scriptVillagers protest against opening of sponge iron factory in Bemetara | कृषि मंत्री के गृह जिले में स्पंज आयरन फैक्ट्री का जमकर विरोध, जनसुनवाई में हजारों ग्रामीणों ने कहा अपने वादे से मुकर गई सरकार | Patrika News

कृषि मंत्री के गृह जिले में स्पंज आयरन फैक्ट्री का जमकर विरोध, जनसुनवाई में हजारों ग्रामीणों ने कहा अपने वादे से मुकर गई सरकार

बेमेतरा जिले के बेरला ब्लॉक के ग्राम बोरिया मे स्पंज आयरन प्लांट स्थापना के लिए बुलाई गई जनसुनवाई में ग्रामीणों ने पुरजोर तरीके से विरोध दर्ज कराया।

बेमेतरा

Published: January 11, 2022 09:30:47 am

बेमेतरा/बेरला. बेमेतरा जिले के बेरला ब्लॉक के ग्राम बोरिया मे स्पंज आयरन प्लांट स्थापना के लिए बुलाई गई जनसुनवाई में ग्रामीणों ने पुरजोर तरीके से विरोध दर्ज कराया। जनसुनवाई में ग्राम बोरिया समेत आसपास के गांव करेली, चंडी, तिलई, गोड़गिरी, मौली, खमतराई, हसदा, सांकरा, बहेरा, धौराभाठा, मोहरेंगा, खजरी, बांसा आदि गांवो के हजारों ग्रामीण पहुंचे थे। बेमेतरा एसडीएम दुर्गेश वर्मा की अध्यक्षता और पर्यावरण अधिकारी डॉ. अनिता सावंत की मौजूदगी में सुबह 11 बजे शरू हुई जनसुनवाई शाम करीब 4:30 बजे समाप्त हुई। कंपनी मेसर्स नीरगंगा इस्पात प्राईवेट लिमिटेड ग्राम बोरिया में प्रस्तावित स्पंज आयरन 2,31,000 टन, माईल्ड स्टील बिलेट 2,32,848 टन, रिरोल्ड स्टील प्रोडक्ट 2,25,863 टन, कैप्टिव पावर प्लांट 25 मेगावाट प्रति वर्ष क्षमता के प्लांट की स्थापना के लिए जनसुनवाई रखी गई थी। जनसुनवाई में किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पुलिस बल तैनात था। यहां राजनंदगांव, कवर्धा, बालोद और बेमेतरा जिला से पांच बसोंं से पहुचे 200 से अधिक जवान तैनात थे। इस दौरान आंनद यादव, धर्मेंद्र साहू, पोषण परगनिहा आदि उपस्थित थे।
कृषि मंत्री के गृह जिले में स्पंज आयरन फैक्ट्री का जमकर विरोध, जनसुनवाई में हजारों ग्रामीणों ने कहा अपने वादे से मुकर गई सरकार
कृषि मंत्री के गृह जिले में स्पंज आयरन फैक्ट्री का जमकर विरोध, जनसुनवाई में हजारों ग्रामीणों ने कहा अपने वादे से मुकर गई सरकार
432 ग्रामीणों ने दर्ज कराया बयान, सरपंच पर फूटा आक्रोश
जनसुनवाई में ग्राम बोरिया समेत आसपास के गांवो के 432 ग्रामीणों ने मंच पर बोलकर विरोध किया। जिसकी जिला प्रशासन की ओर से बकायदा वीडियो रिकॉर्डिंग की जा रही थी। वही मंच पर बोले हर ग्रामीण का नाम और बयान दर्ज किया गया। जनसुनवाई में कम्पनी के एजेंटों के खिलाफ ग्रामीण जमकर नारेबाजी की। प्लांट स्थापना के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने वाले ग्राम सरपंच द्वारिका प्रसाद पाल पर ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। यहां ग्रामीणों ने सरपंच पर आर्थिक हितों के लिए प्लांट स्थापना के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने के आरोप लगाए। इस पर सरपंच ने जनसुनवाई स्थल में ग्रामीणों की मांग का समर्थन करते हुए गांव में प्लांट स्थापना नहीं होने की बात कही। उन्होंने कहा कि सभी ग्रामीण एकजुट होकर प्लांट स्थापना का विरोध कर रहे हैं। ग्राम पंचायत उनकी मांग के साथ खड़ी हैं।
बिना मास्क के घूमते लोगों ने प्रशासन के व्यवस्था की पोल खोली
प्रदेश में कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण स्कूल-कालेज को बंद होने की स्थिति है। बावजूद हजारो लोगो की भीड़ इक_ा कर जनसुनवाई करना, कोरोना गाइड लाइन का खुला उल्लंघन है। कोरोना से बचाव के लिए कलेक्टर ने धारा 144 एवं नाईट कफ्र्यू लगाया है। सभा, जुलूस व भीड़ इक_ा होने पर रोक लगाई गई है। जनसुनवाई स्थल में बिना मास्क के घूमते लोगों ने प्रशासन के सारी व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी। जनसुनवाई में हजारों लोग थे, जहां प्रशासन की व्यवस्था नाकाफी साबित हुई।
प्रदूषण का दुष्परिणाम ग्रामीण भुगतेंगे
