टैबलेट के बंद होते ही फेल हुई राशन दुकान की कैशलेस स्कीम

राशन दुकानों को दिए गए बॉयोमैट्रिक डिवाइस के जवाब देने के साथ कैशलेस स्कीम फेल हो गई है।

By: Dakshi Sahu

Published: 10 Feb 2018, 07:04 AM IST

बेमेतरा. कैशलेस भुगतान को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने राशन दुकानों को दिए गए बॉयोमैट्रिक डिवाइस जवाब देने लगे हैं। उपकरण में तकनीकी खामियों की वजह से बीते दो महीनों से राशन दुकानों में कैशलेस फेल हो गई है। ऐसी स्थिति में राशन दुकानों में फिर से नगद लेनदेन की पुरानी व्यवस्था प्रभावी हो गई है। खाद्य विभाग समस्या से निजात पाने के लिए सॉफ्टवेयर के नए वर्सन का इंतजार कर रहा है।

301 दुकानों को दिए जाने थे बायोमेट्रिक सिस्टम

बताना होगा कि राशन दुकानों में नगद खरीदी की प्रथान पर लगाम कसने के लिए शासन ने जिले के 410 राशन दुकानों को बॉयोमैट्रिक उपकरण दिए गए थे, लेकिन आज स्थिति यह है कि एक भी दुकान कैशलेस नहीं हो पाया है। जिले की कुल 410 राशन दुकानों में से 301 दुकानों को उपकरण दिए जाने थे, लेकिन पर्याप्त संख्या में उपकरण के नहीं मिलने से केवल 237 दुकानों में बायोमैट्रिक उपकरण बांटे गए। एक उपकरण की कीमत 3 हजार रुपए है, इस तरह 237 पीडीएस दुकानों में कैशलेश भुगतान के लिए शासन ने 7 लाख 11 हजार रुपए खर्च किए थे। लेकिन कैशलेस भुगतान नहीं हो पाया।

अंगूठा लगाकर से सकते हैं राशन

बॉयोमैट्रिक मशीन में अंगूठा लगाकर राशनकार्ड धारक सस्ता राशन ले सकते हैं। राशन की जितनी राशि होगी, वह राशनकार्डधारक के खाते से कटकर संचालक के खाते में आ जाती। इसके लिए पहले ही राशनकार्डधारकों के आधार नंबर और बैंक अकाउंट नंबर को राशनकार्ड से लिंक भी कराया गया। लेकिन एक भी राशन दुकान कैशलेस नहीं हो पाया है। पत्रिका टीम की पड़ताल में सभी राशन दुकानों में नकद लेनदेन करना पाया। दुकानों को कैशलेस बनाने की जिम्मेदारी चिप्स को दी गई थी। सभी दुकान संचालकों के टैबलेट में सॉफ्टवेयर डाला गया।

जानिए, किन कारणों से योजना सफल नहीं हुई

राशनकार्ड धारक कैशलेस भुगतान को लेकर बिल्कुल गंभीर नहीं है। कारण यह भी है एक कार्ड के पीछे महज 100 से 150 रुपए का ही राशन महीने में मिलता है। इतनी कम राशि खाते से कोई देना नहीं चाहता। नगद भुगतान ही सुरक्षित मान रहे हैं। दूसरी ओर कैशलेस भुगतान के लिए तैयार डिजी पे सॉफ्टवेयर में सपोर्ट प्रॉब्लम है। दुकान संचालकों के पास मौजूद टैबलेट सॉफ्टवेयर को सपोर्ट नहीं कर रहा है। बाद में स्टेट से दूसरा वर्जन लांच हुआ, लेकिन अभी तक इसे टैबलेट में इंस्टाल नहीं किया गया है, जिसके कारण दिक्कतें बनी ही हुई हैं।

नेटवर्क सेवा नहीं होने से 100 दुकान नहीं जुड़े

अधिकारियों ने बताया कि जिले के शासन से 310 दुकान को टैबलेट देने के लिए चिन्हांकित किया गया था। जहां 237 दुकानों को टैबलेट दिए गए है, शेष 50 दुकानों में टैबलेट आते ही बांटे जाएंगे। अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में नेट कनेक्टिविटी काम नहीं होने से कैशलेस की समस्या बनी रहती है। जिसके कारण अभी ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा शुरू नहीं की गई है। भविष्य में नेट कनेक्टिविटी शुरू होते ही दुकानदारों को टैबलेट बांटी जाएगी।

दो महीने में 2 लाख का हुआ कैशलेस लेनदेन

जिले के 237 दुकानों के उपकरण के जरिए कैशलेस सिस्टम से जुडऩे के बाद दो महीने के दौरान दो लाख रुपए का कैशलेस लेनदेन किया गया। राशि के हिसाब से बेमेतरा जिला प्रदेश में तीसरे पायदान पर था। अब सॉफ्टवेयर के नए वर्सन आने का इंतजार करना पड़ रहा है। तभी कार्य आगे बढ़ पाएगा। इस संबंध में खाद्य अधिकारी भूपेंद्र मिश्रा का कहना है कि योजना की शुरुआत में टैबलेट से 2 लाख रुपए का कैशलेस किया गया था। सॉफ्टवेयर में तकनीकी दिक्कतें आने के कारण अब नए वर्सन आने के बाद कार्य शुरू किया जाएगा।

Dakshi Sahu Desk/Reporting
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