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परिषद की एक साल में सांसे फूली

करीब एक साल पहले कचरा निस्तारण के लिए एमआरएफ यूनिट लगी, परिषद एक साल में इस यूनिट से एक रुपया भी नहीं कमा सकी,अब निजी हाथों में दिया संचालन देने की तैयारी

ब्यावर

Published: November 02, 2021 11:52:28 am

ब्यावर. नगर परिषद की ओर से करीब एक साल पहले एमआरएफ यूनिट की स्थापना की गई। करीब 25 लाख की लागत से यूनिट तैयार होने के बाद कचरे के ढेर से निजात मिलने की आशा जगी लेकिन नगर परिषद का एक साल में ही इस यूनिट के संचालन में सांसे फूल गई। परिषद प्रशासन ने अब इस यूनिट का संचालन एक निजी कम्पनी को देने की तैयारी कर दी है। यह कम्पनी जल्द ही इसका काम शुरु करेगी। अब कचरा निस्तारण की व्यवस्था निजी कम्पनी करेगी। इससे कचरे से होने वाली आय से ही निजी एजेंसी को इसका संचालन करना होगा। परिषद इसके संचालन को लेकर कोई राशि नहीं देगी एवं न ही निजी एजेंसी परिषद को कोई भुगतान करेगी। नगर परिषद की ओर से करीब 25 लाख की लागत से गैराज के पास ही परिषद की जमीन में ही एमआरएफ यूनिट करीब एक साल पहले शुरु की गई। शहर के साठ वाडऱ्ो से डोर टू डोर कचरा संग्रहण किया जा रहा है। इसके तहत प्रतिदिन अलग-अलग वार्डो से साठ टन कचरे का संग्रहण होता है। इनको डम्पिंग यार्ड में डाला जाता है। इस कचरे को एमआरएफ यूनिट के जरिए निस्तारित किया जा रहा है। परिषद की ओर से इसका करीब एक साल तक संचालन किया गया। परिषद की ओर से पॉलीथिन की भी गांठे बनाकर औद्योगिक इकाईयों में भिजवाई गई। ताकि पॉलीथिन के कारण होने वाले प्रदूषण पर रोक लग सके। यह व्यवस्था करीब एक साल तक तो चला ली लेकिन आखिर में परिषद प्रशासन ने इसका संचालन निजी एजेंसी के जरिए करवाने का निर्णय किया है।
परिषद की एक साल में सांसे फूली
परिषद की एक साल में सांसे फूली
ढाई सौ किलो खाद उत्पादन की क्षमता

इस यूनिट से शहर से संग्रहित किए जाने वाले गीले कचरे से खाद बनाया जाना था। परिषद में आई इस मशीन से प्रतिदिन ढाई सौ किलो खाद बनाने की क्षमता है। इस खाद को एक स्थान पर संग्रहित किया जाएगा। बाद में इसका विक्रय कर नगर परिषद को राजस्व आय होनी थी। पिछले एक साल में खाद बनी लेकिन इतना उत्पादन नही हो सका कि इससे राजस्व आय हो। जो खाद बना उसका भी परिषद ने अपने स्तर पर ही बागवानी में उपयोग कर लिया।
यह थी मंशा

एमआरएफ यूनिट लगाने का उदेश्य था कि कचरे से खाद बनाकर परिषद को राजस्व आय के साथ ही शहर में होने वाली गंदगी से भी निजात मिले। इसके परिषद प्रशासन की ओर से एमआरएफ यूनिट की स्थापना की। इससे प्रतिदिन करीब ढाई सौ किलो खाद बननी थी। इसका सही संचालन नहीं हो पाने से परिषद की यह मंशा फलीभूत नहीं हो सकी।
इनका कहना है...

एमआरएफ यूनिट का संचालन निजी एजेंसी के जरिए करवाया जाएगा। इसके निजी एजेंसी से परिषद प्रशासन की बात चल रही है। निजी एजेंसी के यूनिट का संचालन शुरु करने के बाद शहर की सफाई व्यवस्था और बेहतर हो सकेगी। एक साल में यूनिट संचालन के दौरान शहर में फैलने वाली व ट्रेचिंग ग्राउड में एकत्र होने वाली पॉलीथिन में कमी आई थी।
-चिराग गोयल, सहायक अभियंता, नगर परिषद

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