इस शिक्षक ने सम्मान की जगह श्रम केा दिया महत्व, सतनाम शिक्षा केंद्र खोलकर दे रहे विद्यार्थियों को नि:शुल्क विद्या दान

इस शिक्षक ने सम्मान की जगह श्रम केा दिया महत्व, सतनाम शिक्षा केंद्र खोलकर दे रहे विद्यार्थियों को नि:शुल्क विद्या दान

Dakshi Sahu | Publish: Sep, 06 2018 03:44:12 PM (IST) Bemetara, Chhattisgarh, India

नवागढ़ विधानसभा में कई ऐसे शिक्षक हैं जो सम्मान की जगह श्रम को महत्व देकर अपने सपने को बखूबी साकार कर रहे हैं।

राकेश तिवारी @बेमेतरा/नवागढ़. नवागढ़ विधानसभा में कई ऐसे शिक्षक हैं जो सम्मान की जगह श्रम को महत्व देकर अपने सपने को बखूबी साकार कर रहे हैं। नवागढ़ के निकट ग्राम बहरबोड़ के मिडिल स्कूल में पदस्थ शिक्षक लक्ष्मणलाल बघेल गत 4 साल से नवागढ़ तिलकापारा में सतनामी समाज के गुरुद्वारा में सतनाम शिक्षा केंद्र बनाकर बोर्ड परीक्षा के छात्रों को गणित, विज्ञान व अंग्रेजी की शिक्षा नि:शुल्क दे रहे हैं।

इस केंद्र में 40 से 50 विद्यार्थी अध्ययन के लिए नियमित आते हैं। पढ़ाई के अलावा वे छात्रों को उनके भविष्य निर्माण पर विशेष जानकारी भी देते हैं। एक ओर जहां शिक्षक नियमित स्कूल जाने में हीलहवाला करते हैं। वहीं दूसरी ओर लक्ष्मण बघेल ऐसे हैं जो स्कूल के साथ-साथ नि:शुल्क पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय देते हैं। बघेल ने कहा कि बेसिक शिक्षा में गिरावट के बाद कक्षा 8 वीं - 10 वीं के विद्यार्थियों में पूर्व की अपेक्षा पढऩे व समझने की क्षमता कमजोर हुई है।
गणित को बोझ समझकर छात्र दूर भागते हैं।

गरीब छात्रों को शिक्षा व दिशा नहीं मिल पाती। एक शिक्षक होने के नाते हमने तय किया कि सामाजिक भवन को शिक्षा का मंदिर बनाकर छात्रों को पढ़ाया जाए। 4 वर्षों में अनुकूल परिणाम आए हैं। लगातार छात्रों को प्रदर्शन में सुधार हो रहा है। उन्हें शिक्षा का महत्व बताया जा रहा है। बघेल ने कहा कि नवागढ़ ब्लॉक व नवागढ़ में कई विशेष योग्यताधारी शिक्षक हैं। यदि एक घंटे परोपकार के लिए निकालें तो कई छात्रों को दिशा मिल जाएगी।

कम उपस्थिति व होमवर्क करके नहीं आने वाले पढ़ाई में कमजोर छात्रों की तलाश में जब ये शिक्षक गांव में निकले तो इन्हें पता चला कि गांव में 18 महिला हैं, जिन्हें पढऩा-लिखना नहीं आता व बच्चों की पढ़ाई के बारे में नहीं जानते। इसके बाद इन दोनों ने छात्रों के साथ बैठाकर महिलाओं को पढ़ाया। बच्चों के साथ माताओं ने भी पढ़ाई की और कुछ माह में 18 महिलाओं साक्षर हो गईं। जिन्हें ग्राम सुराज, लोक सुराज में सम्मानित किया गया। एक शिक्षक से गांव की क्या अपेक्षाएं हो सकती है, इन्हें पूरा करके वर्मा व ठाकुर ने दिखा दिया।

शिक्षा का मंदिर कैसा हो पुजारी ने तय कर लिया। नांदघाट के निकट ग्राम खैरा में शिक्षक दुष्यंत मेरिया ने गौठान में बने स्कूल भवन के सामने स्वयं के व्यय व परिश्रम से सुरक्षा घेरा बनाया, पेयजल की व्यवस्था की और ऐसे पौधे रोपे कि स्कूल स्वर्ग लगने लगा है। गांव में पचरी का निर्माण किया। गांव में स्वच्छता मिशन चलाया। ग्राम करमसेन में पदस्थ शिक्षक विशंभर निषाद ने स्कूल को ऐसा संवारा है कि यह किसी वीआईपी का बंगला प्रतीत होता है। निषाद ने उन शिक्षकों को आइना दिखा दिया है जो स्कूल को केवल कमाई का ठिकाना मानते हैं। बेहतर गार्डन व रंगरोगन स्कूल की विशेषता है।

नवागढ़ ब्लॉक में सुविधाओं को अभाव में जूझ रहे अतरगंवा प्राथमिक शाला के छात्रों में वह दम है कि वे जिले के किसी भी मिडिल स्कूल के छात्रों को मात देने तैयार हैं। शिक्षा, अनुशासन, यूनिफॉर्म सहित तमाम विधा में यहां के छात्र किसी इंग्लिश मीडियम स्कल से कम नहीं हैं। स्कूल में पदस्थ शिक्षक कुमार वर्मा एवं राकेश ठाकुर ने यह कार्य कर दिखाया है, जो ब्लॉक में दूर-दूर तक नहीं हो पाया।

संकुल समन्वयक योगेश पांडेय ने बताया कि यहां पर गत 10 साल से वर्मा व 5 साल से ठाकुर पदस्थ हैं। इन शिक्षकों ने सरकार से मिले एक-एक रूपए का सदुपयोग किया। संकुल का हिसाब सूचना बोर्ड में लिखकर मिसाल पेश की। पढ़ाई ऐसा कराया कि हरेक छात्र विषय में अधिकार रखता है। शिक्षक शाला प्रबंधक के साथ मिलकर स्कूल को श्रेष्ठ बना दिए।

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