ग्रामीण जागेश टण्डन ने बताया कि ग्राम बोरिया में कृषि रकबा 2200 एकड़ है। यहां के किसान बड़े पैमाने पर मुसंबी, पपीता, केला, पेन खजूर और ड्रैगन फ्रूट की खेती करते हैं। प्रदूषण वाले प्लांट की स्थापना से क्षेत्र में कृषि पर दुष्प्रभाव पड़ेगा। आज गांव में हर तरफ हरियाली छाई हुई है, लेकिन प्लांट स्थापना के बाद धुआं और डस्ट दिखाई देगा। सभापति जिला पंचायत राहुल टिकरिहा करीब सप्ताह भर से प्लांट स्थापना के विरोध में ग्रामीणों का समर्थन जुटाने गांव-गांव बैठक ले रहे थे। करीब दर्जन भर गांव मे बैठक लेकर सभापति ने ग्रामीणों को स्पंज आयरन प्लांट के दुष्प्रभावों से अवगत कराया। यहां सभापति ने बताया जनसुनवाई स्थल पहुंचे शत-प्रतिशत ग्रामीण प्लांट स्थापना का विरोध किया, इसलिए जन भावना को ध्यान में रखकर प्रशासन द्वारा प्लांट स्थापना नहीं किए जाने से संबंधित रिपोर्ट शासन को भेजने की अपील की है। जन सुनवाई समाप्त होने के बाद ग्रामीणों ने सभापति के साथ रैली निकाली। जन भावना के विपरीत रिपोर्ट भेजे जाने की स्थिति में आगे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
अवधेश चंदेल ने कहा कि सरकार के किसान विरोधी चेहरा पूरा बेमेतरा जिला के किसान भाइयों के सामने उजागर हो चुका है। सबसे बड़ी बात तमाम प्रकार की रैली सार्वजनिक कार्यक्रम कोरोना महामारी के कारण रद्द किया हुआ है और यहां जनसुनवाई रखा गया है। इससे साफ पता चलता है कि सरकार ये प्रदूषित कारखाना के पक्ष में है। सरकार व स्थानीय विधायक का किसान हितैषी केवल और केवल दिखावा है। हम सब इस क्षेत्र के किसान साथियों के साथ है। जब तक लड़ाई लडऩा पड़े हम लड़ेंगे, हमारी पूरी पार्टी किसानों के साथ है। उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने जिले के हर ब्लाक में फ़ूड पार्क स्थापना के लिए जमीन आरक्षित की गई है। जिस पर 2 साल बाद भी कोई पहल नहीं हुई है। वही मुख्यमंत्री ने शुगर मिल खोले जाने की घोषणा की थी। इन दोनों घोषणा पर अमल के लिए प्रदेश सरकार की ओर से कोई सार्थक कदम नहीं उठाए गए हैं।
फूड प्रोसेसिंग फैक्ट्री लगाने की मांग
इसके विपरीत कृषि प्रधान बेमेतरा जिला को बर्बाद करने प्रदूषण वाले उद्योगों की स्थापना को लेकर शासन-प्रशासन जुटा हुआ है। उन्होंने कहा कि यह बेमेतरा जिला के बेरला ब्लॉक में धान, चना, गेंहू, कोदो, गन्ना, टमाटर, आम, जाम व सभी प्रकार के फल व सब्जी का उत्पादन होता है सरकार अपने वादा के अनुरूप यहां स्पंज आयरन के जगह फूड प्रोसेसिंग कारखाना शक्कर कारखाना लगाने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए। जहां किसान भाई ऐसे कारखाना का स्वागत करेंगे। अंत में कहते हैं सरकार यदि नहीं मानी और प्रदूषित कारखाना लगता है तो किसान के विरोध के लिए तैयार रहे। इस दौरान नपा अध्यक्ष विजय सिन्हा, पिछड़ा वर्ग मोर्चा जिला अध्यक्ष दीपेश साहू, हर्षवर्धन तिवारी विकास तंबोली, बंसी राठी आदि ने विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि राज्य सरकार की गलत नीतियों का खामियाजा क्षेत्र के किसानों को भुगतना पड़ेगा। बेमेतरा जिला में कृषि आधारित उद्योगों की स्थापना का हर नागरिक स्वागत करेगा लेकिन प्रदूषण वाले प्लांटों की स्थापना नहीं होने दी जाएगी।
एसडीएम को ज्ञापन देकर जताया विरोध
किसान नेता योगेश तिवारी की अनुपस्थिति में सिंद्धांत तिवारी के नेतृत्व में उनके सैकड़ों समर्थकों ने प्लांट स्थापना का विरोध दर्ज कराने के साथ बेमेतरा एसडीएम दुर्गेश वर्मा को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के अनुसार बेमेतरा जिला कृषि प्रधान है, इसलिए बेरला बेल्ट में कृषि आधारित उद्योगों की स्थापना की जाए। जिसकी घोषणा प्रदेश सरकार ने की थी। लेकिन प्रदेश सरकार घोषणा के विपरीत जाकर प्रदूषण युक्त प्लांट के स्थापना की तैयारी कर रही रही है। फिलहाल कृषि प्रधान बेमेतरा जिला उद्योगों के प्रदूषण से मुक्त है, वर्तमान में राज्य सरकार से एमओयू किए उद्योगपति द्वारा जिले के गांवों में प्रदूषण वाले उद्योग खोले जाएंगे, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।

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