जर्जर स्कूल के क्लास रूम में दो बच्चों को जहरीले बिच्छू ने डंक मारा, एक की मौत, दूसरा अस्पताल में भर्ती

बेमेतरा जिले के नवागढ़ ब्लॉक के ग्राम अकोली के मिडिल स्कूल में बिच्छू के काटने से आठवीं कक्षा के छात्र की मौत हो गई। अकोली निवासी 14 वर्षीय तुलेश्वर निषाद पिता नोहर कक्षा आठवीं %E

By: Dakshi Sahu

Published: 13 Sep 2021, 11:57 AM IST

बेमेतरा/नांदघाट. बेमेतरा जिले के नवागढ़ ब्लॉक के ग्राम अकोली के मिडिल स्कूल में बिच्छू के काटने से आठवीं कक्षा के छात्र की मौत हो गई। अकोली निवासी 14 वर्षीय तुलेश्वर निषाद पिता नोहर कक्षा आठवीं में अध्ययनरत था। वह रोज की तरह शनिवार को सुबह स्कूल पहुंचा। पढ़ाई के दौरान छात्र के कपड़े के अंदर घुसकर एक बिच्छू ने उसे डंक मार दिया। वहीं बिच्छू को निकालने में छात्र के मदद कर रहे एक अन्य छात्र झलक निषाद को भी बिच्छू ने डंक मार दिया। परिजन और शिक्षक दोनों छात्र को संजीवनी 108 एंबुलेंस से सिमगा हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। जहां से तुलेश्वर के स्थिति को देखते हुए उसे मेकाहारा रायपुर रेफर कर दिया। जहां उपचार के दौरान तुलेश्वर की मौत हो गई। वही दूसरे छात्र झलक अभी स्वस्थ है।

जर्जर हो गई स्कूल की बिल्डिंग
अकोली के ग्रामीण मंगल देशलहरे, अशोक निषाद, दुर्गेश निषाद, राजेन्द्र यादव ने बताया कि स्कूल भवन के जर्जर हालत को देखते हुए शासन से नए स्कूल भवन के निर्माण की मांग कई बार कर चुके हैं लेकिन समस्या जस की तस है। ग्राम पंचायत अकोली स्थित शासकीय मिडिल स्कूल भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। अभी इस मिडिल स्कूल में कक्षा छठवीं से आठवीं तक की कक्षाएं संचालित होती है। सन 2003 में निर्मित यह भवन 18 वर्ष पुरानी है। स्कूल की हालत ऐसा है कि भवन कभी भी गिर सकता है। बच्चे भवन के धराशायी होने के खतरे के बीच पढ़ाई करते नजर आते हैं। वर्षों पुराने इस भवन की छत व दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं और बरसात में पानी टपकता है।

शिक्षा विभाग नहीं दे रहा ध्यान
स्कूल का भवन पूरी तरह से जीर्ण शीर्ण हो चुका है। दीवार और छत में दरारें स्पष्ट दिखाई दे रही हैं। छत से लोहे का छड़ भी अब गिरने लगा है। पानी गिरने से शिक्षण कार्य भी प्रभावित होता है और स्कूल आने वाले बच्चों की संख्या घट जाती है। जीर्ण शीर्ण हो चुके इस पुराने भवन के गिरने का भी खतरा बना रहता है। स्कूल भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए भी शिक्षा विभाग एवं प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है और ना ही उन्हें विद्यार्थियों की चिंता है। बरसात में छत में पड़ी दरारों से पानी टपकता रहता है। इस कारण पढ़ाई तो प्रभावित होती ही है। साथ ही बच्चों को यह भी पता नहीं है कि जहां वे पढ़ रहे हैं उस पर खतरा मंडराता रहता है जो इस खतरे से अनभिज्ञ है। वहीं बारिश के दिनों में छत से पानी टपकने के साथ प्लास्टर भी गिरते हैं।

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