साहब 17 करोड़ तो एक साल पहले मिल गए थे पर क्या करें सालभर से सर्वे ही पूरा नहीं हो रहा

आने वाले दिनों में बिजली की खपत के बढ़ोतरी के दौरान जिले के नगरीय निकायों में विद्युत क्षमता बढ़ाने की चुनौती होगी।

By: Dakshi Sahu

Published: 10 Feb 2018, 04:22 PM IST

बेमेतरा. जिले के शहरी क्षेत्रों में विद्युत व्यवस्था को सुधारने के लिए एकीकृत विद्युत विकास योजना के तहत 1740 लाख रुपए का प्रोजेक्ट तैयार करने के बाद भी कार्रवाई अब तक केवल सर्वे तक ही सिमटी हुई है। आने वाले दिनों में बिजली की खपत के बढ़ोतरी के दौरान जिले के नगरीय निकायों में विद्युत क्षमता बढ़ाने की चुनौती होगी।

बताना होगा कि जिले के शहरों के विस्तार और आबादी की आवश्यकता को देखते हुए सब-स्टेशन क्षमता बढ़ाने, केबल लगाने, 25 केवी, 63 केवी, 100 केवी व 200 केवी क्षमता के ट्रांसफार्मर लगाने, लोकल तार विस्तार करने, केपिसीटर बैक सहित अन्य कार्य के लिए 1740 लाख रुपए का बजट तैयार कर केन्द्र शासन से स्वीकृति ली गई थी। साल भर से जारी कवायद को देखते हुए जिले के निकायों में अबतक काम शुरू कर दिया जाना था, लेकिन बेमेतरा व नवागढ़ की ही अब तक सुध लिया गया है।

शहरों के अलावा गांवों में भी विद्युत व्यवस्था में सुधार के लिए दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण ज्योति योजना के तहत प्रारूप तैयार किया गया है। योजना के तहत 89 विद्युत वितरण केन्द्रों का पूर्ण विद्युतीकरण किया जाना था, जिसमें से अबतक केवल 48 गांवों में ही कार्य पूर्ण किया गया है। 39 गांवों में काम जारी है। गर्मी के दिनों में काम पूर्ण करने की चुनौती विद्युत विभाग के लिए होगी।

एकीकृत योजना को क्रियान्वित करने के लिए केंद्र सरकार से भारी भरकम राशि की स्वीकृति कराने के बाद भी योजना को क्रियान्वित करने में कोताही बरती जा रही है। जिले के बेमेतरा नगर पालिका के अलावा बेरला, नवागढ़, साजा बेरला, परपोड़ी, थानखम्हरिया, देवकर नगर पंचायत व अन्य निकायों में कछुआ रफ्तार से काम किया जा रहा है, उससे गर्मी में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

सांसद दुर्ग लोकसभा ताम्रध्वज साहू ने बताया कि जिले में केंद्रीय एकीकृत विद्युत विकास योजना का कार्य सभी निकायों में शुरू किया जाना चाहिए, जिससे लोगों को जल्द से जल्द लाभ मिल सके। ईई सीएसपीडीसीएम बेमेतरा जेएस चौधरी ने बताया कि योजना का कुछ-कुछ काम बेमेतरा व नवागढ़ में शुरू हुआ। बाकी निकायों में काम नहीं हुआ ही नहीं है। पूरे प्रोजेक्ट को दुर्ग से कंट्रोल किया जा रहा है।

ट्रांसफार्मरों की क्षमता में बढ़ोतरी
येाजना के तहत 25 केवी के 16 नग ट्रांसफार्मर, 63 केवी के 29 नग ट्रांसफार्मर, 100 केवी के 13 नग ट्रांसफार्मर, 200 केवी के एक नग ट्रांसफार्मर सहित 69 नग ट्रांसफार्मर लगाया जाना है। इस पर 185 लाख 67 हजार रुपए खर्च किया जाना है। इसके अलावा 9 स्थानों पर क्षमता बढ़ाने के लिए सुधार कार्य, 25 केवी से 63 केवी के लिए 9 ट्रांसफार्मर व 63 केवी से 100 केवी का क्षमता बढ़ाने 20 ट्रांसफार्मर लगाया जाना है।

पुराने तार को बदलने की तैयारी
हाईटेंशन तारों को बदला जाएगा, इसके अलावा पोल की ऊंचाई भी बढ़ेगी। इसके लिए 685 किलोमीटर केबल लगाया जाना है। इस पर 66 लाख 82 हजार रुपए खर्च किया जाएगा। इसके अलावा 3620 नग मीटर व अन्य 92 कार्य किए जाने थे, जिस पर 187 लाख व क्षमता बढ़ाने पर 122 लाख 24 हजार खर्च किया जाना है। केन्द्रीय येाजना के तहत 1740 लाख 85 हजार खर्च किया जाना है।

आईपीडीएस योजना से जिले में केन्द्रीय योजना के तहत चार सब-स्टेशनों की क्षमता बढ़ाने के लिए स्वीकृति जारी की गई थी, जिसमें करीब 133 लाख 35 हजार का खर्च किया जाना है। योजना से केवल खम्हरिया को ही लाभ मिला है, इसके अलावा नवागढ़, मारो और परपोड़ी उपकेंद्र में काम रूका हुआ है।

इसके अलावा 33 केवी व 11 केवी उपकेन्द्रों के नवीनीकरण के लिए 77 लाख, नए केन्द्र के लिए लाइन विस्तार, 33 केवी लाइन के लिए 34 लाख 55 हजार, 11 केवी लाइन के लिए 107 लाख 94 हजार, 11 केवी के क्षमता विस्तार के लिए 191 लाख 48 लाख, शहर में खुले तार की बजाए केबल लगाने के लिए 241 लाख 81 हजार और कम क्षमता वाले केबल के विस्तार के लिए 32 लाख 6 हजार स्वीकृत किया गया है।

Dakshi Sahu Desk/Reporting
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