रिटायर्ड शिक्षक की बड़ी सोच, पैसे बचाकर क्या करूंगा, पेंशन के 2.50 लाख से मिनी वेंटिलेंटर खरीदकर अस्पताल को किया दान

Coronavirus in Bemetara: बेमेतरा जिले के बेरला नगर के एक वयोवृद्ध शिक्षक पूसराम सिन्हा ने समाज के लिए अपनी पेंशन की राशि खर्च कर दी।

By: Dakshi Sahu

Published: 08 May 2021, 01:51 PM IST

बेमेतरा. बेमेतरा जिले के बेरला नगर के एक वयोवृद्ध शिक्षक पूसराम सिन्हा ने समाज के लिए अपनी पेंशन की राशि खर्च कर दी। उन्होंने अपने पेंशन की राशि ढाई लाख रुपए से एक मिनी वेंटिलेटर मशीन (mini ventilator) खरीदकर अपने माता-पिता की स्मृति में बेरला के शासकीय अस्पताल को सौंपी। करीब 70 साल के बुजुर्ग शिक्षक ने संकट की इस घड़ी में मानवता की अनोखी मिसाल पेश की है। शिक्षक समाज में ज्ञान की रोशनी फैलाता है। इस शिक्षक ने रिटायर्ड होने के बाद भी पेंशन की राशि से मानवता का प्रकाश फैलाया है। बुजुर्ग शिक्षक की सोच बहुत बड़ी है उनका कहना है कि वे अपना जीवन जी चुके हैं। पैसे बचाकर क्या करेंगे। इस पैसे से किसी की जान बचती है, किसी को नया जीवन मिलता है तो पैसे का इससे बेहतर उपयोग और नहीं हो सकता। कोरोना मरीजों को इस मिनी वेंटिलेंटर की जरूरत है। इसीलिए पेंशन की रकम से मिनी वेंटिलेंटर खरीदने का निर्णय लिया। चिकित्सकों ने बताया इस मशीन से ऐसे मरीजों का उपचार किया जा सकेगा जिनका ऑक्सीजन लेबल 80 से 90 के बीच रहता है।

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कोरोना मरीजों के लिए जीवनदायक है मशीन
रिटायर्ड शिक्षक ने शुक्रवार को बेरला शासकीय अस्पताल को जैसे ही मशीन सौंपी तुरंत वहां एक भर्ती मरीज को उपलब्ध कराया गया। मरीज को इसकी जरूरत थी। शिक्षक सिन्हा ने यह देखकर कहा कि बैंक में रकम जमा रखने की बजाय सही समय में जरूरतमंदों के लिए उपकरण उपलब्ध कराना सही निर्णय है। बेरला बीएमओ डॉ. जितेंद्र कुंजाम ने बताया कि यह उपकरण आपात स्थिति के मरीजों के लिए बहुउपयोगी है। मिनी वेंटिलेंटर मशीन मिलने से क्षेत्र के जरूरतमंद मरीजों के लिए यह जीवनदायक साबित होगा।

बेटे ने कहा पिता के फैसले पर गर्व है
अस्पताल को मशीन सौंपने के मौके पर मशीन सप्लाई करने वाली कंपनी की ओर से इंजीनियर भी पहुंचे थे। उन्होंने चिकित्सकों और स्टाफ को संचालन संबंधी पूरी जानकारी दी। इस अवसर पर दानदाता पूसराम सिन्हा के पुत्र ओमप्रकाश सिन्हा व अन्य परिजन मौजूद थे। ओमप्रकाश ने कहा उन्हें अपने पिता के इस निर्णय पर बहुत ज्यादा गर्व है। कोरोना महामारी में हजारों परिवार उजड़ गए ऐसे में एक मशीन कई लोगों को नया जीवन दे सकती है।

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