भोजपुरी एकता मंच ने किया छठ घाट का निरीक्षण, देखी व्यवस्था

भोजपुरी एकता मंच ने किया छठ घाट का निरीक्षण, देखी व्यवस्था

Sandeep Nayak | Publish: Nov, 11 2018 08:00:00 AM (IST) Hoshangabad, Madhya Pradesh, India

13 नवंबर को डूबते सूर्य और 14 नवंबर को उगते सूर्य को अघ्र्य देकर उत्तर भारतीय परिवार पूरी आस्था के साथ छठ पूजा करेंगे

सारनी. हर साल की तरह इस साल भी आस्था और विश्वास के महापर्व छठ की तैयारी सतपुड़ा जलाशय किनारे जोरशोर से चल रही है। 13 नवंबर को डूबते सूर्य और 14 नवंबर को उगते सूर्य को अघ्र्य देकर उत्तर भारतीय परिवार पूरी आस्था के साथ छठ पूजा करेंगे। भोजपुरी एकता मंच के जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह ने बताया इस वर्ष भी रंगारंग अतिशबाजी और भोजपुरी देवी जागरण की प्रस्तुति 13 की शाम और 14 नवंबर की सुबह कलाकारों द्वारा दी जाएगी। शनिवार को भाजपुरी एकता मंच के समस्त पदाधिकारियों ने छठघाट पर पहुंचकर निरीक्षण किया। इस मौके पर अवधेश सिंह, प्रमोद सिंह, लक्ष्मण सेठ, जीपी सिंह, सुनील सिंह, विनय मालवीय, प्रीतम साहू, हलचल गुप्ता, भीमबहादुर थापा, मिंटू राय, अरूण सिंह, संजय प्रजापति, कालिकाराम, सुभाष चौरसिया, दिलीप झोड़, मनोज ठाकुर समेत अन्य लोग उपस्थित थे

नहीं आ रही गीतांजलि मौर्य -
बनारस की मशहूर गीत गायिका गीतांजलि मौर्य भोजपुरी एकता मंच द्वारा आयोजित छठ पर्व में प्रस्तुति देने सारनी आ रही थी। लेकिन आचार संहिता लगे होने से अलसुबह प्रस्तुति नहीं दी जा सकती। इस वजह से गीतांजलि मौर्य का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया है। यह जानकारी रंजीत सिंह द्वारा दी गई है। उन्होंने बताया हर साल की तरह इस वर्ष भी जबलपुर की झांकी और परासिया के देवी जागरण ग्रुप द्वारा छठपूजा स्थल पर भोजपुरी गीतों की प्रस्तुति दी जाएगी

नपा ने कराई सफाई
सतपुड़ा जलाशय में इन दिनों खरपतवार तेजी से फैल रही है। सामूहिक प्रबंधन से खरपतवार नष्ट करने का आह्वान लगातार किया जा रहा है। बावजूद इसके कोई भी आगे नहीं आ रहे हैं। यही वजह है कि जलीय खरपतवार पूरे जलाशय की सतह पर तेजी से कब्जा जमा रहे हैं। 5 नवंबर को बरसात और तेज हवा चलने पर जलकुंभी और चाइनिज झालर पूरी तरह किनारे पर आ पहुंची थी। इसे सामूहिक प्रबंधन से आसानी से नष्ट किया जा सकता था। लेकिन नगरपालिका, सतपुड़ा पॉवर हाउस प्रबंधन और भोजपुरी एकता मंच ने रुचि नहीं दिखाई। इसका असर यह हुआ कि महज चार दिनों में एक बार फिर जलाशय जलीय खरपतवार से पुन: पट गया। शनिवार को नपा के दर्जन भर से अधिक कर्मचारियों ने नाव की मदद से छठ घाट के पूजन स्थल की सफाई कर दर्जनों ट्रैक्टर ट्राली खरपतवार निकाली गई।

सात गुना तेजी से होता है वाष्पीकरण
बीते दिनों सतपुड़ा जलाशय का निरीक्षण करने खरपतवार अनुसंधान निदेशालय जबलपुर से आए वैज्ञानिक डॉ. सुशील कुमार और डॉ. वीके चौधरी ने बताया कि जलकुंभी जलाशय के लिए ठीक नहीं है। यह पानी का सात गुना तेजी से वाष्पीकरण करती है। इसे समुद्र सोख भी कहते हैं। इसे नष्ट करना बहुत जरूरी है। यह विदेशी खरपतवार है। समय रहते इसकी रोकथाम के लिए उपाय नहीं किए गए तो पूरे जलाशय पर कब्जा कर लेगी। वैज्ञानिकों द्वारा इस जलीय खरपतवार को जैविक खाद के लिए उपयुक्त बताया गया था।

 

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