरीजों को निजी चिकित्सालय में ले जाना पड़ता है।चिकित्सकों की कमी से भी बड़ी परेशानीअमृतकौर चिकित्सालय में आउटडोर व इनडोर मरीजों की संख्या अधिक है। इसके बावजूद यहां पर चिकित्सकों के 40 से अधिक पद रिक्त चल रहे हैं। यहां आने वाले मरीजों को पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।सर्दी के साथ ही बढ़ रहे हृदयरोगी नवम्बर माह में सीसीयू वार्ड में कुल 270 मरीज भर्ती हुए। इनमें से लकवा के 15, हृदय रोग के 19, निमोनिया के 28 मरीज भर्ती हुए। जबकि इस माह 14 लोगों की मृत्यु हो गई। इसी प्रकार दिसम्बर में सीसीयू वार्ड में ढाई सौ मरीज भर्ती हुए। इसमें करीब तीस से अधिक हृदय रोग से संबंधित बीमार रहे।

इनका कहना है...

कोरोना वैश्विक महामारी के चलते कोटेज वार्ड व आईसीयू वार्ड को रिजर्व में रखा था। ताकि इसका उपयोग किया जा सके। अब संक्रमितों की संख्या कम हुई है। ऐसे में कोटेज वार्ड को वापस शुरु करेंगे।

-डॉ. आलोक श्रीवास्तव, पीएमओ, अमृतकौर चिकित्सालय

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