सरकारी स्कूल में सीबीएसई कोर्स की पढ़ाई करने वाले बच्चे परेशान

सरकारी स्कूल में अंग्रेजी माध्यम से सीबीएसई कोर्स की पढ़ाई करने वाले बच्चे शिक्षकों के साथ किताबों की कमी से जूझ रहे हैं।

By: Rajkumar Bhatt

Published: 24 Jul 2018, 01:19 AM IST

बेमेतरा. सरकारी स्कूल में बच्चों को बेहतर शिक्षा के उद्देश्य से अंग्रेजी माध्यम से शुरू की गई सीबीएसई पाठ्यक्रम से पढ़ाई शुरुआती दिक्कतों से गुजर रही है। स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों को जहां अब तक पाठ्यपुस्तक नहीं मिल पाया है, वहीं कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी है। ऐसी स्थिति में दूसरे स्कूल से टीसी निकालकर एडमिशन लेने वाले बच्चे वापस टीसी निकालकर पुन: पुराने स्कूलों में प्रवेश ले रहे हैं।

जिले में आठ स्कूलों में पढ़ाई

जिले के चारों ब्लॉक के एक-एक प्रायमरी और मिडिल स्कूल में अंग्रेजी माध्यम से सीबीएसई की पढ़ाई की शुरुआत पूरे जोश-खरोश के साथ की गई। पहले आओ, पहले पाओ के तर्ज पर दिए गए प्रवेश का नतीजा उत्साहवर्धक रहा। बेमेतरा में प्रायमरी स्कूल में निर्धारित 50 सीटों में 53 तो मिडिल स्कूल की निर्धारित 50 सीटों में 54 छात्रों को प्रवेश दिया गया है। बेरला में प्रायमरी शाला की निर्धारित 50 सीट अब पूरी भर गई है, वहीं मिडिल स्कूल में निर्धारित 50 सीटों में से 45 सीटों पर छात्राओं ने प्रवेश ले लिया है। नवागढ़ में स्थिति कमजोर है, जहां प्रायमरी और मिडिल स्कूल में निर्धारित सीटों में से आधे से कम बच्चों ने प्रवेश लिया है।

नया पाठ्यक्रम पढ़ाने शिक्षकों का टोटा

अंग्रेजी माध्यम से सीबीएसई पाठ्यक्रम की पढ़ाई के लिए शिक्षा विभाग उचित व्यवस्था नहीं कर पाया है। बेरला में प्रायमरी स्कूल में पढ़ाने के लिए जहां शिक्षक ही नहीं है, वहीं मिडिल स्कूल में गिनती के दो शिक्षक हैं। बेमेतरा में प्रायमरी स्कूल के लिए 2 तो मिडिल स्कूल के लिए 3 शिक्षक नियुक्त किए गए हैं। ये शिक्षक भी वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर पढ़ा रहे हैं। स्कूल के लिए अलग से शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई है।

नहीं पहुंचा है पाठ्य पुस्तक

नए कोर्स की पढ़ाई के लिए भले ही स्थानीय स्तर पर जमकर प्रचार-प्रसार किया गया हो, लेकिन राज्य स्तर पर तैयारी कमजोर है। अब तक स्कूलों में भर्ती लेने वाले बच्चों को पाठ्य पुस्तक नहीं मिल पाया है। यह स्थिति केवल बेमेतरा, बेरला या नवागढ़ की ही नहीं है। जानकारी के अनुसार, ऐसी स्थिति पूरे प्रदेश की है, क्योंकि पाठ्य पुस्तक निगम पुस्तकों को तैयार ही नहीं कर पाया है। ऐसे में कक्षा में बच्चों को आठ घंटे शिक्षक क्या पढ़ाते होंगे, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

टीसी निकालने को मजबूर छात्र

सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम से सीबीएसई कोर्स की पढ़ाई को लेकर उत्साह में आकर पालकों ने भले ही अपने बच्चों का दूसरे स्कूल से टीसी निकालकर प्रवेश ले लिया हो, लेकिन अब तक पढ़ाई शुरू नहीं होने से अब हताशा महसूस कर रहे हैं। कई बच्चे तो टीसी निकालकर वापस अपने पुराने स्कूल में एडमिशन ले रहे हैं। बेरला में अपनी बच्चों का एडमिशन कराने वाले पालक गोपाल सिन्हा कहते हैं कि सरकार की सोच तो बहुत अच्छी है, लेकिन क्रियान्वयन कमजोर है।

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