बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारों को ही नहीं परवाह, 160 स्कूलों का निरीक्षण नहीं

सरकारी स्कूलों में बदहाल हो रही शिक्षा व्यवस्था के बाद भी जिम्मेदार स्कूल निरीक्षण की जिम्मेदारी नहीं निभा रहे।

बेमेतरा. सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए चलाए जा रहे डॉ एपीजे अब्दुल कलाम शिक्षा गुणवत्ता अभियान दम तोड़ता नजर आ रहा है। अभियान के दौरान स्कूलों के निरीक्षण के लिए जिम्मेदारों ने रुचि नहीं दिखाई है। स्कूलों में दूसरा सत्र बीतने के बाद भी जिले के 160 स्कूलों का निरीक्षण नहीं हो पाया है।

160 स्कूलों का निरीक्षण करना शेष

सर्व शिक्षा अभियान से मिली जानकारी के अनुसार, 10 से 25 जनवरी तक जिले के 282 ऐसे प्राथमिक व माध्यमिक स्कूल में शिक्षा गुणवत्ता अभियान चलाया गया, जहां पढ़ाई का स्तर सी व डी ग्रेड में शामिल है। इन स्कूलों के निरीक्षण की जिम्मेदारी जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों को सौंपी गई थी, लेकिन समयावधि के बाद भी इन 282 में से केवल 122 स्कूलों का ही निरीक्षण किया गया, आज भी 160 स्कूलों का निरीक्षण किया जाना बाकी है। इसी तरह बेमेतरा ब्लॉक के प्राथमिक व मिडिल के 78 में से 37 स्कूलों का निरीक्षण किया गया, इसके बाद शेष 41 स्कूलों का निरीक्षण नहीं हो पाया। बेरला ब्लॉक के 41 में से 31 स्कूलों का निरीक्षण हुआ, 10 स्कूलों का निरीक्षण नहीं हो पाया। साजा ब्लॉक के 58 स्कूलों में से केवल 28 का निरीक्षण हो पाया, वहीं 30 स्कूलों का निरीक्षण करना बाकी है। ऐसे में शिक्षा गुणवत्ता अभियान महज औपचारिकता बनकर रह गई।

नवागढ़ में स्थिति सबसे ज्यादा खराब

15 दिनों तक चले शिक्षा गुणवत्ता अभियान में नवागढ़ ब्लॉक के स्कूलों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां स्कूल निरीक्षण की जिम्मेदारी को जनप्रतिनिधि व अधिकारियों ने गंभीरता से नहीं लिया। नवागढ़ ब्लॉक के 105 स्कूलों में केवल 26 स्कूल का ही निरीक्षण कर जनप्रतिनिधि व अधिकारियों ने मिली जिम्मेदारी को पूरा समझ लिया। आज भी 79 स्कूलों का निरीक्षण नहीं हो पाया है। नवागढ़ ब्लॉक के 78 प्राथमिक स्कूलों में से केवल 20 स्कूलों का निरीक्षण किया गया, जहां शेष 58 स्कूलों का निरीक्षण करना शेष रह गए है। इसी तरह 12 माध्यमिक शालाओं में से केवल 9 स्कूलों का निरीक्षण किया गया है। 3 स्कूलों का निरीक्षण बाकी है।

सरकारी स्कूलों के स्तर में आ रही गिरावट

शिक्षकों की कमी के चलते सरकारी स्कूलों में बच्चों की नियमित पढ़ाई नहीं हो पा रही है, इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने के साथ शिक्षा गुणवत्ता का स्तर गिरता जा रहा है। स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सक्षम परिवार अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में डालने से कतराने लगे हैं, जिससे सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या लगातार कम हो रही है।

Satya Narayan Shukla
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