पढ़े,150 उद्योगपतियों पर सवा दो करोड़ रुपए का संधारण शुल्क बकाया

जिला व्यापार एवं उद्योग विभाग ने जिले के १५० उद्योगपतियों को संधारण शुल्क की वसूली के लिए नोटिस जारी किए हैं। उद्योगपतियों पर २ करोड़ १५ लाख रुपए का संधारण शुल्क बकाया है। जिसे जमा करने के लिए सात दिन का समय दिया गया है।

By: Devendra Karande

Published: 07 Mar 2020, 05:03 AM IST

बैतूल। जिला व्यापार एवं उद्योग विभाग ने जिले के १५० उद्योगपतियों को संधारण शुल्क की वसूली के लिए नोटिस जारी किए हैं। उद्योगपतियों पर २ करोड़ १५ लाख रुपए का संधारण शुल्क बकाया है। जिसे जमा करने के लिए सात दिन का समय दिया गया है। यदि उद्योगपतियों द्वारा शुल्क जमा नहीं किया जाता है तो ऐसी स्थिति में लीज पर आवंटित भूखंड के निरस्तीकरण की कार्रवाई विभाग द्वारा की जा सकती है। इस नोटिस के मिलने के बाद उद्योगपतियों में हड़कंप मच गया है। गुरुवार को औद्योगिक क्षेत्र कोसमी में उद्योगपतियों की बैठक हुई। बैठक में ७ मार्च को भोपाल उद्योग मंत्रालय जाने का निर्णय लिया गया।
तीन साल का संधारण शुल्क बकाया
उद्योग भू-आवंटन एक्ट २०१५ में बनाया गया था। २०१५ में संधारण शुल्क लेने के निर्देश शासन ने जिला व्यापार एवं उद्योग विभाग को दिए थे। १० रुपए प्रति वर्ग मीटर की दर से यह शुल्क उन उद्योगपतियों से वसूल किया जाना था, जिन्हें लीज पर भूमि आवंटित की गई थी। उद्योगपतियों द्वारा संधारण शुल्क की यह राशि आज तक जमा नहीं कराई गई है। जिसके चलते बकाया राशि की वसूली के लिए विभाग द्वारा नोटिस जारी किए गए हैं। जिससे उद्योगपतियों में नोटिस को लेकर हड़कंप मचा हुआ है।
अनुबंध के चलते नहीं दी गई राशि
संधारण शुल्क को लेकर वर्ष २०१८-१९ में शासन एवं जिला उद्योग संघ के बीच एक अनुबंध हुआ था। जिसमें औद्योगिक क्षेत्र में समस्त प्रकार के मेंटेनेंस कार्य उद्योग संघ द्वारा किए जाएंगे। जिस तारीख को शासन एवं जिला उद्योग संघ के बीच यह अनुबंध हुआ था उस तारीख के बाद से जिला उद्योग संघ को संधारण शुल्क लेने का अधिकार होगा लेकिन अनुबंध के पूर्ण होने के तीन वर्ष पूर्व की राशि उद्योग विभाग को जमा करना होगी। उद्योगपतियों द्वारा यह राशि आज तक जमा नहीं कराई गई है। जबकि संधारण शुल्क की दरें काफी कम है।
सवा दो करोड़ रुपए है वसूलना
जिला व्यापार एवं उद्योग विभाग को जिले भर के १५० उद्योगपतियों से २ करोड़ १५ लाख रुपए वसूल किया जाना है। विभाग की माने तो अभी तक ३० लाख रुपए वसूला जा चुका हैं शेष एक करोड़ ८५ लाख रुपए वसूलना बाकी रह गया है। जिसके लिए विभाग द्वारा उद्योगपतियों को नोटिस जारी किए गए थे। नोटिस मिलने के बाद उद्योगपतियों की एक बैठक गुरुवार को औद्योगिक केंद्र कोसमी में आयोजित की गई थी। जिसमें सभी उद्योगपति शामिल हुए थे। बैठक में संधारण शुल्क को लेकर चर्चा की गई। सभी ने एक मत से इस संदर्भ में ७ मार्च को भोपाल जाकर उद्योग मंत्रालय में बात करने की बात कही।
लीज निरस्तीकरण की चेतावनी
जिला व्यापार एवं उद्योग विभाग ने उद्योगपतियों को संधारण शुल्क की राशि जमा नहीं करने पर उद्योग के लिए उद्योग के लिए लीज पर आवंटित भूखंड निरस्तीकरण की कार्रवाई किए जाने की चेतावनी दी है। नोटिस जारी होने के सात दिन के भीतर संधारण शुल्क जमा करने के लिए उद्योगपतियों को निर्देशित किया गया है। उल्लेखनीय हो कि प्रदेश सरकार की माली हालत खस्ताहाल है ऐसे में सरकारी खजाना भरने के लिए सरकार द्वारा राजस्व वसूली को लेकर सख्ती बरती जा रही है। समस्त विभागों को वसूली के लिए लगातार निर्देशित किया जा रहा है। यही कारण है कि सालों पुरानी इस वसूली को लेकर अब जाकर विभाग द्वारा नोटिस जारी किए गए हैं।
क्या है संधारण शुल्क
औद्योगिक क्षेत्र में बिजली, साफ-सफाई, पानी निकासी आदि व्यवस्थाओं के लिए जिला व्यापार एवं उद्योग संघ संधारण शुल्क वसूल करता है। यह शुल्क २००८ से २०१५ तक प्रीमियम का सिर्फ एक प्रतिशत भर लगता था लेकिन वर्ष २०१५ में शासन ने पुराने नियमों को निरस्त करते हुए उद्योग भू-आवंटन एक्ट लागू कर दिया। जिसमें संधारण शुल्क की राशि १० रुपए प्रति वर्ग मीटर निर्धारित कर दी गई। उद्योगपतियों का कहना है कि जो तीन साल का संधारण शुल्क दिया जाना है विभाग द्वारा उस पर भी १० प्रतिशत की दर से वार्षिक ब्याज वसूल किया जा रहा है। जिससे उद्योगपतियों ने जितने की जमीन नहीं खरीदी उससे अधिक जुर्माने में राशि भरना पड़ेगी। जिसका विरोध किया जा रहा है।

Devendra Karande Reporting
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