छत्तीसगढ़ के परंपरागत खेलों को बढ़ावा देने सरकार ने दिया लाखों का फंड

राजीव गांधी शिक्षा मिशन के तहत आने वाले स्कूलों में खेलगढिय़ा कार्यक्रम प्रारंभ, अब स्कूलों में बच्चे खेलेंगे बाटी-कंचा, भौंरा और पिट्ठुल

By: Laxmi Narayan Dewangan

Published: 29 Mar 2019, 07:15 AM IST

बेमेतरा. जिले के शासकीय प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक शालाओं को छत्तीसगढ़ के परंपरागत खेलों को बढ़ावा देने के लिए जिले के 387 प्राथमिक शालाओं को तीन-तीन हजार रुपए एवं पूर्व माध्यमिक शालाओं को पांच-पांच हजार रुपए दिए गए हैं। जिले को 41 लाख 64 हजार रुपए का फंड जारी किया गया है। साथ ही शालाओं में सामान खरीदने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

छत्तीसगढ़ के पारंपरिक 30 खेलों को किया गया है शामिल
बताना होगा कि जिले में राजीव गांधी शिक्षा मिशन के तहत समग्र शिक्षा के अधीन आने वाले स्कूलों में खेलगढिय़ा कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है। प्राथमिक शालाओं में बाटी कंचा खेलना, रस्सीकूद, बोरादौड़, गेड़ी, टायर दौड़, रस्साकसी, कैरम, भौंरा, पिट्ठुल, पतंगबाजी, गोला फेंक सहित 30 खेलों को शामिल किया गया है। इसके आलावा पूर्व माध्यमिक शालाओं में पिट्ठुल, साइकिलिंग, गोला फेंक, आंख मिचौली, जूडो, योग, पंजा लड़ाना, कुश्ती, मलखंभ, बोरा दौड़, बास्केटबॉल आदि को शामिल किया गया है। खेलों के चयन के दौरान बालिकाओं व विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए खेल का चयन करना होगा। साथ ही फंड कम होने की स्थिति में खेलों को बढ़ावा देने वालों सेे मदद भी ली जा सकती है।

पुराने टायर, भौंरा-पिट्ठुल के लिए गेंद लेनी होगी
गांवों की गलियों में खेलने जाने वाले ऐसे खेल, जिसमें खेल सामानों की जरूरत हो सकती है, उसे खरीदा जाएगा। जिनके लिए अनुमानित मूल्य का निर्धारण किया गया है। सबसे खास बात है कि जिन खेलों को स्कूलों में नजरअंदाज किया जा रहा था, उसे बच्चों को खेलने के लिए प्रेरित किया जाएगा। विलुप्त होते खेलों को पुनर्जीवित किया जा जाएगा।

प्रधान पाठक होंगे समिति के अध्यक्ष
स्कूलों में संसाधनों, खेल सामग्री, मैदानों की उपलब्धता के आधार पर बच्चे की उम्र के लायक, खेल का चयन किया जाना है। खेलों को बढ़ावा देने के लिए सामग्री खरीदी के लिए क्रय समिति का गठन किया गया है। इसमें संस्था प्रमुख अध्यक्ष होंगे। वरिष्ठ शिक्षक, बालक या बालिका सदस्य, विषय के जानकार सहित चार सदस्य हैं। जिन्हें सामग्री खरीद कर भौतिक सत्यापन कराना होगा। इस संबंध में बेमेतरा डीईओ सीएस ध्रुव ने कहा कि जिले के स्कूलों को राज्य कार्यालय से सीधे फंड जारी किया गया है। इससे क्रय समिति को सामग्री क्रय करना होगा।

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