बेमेतरा में एक ही जंगल, जहां के पेड़ भी सूखे

वनविहीन बेमेतरा जिले में कैम्पा योजना के तहत उसलापुर में 125 एकड़ में लगाए गए सत्तर हजार में से बहुत से पौधे आगजनी से सूख गए।

By: Rajkumar Bhatt

Published: 20 Jul 2018, 11:56 PM IST

बेमेतरा. वन विहीन बेमेतरा जिले को हरा-भरा करने की चुनौती वर्षों से रही है। इसके लिए साल दर साल अलग-अलग विभागों से पैाधा तैयार कर रेापण कराया जा रहा है। लेकिन पौधरोपण का शत-प्रतिशत लाभ जिले को नहीं मिल पा रहा है। वहीं सुरक्षा को लेकर भी योजना में कमी नजर आ रही है। पौधरोपण स्थल पर बाड़-घेरा नदारद नजर आ रहे हैं। रिकार्डों में जिले में कराए गए पौधरोपण को सफल बताया जाता है, लेकिन वास्तव में जमीनी हकीकत कुछ और है।

उसलापुर में 125 एकड़ में लगाए 71 हजार पौधे

जिले में कैम्पा येाजना के तहत ग्राम उसलापुर बिरमपुर के 57 हेक्टेयर याने 125 एकड़ में 71500 पैाधों का रेापण किया गया है। इसके अलावा 60 हजार औषधीय पौधे लगाया गए थे। वहीं नवागढ़ विकासंखड के ग्राम जुनवानी में 70 एकड़ जमीन पर कैम्पा येाजना के तहत 73 हजार पैाधों का रेापण किया गया था। येाजना के तहत करीब 2 लाख का पैाधरेापण कर दोनों स्थलों को जंगल घोषित किया जाना था, लेकिन अब तक केवल उसलापुर को शासन ने जंगल घोषित किया है।

आगजनी से सूखे गए पौधे

बताना होगा कि जिले की सबसे बड़ी पौधरोपण की येाजना ग्राम उसलापुर बिरमपुर में वर्ष 2013 में कैम्पा के तहत बनाई गई थी। जहां पर औषधीय पौधों के अलावा विभिन्न किस्म के वानिकी पौधा भी लगाए गए थे। लेकिन वर्ष 2016 में वन में लगी आग के बाद सें पेड़ों का अस्तित्व समाप्त होने की स्थिति में है। दूसरी तरफ शेष बचे पैाधों का आज पांच वर्ष बाद भी ग्रोथ नहीं मिल पाया है। गिने-चुने ही पेड़ बन पाए हैं।

दो साल पौधे लगाने के बाद तीसरे साल भूल गए

इसके साथ ही ग्राम झालम, लालपुर, अमोरा में कुल 51 हजार पैाधों का रोपण किया गया था। वर्ष 2015 के दैारान गाम भिलोैनी, लोहडंगिया, किरना, मउ में 44 हजार पौधे लगाए गए थे। 2016 में खिलोरा, मउ, नगधा, पेडी रवेली, अंधियारखोर से माखनपुर मार्ग व दोहतरा में 50 हजार पैाधे लगाए गए थे। वहीं वन विभाग के पास बीते वर्ष पौधरोपण की योजना नहीं थी। वन विभाग के जिम्मेदारों के अनुसार पौधरोपण किए गए स्थलों पर 80 से 90 फीसदी पौधे जीवित हैं, जो बेहतर है।

ऑक्सीजोन के समीप मवेशियों का कब्जा

बताना होगा कि जिला मुख्यालय में ऑक्सीजोन बनाने के लिए सिंधौरी के रामजानकी उद्यान का चयन किया गया है। जहां पर करीब 5400 पैाधों का रेापण किया जाना है। स्थल के करीब ही विभाग द्वारा पूर्व वर्ष में भी पौधरोपण किया गया था, जहां पर रोपे गए पैाधों में 60 फीसदी पौधे ही जीवित नजर आ रहे हैं। सुरक्षा के अभाव में पौधों को खुलेआम मवेशी नुकसान पहुंचा रहे हैं।

Rajkumar Bhatt
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