बैजी समिति में हुई बड़ी चूक, किसान हो रहे परेशान

सेवा सहकारी समिति बेमेतरा के अतंर्गत आने वाले ग्राम बैजी के किसान धान बेचने के लिए टोकन लेने जाने की तैयारी करते हुए पंजीयन प्रमाण पत्र को देखा तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।

By: Laxmi Narayan Dewangan

Published: 03 Dec 2019, 07:15 AM IST

बेमेतरा . सेवा सहकारी समिति बेमेतरा के अतंर्गत आने वाले ग्राम बैजी के किसान धान बेचने के लिए टोकन लेने जाने की तैयारी करते हुए पंजीयन प्रमाण पत्र को देखा तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। ग्राम बैजी के छोटे छोटे किसानों ने अपने उपज की सही कीमत व सरकार के समर्थन मूल्य में धान बेचने के लिए समिति में पंजीयन कराया है। किसानों का कुल रकबा पंजीयन प्रमाण पत्र में लिखा हुआ है, लेकिन धान का रकबा शून्य दिखा रहा है। पंजीयन करने वाले से चूक हुई है या पटवारी ने गिरदावरी में चूक किया है, लेकिन किसान परेशान रहे।

किसानों ने समिति प्रबंधक व पटवारी से ली जानकारी
सोमवार को किसानों ने समिति पहुंचकर प्रबंधक से जानकारी ली। जिस पर प्रबंधक के द्वारा पटवारी का गिरदावरी रिपोर्ट के आधार पर समिति के आपरेटर के द्वारा पंजीयन सही करने का दावा किया। जिसके बाद किसान हल्का पटवारी के पास गए, जहां पर पटवारी किसानों के साथ फिर समिति प्रबंधक से मिले। दोनों ने अपना रिपोर्ट सही बताया। समिति प्रबंधक का कहना था कि पटवारी ने धान के रकबा के कालम में डेस - डेस कर दिया है, जिन्हे आपरेटर ने जीरो मानते हुए धान का रकबा शून्य कर दिया। वहीं पटवारी का कहना था कि पूर्व वर्ष के रकबा में कोई बदलाव नहीं होने के चलते उन्होने 2018-19 के रकबा के अनुसार 2019-20 के कालम में डेस-डेस कर दिया था, जिसे आपरेटर ने जीरो मान लिया।

तहसीलदार से मिलकर किसानों ने बताई समस्या
फिर बात वहां पर नहीं बनी और प्रभावित किसानों ने हल्का पटवारी के साथ तहसीलदार अजय चंद्रवंशी से मुलाकात की। जहां पर तहसीलदार ने समिति के आपरेटर की गलती बताते हुए किसानों को आश्वस्त किया कि उनके धान के रकबे का पंचनामा रिपोर्ट बनाकर जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के नोडल अधिकारी के माध्यम से एनआईसी रायपुर भेजकर धान के रकबा में संशोधन कराने का कराया जाएगा। एनआईसी से संशोधन पश्चात किसानों का धान खरीदा जाएगा। जिसके बाद किसानों ने राहत महसूस की।

इन किसानों का धान पंजीयन रकबा दिखा रहा शून्य
ग्राम बैजी के किसान दीपक वर्मा पिता अंजोरी वर्मा ने पिछले वर्ष 0.46 हेक्टेयर का धान पंजीयन कराया था, जिसमें उन्होने धान बेचा था। उसी प्रकार किसान दिलीप पिता फेरु का कुल 0.86 हेक्टेयर जमीन है, जिसमें से लगभग 0.40 हेक्टेयर में धान की फसल लिया है। किसान खोरबाहरा पिता मनराखन की कुल 1.60 हेक्टेयर जमीन है, जिसमें 1 हेक्टेयर में धान की फसल लिया था। इसी तरह का मामला किसान शत्रुहन वर्मा, भुनेश्वर वर्मा का भी है। ग्राम बैजी के सभी प्रभावित किसान विगत कई साल से धान बेच रहे है। जिनका इस बार रकबा शून्य कर दिया गया है।

रकबा का संशोधन करने के बाद खरीदा जाएगा धान
बेमेतरा तहसीलदार अजय चंद्रवंशी ने कहा कि ग्राम बैजी के किसान मिले थे। पटवारी के द्वारा दिए गए गिरदावरी रिपोर्ट को आपरेटर समझ नहीं पाया और उन्होंने लगभग 8 किसानों का रकबा शून्य कर दिया है। प्रभावित किसानों के धान रकबे का पंचनामा तैयार कर नोडल अधिकारी के माध्यम से रिपोर्ट एनआईसी रायपुर भेजा जाएगा। जहां पर रकबा का संशोधन करने के बाद किसानों से धान की खरीदी की जाएगी।

Laxmi Narayan Dewangan
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