छत्तीसगढ़ के प्रस्तावित पंक्षी अभ्यारण्य गिधवा से रूठ गए प्रवासी साइबेरियन

चार साल में भी नहीं बन पाया पंक्षी अभ्यारण्य, ६० लाख के प्रोजेक्ट लेकर गंभीर नहीं हैं वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी

By: Laxmi Narayan Dewangan

Published: 10 Mar 2019, 07:10 AM IST

बेमेतरा . प्रवासी परिंदे साइबेरियन दुर्ग व बेमेतरा से विमुख होने लगी है। इस बार ठंड में इन प्रवासी पक्षियों का झुंड दिखाई नहीं दिया। यह पहला मौका है जब प्रवासी पक्षी विमुख हुई है। उधर वन विभाग भी इन पक्षियों को अनुकूल माहौल देकर संरक्षित करने के पंक्षी अभ्यारण्य प्रोजेक्ट को लेकर गंभीर नहीं है। इस प्रोजेक्ट से लिए शासन ने ६० लाख रुपए स्वीकृत किया है। चार साल पहले इस पर काम शुरू हुआ। हालत यह है कि प्रोजेक्ट पर काम अब तक पूरा नहीं हुआ है। विभाग ने चार साल में सिर्फ २० लाख रुपए ही खर्च किया है। इन पक्षियों का प्रमुख ठिकाना गिधवा (बेमेतरा) है। दुर्ग में धनोरा में भी इन पक्षियों को देखा जाता है।

गिधवा में चार माह रहता है साइबेरियन पक्षी
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गिधवा में साइबेरियन पक्षी के झुंड लगभग चार माह तक रहता था। मौसम के बदलते ही वे वापस लौट जाते हैं। पिछले तीन वर्ष से जिस तालाब को विकसित करने प्रोजेक्ट तैयार किया था वहां पानी ठहर ही नहीं रहा है। वन विभाग के अधिकारी भी तालाब में पानी नहीं ठहरने के कारणों को समझ नहीं पा रहे हैं।पानी के अभाव में प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पा रहा है। काम पिछले तीन वर्ष से अटका पड़ा है। अधिकारियों का कहना है कि वे आने वाले बारिश में पानी को स्टोरेज करने की व्यवस्था पर विशेष ध्यान देंगे। सफलता मिली तो वे आगे का काम शुरू करेंगे। ठंड के मौसम में प्रदेश की जलवायू पक्षियों के लिए बेहतर है। यही कारण है कि दीपावली के बाद से जिले में पूर्वी देशों से आने वाली साइबेरियन पक्षी का बसेरा रहता है। ये पक्षी लगभग चार माह यहां रहते हैं और मार्च के आते आते वापस लौट जाते है।

इस बार ठंड में नहीं आए पक्षी
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पिछले तीन साल से गिधवा का तालाब सूख जा रहा है। बारिश का पानी अल्प समय के लिए ही ठहराता है। तालाब सूखने के कारण दो वर्ष पहले अपेक्षकृत कम साइबेरियन आए। इस साल तो तालाब में बिलकुल पानी नहीं था। जिसके कारण साइबेरियन नजर ही नहीं आईं।

पानी व हरे-भरे स्थान को पसंद करते हैं परिंदे
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रवासी साइबेरियन आमतौर पर पानी वाले स्थानों पर रहना पसंद करती हैं। खेतों में दाना आसानी से मिलने के कारण तालाब के आसपास पेड़ों में घोसला बना लेती हैं। इसलिए वन विभाग ने गिधवा (बेमेतरा) को चिन्हित कर प्रवासी पक्षी को संरक्षित करने का प्रोजेक्ट तैयार किया।

अधिकारी नहीं समझ पाए तालाब सूखने की वजह
हर साल ठंड में हजारों किलोमीटर उड़ान भरकर ये पक्षी गिधवा में आते हैं। करीब चार माह गिधवा व आसपास उनका ठिकाना होता है। इस बार ठंड में इन पक्षियों के नहीं आने की वजह पानी का आभाव को माना जा रहा है। वन विभाग जिस तालाब को विकसित व संरक्षित करने में लगा है उसमें पानी नहीं ठहर रहा है। तालाब में पानी नहीं होने के कारण प्रवासी पक्षी विमुख हो रही है। तीन साल से इस तालाब का सूख रहा है। वन विभाग के अधिकारी भी हैरान हैं। वो तालाब का पानी सूखने की वजह नहीं ढंूढ पा रहे हैं। अधिकारियों को कहना है कि तीन साल से इसी वजह से प्रवासी पक्षियों की संख्या घटती जा रही थी और इस साल तो यह आई ही नहीं।

तालाब निर्माण के लिए विभाग कर रहा प्लानिंग
अधिकारी अब नया तालाब निर्माण पर विचार कर रहे हैं। उनका कहना है कि साइबेरियन अगर किसी निश्चित स्थान पर पहुंचती है और वहां पानी की व्यवस्था नहीं है तो वहां भी तालाब का निर्माण किया जाएगा। तालाब निर्माण मनरेगा के माध्यम से कराया जाएगा। साथ ही वहां पर पौध रोपण कर प्रवाशी पक्षियों के लिहाज से वातावरण तैयार किया जाएगा। वन विभाग के अधिकारी इस बात का पता लगा रहे है कि कहीं प्रवासी पक्षियों ने स्थान तो नहीं बदला है।

शिकार पर कड़ाई से लगाई पाबंदी
प्रवासी पक्षियों को सरंक्षित करने वन विभाग ने एक अच्छा काम जरूर किया कि इस पक्षियों के शिकार पर कड़ाई से पाबंदी लगाई। अधिकारियों का कहना है कि पहले स्थानीय शिकारी इन प्रवासी पक्षियों का शिकार करते थे। विभाग ने इस पर न केवल पांबदी लगाई बल्कि ठंड के समय उस इलाके में नजर रखने के लिए अमला भी तैनात रखता है।

पंक्षी अभ्यारण्य प्रोजेक्ट में होंगे ये काम
वन विभाग द्वारा बनाए गए प्रोजेक्ट में जो काम होने हैं उनमें तालाब को संवार कर प्रवासा पक्षी के लिहाज से उस तालाब में निस्तारी प्रतिबंधित करना, निर्धारित क्षेत्र पर फैसिंग कर प्रवासी पक्षियों को सुरक्षा देना. प्रवाशी पक्षियों के लिए अनुकूल भोजन देने फल दौर पौध लगाना और कैम्पस की सुरक्षा के लिहाज से कर्मचारी की नियुक्ति करना प्रमुखता से शामिल है।

गिधवा के आसपास के गांवों में कर रहे हैं सर्वे
दुर्ग के डीएफओ धम्मशील गनवीर ने बताया कि गिधवा में तालाब को विकसित करने का काम जल्द पूरा किया जाएगा। इस बार वहां बारिश कम हुई। तालाब में पानी नहीं ठहरा। जिसके कारण काम रूक गया है। हम सर्वे कर रहे हैं कि बेहतर क्या हो सकता है। इस बार वहां पर साइबेरियन पक्षी नहीं आई। आसपास के गावों में हमारा सर्वे का कार्य चालू है।

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