मरकर भी चार माह के मासूम बच्चे की जिंदगी बचा गई मां

मरकर भी चार माह के मासूम बच्चे की जिंदगी बचा गई मां

Laxmi Narayan Dewangan | Publish: Sep, 09 2018 12:26:20 AM (IST) Bemetara, Chhattisgarh, India

राहगीरों के खून से फिर लाल हुआ नेशनल हाइवे, सड़क हादसे में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत

बेमेतरा. शनिवार को एक बार फिर राहगीरों के खून से नेशनल हाइवे लाल हो गया। तीजा-पोला पर्व मनाने के लिए गांव जा रहे परिवार के तीन सदस्यों की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। नेशनल हाइवे पर हुए सड़क हादसे में मां गायत्री साहू की गोद में चार माह का बालक सुरक्षित था। उसके रोने की आवाज सुनकर वहां पर भीड़ एकत्र हो गई। लोगों ने मां की गोद से बच्चे को उठा कर अस्पताल पहुंचा।

कवर्धा मार्ग पर बेराखार के पास हुआ हादसा
घटना जिला मुख्यालय से 16 किलोमीटर दूर कवर्धा मार्ग पर बेरा खार के पास हुई। घटना के दौरान एक मोटर साइकिल पर रायपुर निवासी पीतांबर राम साहू पिता चैन सिंह साहू (35), गायत्री साहू पति पीतांबर साहू (30), शिवानी साहू (4) एवं चार माह का मासूम सवार थे। इनमें से चार माह के मासूम को छोड़ कर सभी की मौत हो गई। दूसरी मोटर साइकिल में ग्राम खैरझिटी निवासी रामस्वरूप ध्रुव (50) और मोतिम बाई (45) सवार थे। रामस्वरूप को हाथ, पैर व सिर में चोट आई है। मोतिम बाई को मामूल चोट आई है। तीसरी मोटरसाइकिल पर मेडेसरा निवासी मिनेश सिन्हा (30) सवार था, जिसे गंभीर चोट आई है। घायलों को संजीवन से जिला अस्पताल पहुंचाया गया। बच्चे को एनआरसी केंद्र में रखा गया है। दो घायलों को मेकाहारा रायपुर रेफर कर दिया गया।

तीन-तीन शव एक साथ देखकर रो पड़ा गांव
बताया जा रहा है अभी बालक का नामकरण संस्कार होना भी बाकी था। इस सड़क हादसे में मृत पीतांबर, गायत्री एवं शिवानी का शव जैसे ही गांव बीरमपुर पहुंचा, माहौल गमगीन हो गया। एक साथ तीन शव देखकर परिवार के साथ गांव वाले भी रोने लगे। खबर मिलते ही आसपास के गांव के लोग भी बड़ी संख्या में पहुंचे। गांव के मुक्तिधाम में पिता चैन सिंह साहू ने अपने बड़े बेटे को मुखाग्नि दी। शासन की ओर से परिवार को 10-10 हजार रुपए की सहायता राशि का चेक दिया गया। विधायक लाभचंद बाफना व साजा तहसीलदार ने चेक पीडि़त परिवार को सौंपा।

करोड़ों की सड़क में नहीं बनाया डिवाइडर, 75 दिन में 13 मौतें
ज्ञात हो कि नेशनल हाइवे का चौड़ीकरण किया गया है, लेकिन डिवाइडर नहीं बनाया गया है, जो हादसे की सबसे बड़ी वजह है। इस कारण दोनों ओर से आने वाले वाहन अकसर टकरा जाते हैं। चौराहे और तिराहे पर अलग-अलग दिशा से आने वाले चार पहिया और दोपहिया वाहन चालकों की रफ्तार कम करने के लिए भी किसी तरह का प्रयास नहीं किया गया है। सिटी कोतवाली के अनुसार के ढाई महीने में थाने में सड़क हादसे के कुल 27 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। जिसमें 13 लोगों की मौत हुई है, वहीं 25 लेाग घायल हुए हैं। जिसमें कई हादसे जिला मुख्यालय में हुए हैं। जिले से होकर गुजरे नेशनल हाइवे पर स्पीड ब्रेकर बनाने की मांग लंबे समय से चल रही है। ब्रेकर बनाने का प्रावधान नहीं होने के कारण मांग सिरे से खारिज की जा रही है।

80 संवेदनशील थाने में बेमेतरा भी शामिल
जिला मुख्यालय से होकर गुजरने वाला नेशनल हाइवे 30 में आए दिन हादसे होने लगे हैं, जिससे उसे डेंजर जोन माना जा रहा है। लोग सड़क पर खौफ में आना-जाना करते हैं। हादसे को लेकर पूरे प्रदेश में इस मार्ग को सबसे ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है। प्रदेश के 80 थानों को पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा संवेदनशील माना गया है। इन थानों में बेमेतरा थाना भी शामिल है। थाना को संवेदनशील थानों में ग्रुप डी में शामिल किया गया है। इस ग्रुप में ऐसे थाने शामिल हैं, जहां 101 से 150 मौते हुई हैं। इस सूची में बेमेतरा थाने को 5वें क्रम में रखा गया है। बीते कुछ साल में हादसे के दौरान यहां 122 मौत हुई है।

डिवाइडर बनाने पत्र लिखा गया
एसपी एचआर मनहर ने बताया कि नेशनल हाइवे पर डिवाइडर नहीं होने के कारण हादसे हो रहे हैं। जिला प्रशासन एवं पुलिस हेड क्वार्टर को पत्र लिख कर डिवाइडर बनाने की बात कही गई है। साथ ही जिले में वाहनों की जांच एवं कार्रवाई की जा र ही है। लोगों की लापरवाही भी हादसे का कारण बन रहा है। इसे देखते हुए कार्रवाई तेज की जाएगी। वहीं मालवाहकों में सवारी ढोने को रोकने के लिए अभियान चलाया जाएगा।

MP/CG लाइव टीवी

खबरें और लेख पड़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते है । हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते है ।
OK
Ad Block is Banned