आंधी-तूफान का कहर, 20 घंटे गुल रही 50 गावों की बिजली

Rajkumar Bhatt

Publish: Jun, 15 2018 05:00:00 AM (IST)

Bhilai, Chhattisgarh, India
आंधी-तूफान का कहर, 20 घंटे गुल रही 50 गावों की बिजली

बुधवार को गरज-चमक के साथ हुई बारिश से नवागढ़ विधानसभा के 50 गांवों में 20 घंटे से बिजली गुल रही। इस दौरान लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस गए।

बेमेतरा/नवागढ़. नवागढ़ ब्लॉक में बिजली की हालत यह है कि मामूली गरज-चमक में गई बिजली कब आएगी, बताया नहीं जा सकता। बुधवार की शाम 7 बजे तेज हवा गरज-चमक के साथ हुई बारिश से 50 गांव की बिजली गुल हो गई। नतीजतन 20 घंटे तक बूंद-बूंद पानी के लिए लोग तरस गए। वहीं संबलपुर स्थित बिजली विभाग के नवनिर्मित दफ्तर को भारी क्षति पहुंची।

शेड के साथ पंखे भी उड़ गए

तेज हवा से संबलपुर में बिजली विभाग के नवनिर्मित दफ्तर का शेड एंगल सहित उड़ गया, जिसमें लगे पंखे गायब हो गए। शेड 100 मीटर दूर जा गिरा। संबलपुर सहित 15 गांवों में बिजली ऐसी बंद हुई कि बहाली में 24 घंटे लग गए। जेई जेपी साव ने बताया कि तेज अंधड़ में दफ्तर का शेड उखाड़ दिया है, पंखे एंगल उड़ गए। 15 गांवों में बिजली बंद है। कम कर्मचारी होने के कारण लेबर लगाकर बुधवार रात से फाल्ट सुधारने में अमला लगा हुआ है।

पानी के लिए तरसे लोग

बुधवार को मंत्री दयालदास बघेल, कलक्टर महादेव कावरे नवागढ़ ब्लॉक के ग्राम मोहतरा में डायरिया प्रभावित लोगों से मुलाकात करते हुए सलाह दी कि डबरी व कुएं का पानी पीने में सावधानी बरतें पर इस ब्लॉक के रहने वाले लोग बिजली विभाग की मेहरबानी से दूषित जल पीने के लिए मजबूर हैं। बुधवार को बिजली बंद होने की वजह से सबसे ज्यादा परेशानी पानी को लेकर लोगों को उठानी पड़ी। पावर पंप पर निर्भर गांव के लोगों को पानी के लिए दूसरे विकल्प तलाशने पड़े।

प्रभावित हुआ कारोबार

बिजली संकट के कारण स्थिति यह है कि आइसक्रीम व कोल्ड ड्रिंक्स का कारोबार इस बार चौपट हो गया। नवागढ़ के कोल्ड ड्रिंक्स कारोबारी संपत टूटेजा ने कहा कि अनियमित बिजली के कारण ग्रामीण क्षेत्र में लोग इस कारोबार में रुचि नहीं लिए, 40 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं इलेक्ट्रानिक्स कारोबारियों को भी बिजली नहीं होने का खामियाजा भुगतना पड़ा।

तीन टुकड़ों में बंट गया पोल

अंधियारखोर सब स्टेशन के आश्रित ग्राम धनगांव में उपस्वास्थ्य केंद्र तक बिजली पहुंचाने के लिए एक सप्ताह पहले लगाया गया पोल स्टे सहित गिरकर तीन टुकड़े में बंट गया। बाकी चारी पोल 90 डिग्री की स्थिति में हैं, जो कभी भी जमींदोज हो सकते हैं। विभागीय लापरवाही व निरीक्षण के अभाव में पोल इस तरह लगाए गए हैं कि 7 दिन में ही दम तोड़ दिए।

 

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