त्रिकटु चूर्ण काढ़ा के 50 ग्राम के पैकेट में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की फोटो छापी

इम्यूनिटी बढ़ाने वाली सरकारी आयुर्वेद दवा में भी प्रचार का आरोप

By: yashwant janoriya

Published: 31 Jul 2020, 11:29 AM IST

बैतूल. कोरोना संक्रमण काल में लोगों की इम्यूनिटी पॉवर को बढ़ाए जाने के लिए आयुर्वेद चिकित्सा विभाग की ओर से त्रिकटु चूर्ण काढ़ा अस्पताल से लोगों को दिया जा रहा है लेकिन नई पैकिंग में जो त्रिकटु चूर्ण का काढ़ा आया है, उसमें राजनीतिक प्रचार-प्रसार भी नजर आ रहा है। 50 ग्राम वजनी नई पैकिंग वाले इन त्रिकटु चूर्ण के पैकेटों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की फोटो भी चस्पा की गई है। जबकि पूर्व में विभाग द्वारा जो त्रिकटु चूर्ण लोगों को वितरित किया था वह सादी पन्नियों में दिया था। सादी पन्नियों में पैक कर देने वाले चूर्ण के लिए अलग से स्टीकर भी भेजे थे, जिन्हें विभाग ने लगाया नहीं।
आयुर्वेदिक अस्पतालों से बांटे जा रहे पैकेट

आयुर्वेदिक की यह पहली ऐसी दवा है जिसके पैकेट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की फोटो भी चस्पा की गई है। पैकेट आयुष विभाग मध्यप्रदेश जीवन अमृत योजना लिखा गया है। साथ ही इसे आयुर्वेद मेडिसिन बताया गया है। इसके सेवन और इस्तेमाल चिकित्सक के परामर्शनुसार किए जाने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। साथ ही बताया गया कि यह मेडिसिन सर्दी, जुकाम, श्वांस, खांसी व बुखार रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए इस्तेमाल की जाती है।
अलग से स्टीकर भी भेजे

त्रिकटु चूर्ण काड़ा की मेन्यूफैक्चरिंग डेट मई २०२० की है। जबकि आयुर्वेद चिकित्सा विभाग के पास जो पुरानी डेट का चूर्ण मौजूद था, वह अलग पैकिंग में था। मात्रा भी ५०० ग्राम थी। इस से विभाग सादी पन्नियों में भरकर चूर्ण मरीजों को देता था। इसे देखते हुए डायरेक्टेड भोपाल से नई मेन्यूफैक्चरिंग प्रिंट के अलग से स्टीकर बनाकर भेजे गए हैं। यह स्टीकर सादी पन्नियों में दिए जाने वाली दवाओं में लगाए जाने के लिए दिए गए हैं। हालांकि इन स्टीकरों का विभाग ने अभी उपयोग नहीं किया है। स्टीकर विभाग में ही पड़े हैं।
पहले 500 ग्राम के सादे पैकेट आते थे
आयुर्वेद में त्रिकटु चूर्ण यानी काढ़ा का इस्तेमाल मानव शरीर में इम्यूनिटी सिस्टम को बढ़ाए जाने के लिए दिया जाता है। पूर्व में भोपाल डायरेक्टेड से पहले ५०० ग्राम के पैकेट में चूर्ण आता था। इसमें से मरीजों की खुराक के अनुसार अलग-अलग सादी पन्नियों में भरकर चूर्ण दे दिया जाता था लेकिन कोरोना संक्रमण काल शुरू होने के बाद अब ५० ग्राम की नई पैकिंग के साथ चूर्ण भेजा जाने लगा है। इस चूर्ण के हजारों पैकेट बैतूल भेजे थे, जो अब खत्म हो चुके हैं।
33 प्रकार की आयुर्वेद दवा का स्टॉक खत्म
को रोना संक्रमण काल के चलते आयुष विभाग में 33 प्रकार की आयुर्वेदिक दवाओं का स्टॉक खत्म हो चुका हैं। आयुष विभाग ने भोपाल डायरेक्टेड को दवाएं भेजे जाने के लिए पत्र भी लिखा है। दवाओं के खत्म होने से आयुष विभाग द्वारा लोगों के इम्यूनिटी सिस्टम को बढ़ाए जाने के लिए डोर-टू-डोर जो दवा वितरण का काम किया जा रहा था वह भी पिछले पंद्रह-बीस दिनों से बंद है। ग्रामीण क्षेत्रों की आयुर्वेदिक डिस्पेंसरियों में भी दवाओं का टोटा पड़ गया है। बताया गया कि आयुर्वेद दवा के १३ प्रकार के सायरप भी खत्म हो चुके हैं इसके अलावा अश्वगंधा चूर्ण, अर्जुन छाल, दाडी मास्टक, हरिद्राखंड, वैश्वनर चूर्ण, गंधक रसायन, कफात्तक रस आदि प्रकार की दवाईयां भी मौजूद नहीं है। त्रिकटु चूर्ण काड़ा भी खत्म हो चुका हैं जिसके कारण भी घर-घर दवा बांटने के अभियान को बंद करना पड़ा है। विभाग का कहना है कि दवा की सप्लाई के लिए भोपाल डायरेक्टेड को सूची भेज दी गई है। कुछ दिनों में दवाओं की सप्लाई हो जाएगी।
इनका कहना है
त्रिकटु चूर्ण सहित सभी प्रकार की आयुर्वेदिक दवाएं भोपाल डायरेक्टेड से आती हैं। पहले 500 ग्राम के पैकेट में त्रिकटु चूर्ण आता था, लेकिन अब नई पैकिंग में चूर्ण भेजा गया है। अलग से स्टीकर लगाने के लिए भेजे गए थे लेकिन हमनें नहीं लगाए। चूर्ण सहित अन्य दवाइयां भी खत्म हो चुकी हैं।
- डॉ. एआर बर्डे, आयुष चिकित्सा अधिकारी बैतूल

इस कोरोना जैसी महामारी में भी दवाई के पैकेट पर भाजपा अपना प्रचार-प्रसार कर रही है। जनता से पेट्रेाल और डीजल के दाम बढ़ाकर पैसे लिए जा रहे हैं। इसी की दवाई बांटी जा रही है। इस पर भी फोटो लगा रहे हैं यह दुर्भाग्यपूर्ण है। लोगों की जान बचाने में भी श्रेय ले रहे हैं। यह श्रेय लेने का समय नहीं है लोगों की जान बचाने का समय है।
- निलय डागा, विधायक बैतूल

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