ऐसी आई आड कि एक दशक में नहीं बन सका महिला छात्रावास

एसडी कॉलेज में बने बालिका छात्रावास एक दशक से अधिक बीत जाने के बावजूद नहीं हो सका तैयार, बेकार पड़ा भवन, उग रही झांडिय़ां, बजट नहीं मिलने से अधूरा पड़ा है काम

By: Bhagwat

Published: 14 Oct 2021, 01:54 PM IST

ब्यावर. उपखंड के सबसे बडे सरस्वती के अंगना में करीब एक दशक से लाडो के निवास के लिए बन रहे बालिका छात्रावास में लक्ष्मी की आड बनी है। करीब डेढ दशक पहले बालिका छात्रावास के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से बालिका छात्रावास निर्माण की कार्ययोजना तैयार हुई। करीब एक दशक पहले करीब तीस लाख का बजट मिला। इसके तहत करीब 15 कमरे बनकर तैयार हुए। इसके बाद इस छात्रावास के शेष निर्माण के लिए करीब पचास लाख से अधिक के बजट की दरकार है। इस बजट को लेकर महाविद्यालय प्रशासन ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग एवं उच्च शिक्षा मंत्रालय को लिखा लेकिन बजट नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में लाडो सरस्वती के अंगना में उच्च शिक्षा की साधना करना चाहती भी है तो लक्ष्मी की आड बनी है। ऐसे में डेढ दशक के इस अंतराल में कई लाडो ने उच्च शिक्षा के लिए किराए के मकानों में समय गुजारा तो कईयों को प्रतिदिन कई किलोमीटर की यात्रा कर यहां अध्ययन करने आना पड़ा। अब भी कोरोना काल के बाद नियमित कक्षाएं शुरु हुई तो बालिकाओं को किराए की कमरे की तलाश शुरु हो गई है। गौरतलब है कि सनातन धर्म महाविद्यालय में बालिका छात्रावास की योजना गत डेढ दशक पहले बनी। लेकिन दस साल से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी बजट के अभाव में निर्माण अधूरा पड़ा है। सनातन धर्म राजकीय महाविद्यालय में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से मिले बजट से वर्ष 2008 पहले बालिका छात्रावास का काम शुरू हुआ। दो साल तक छात्रावास का काम चला। लेकिन पिछले दस साल से यूजीसी से ग्रांट नहीं मिल पाने से काम अटका हुआ है।क्षेत्र का सबसे पुराना एवं सबसे बडा महाविद्यालयक्षेत्र का सनातन धर्म राजकीय महाविद्यालय सबसे पुराना महाविद्यालय है। इस कारण से जवाजा,देवगढ़,भीम,टॉटगढ़,जैतारण,नीमाच सहित राजसमन्द व पाली जिले के आसपास क्षेत्र के छात्र-छात्राएं यहां पढऩे के लिए आते है। पुराना महाविद्यालय होने से समृद्ध पुस्तकालय सहित अन्य अध्ययन से संबंधित सुविधाएं बेहतर है। ऐसे में कई छात्राएं यहंा पर प्रवेश लेना चाहती है लेकिन छात्राओं के लिए हॉस्टल सुविधा नहीं होने के कारण कई छात्राएं या तो किराये पर कमरा रह कर पढ़ रही है, या फिर वह प्राइवेट स्टूडेंट के तौर पर उच्च शिक्षा हासिल कर रही है।15 कमरें बने, शेष काम अटकाबालिका छात्रावास निर्माण के लिए कॉलेज प्रशासन को प्रथम किश्त के रूप में करीब 30 लाख रुपए का बजट प्राप्त हुआ था। इस बजट में 15 कमरों का निर्माण पूरा हो चुका है। शेष काम को बजट का इंतजार है। इसके लिए कॉलेज प्रशासन ने निदेशालय की ओर से हॉस्टल निर्माण के लिए मांगे गए तकमीना भी भेज दिया था। कॉलेज प्रशासन ने सार्वजनिक निर्माण विभाग से तकमीना तैयार करवा कर करीब 96 लाख का प्रस्ताव पूर्व में भेजा था। इसके बाद कीब पचास लाख का तकमीना भी भेजा गया। इसके बावजूद अब तक बजट नहीं मिल सका है। ऐसे में लाखों रुपए की लागत से बना बालिका छात्रावास का उद्घाटन होने से पहले ही जर्जर हो रहा है। इसके आस-पास कचरे का ढेर लगा है। आधे अधूरे पड़े हॉस्टल की रखवाली के लिए कॉलेज प्रशासन की ओर से चौकीदार नियुक्त किया हुआ है। जो अपने परिवार के साथ रह रहा है।

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