बच्चे ने निगला सिक्का गले में फंसा, एनेस्थीसिया नहीं होने से भोपाल रैफर

खेल-खेल में एक बच्चे द्वारा सिक्का निगल लिए जाने से उसके गले में फंस गया। बच्चे की हालत बिगडऩे पर परिजन उसे गुरुवार रात को इलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर आए, ताकि सिक्का किसी तरह से निकल जाए। बच्चे को लेकर माता-पिता अस्पताल के चक्कर काटते रहे। काफी देर बाद डॉक्टर ने बच्चे को देखा और उसका एक्सरे कराया। पता चला कि ऑपरेशन करके ही सिक्के को निकाला जा सकता है।

By: Devendra Karande

Published: 01 Aug 2020, 04:04 AM IST

बैतूल। खेल-खेल में एक बच्चे द्वारा सिक्का निगल लिए जाने से उसके गले में फंस गया। बच्चे की हालत बिगडऩे पर परिजन उसे गुरुवार रात को इलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर आए, ताकि सिक्का किसी तरह से निकल जाए। बच्चे को लेकर माता-पिता अस्पताल के चक्कर काटते रहे। काफी देर बाद डॉक्टर ने बच्चे को देखा और उसका एक्सरे कराया। पता चला कि ऑपरेशन करके ही सिक्के को निकाला जा सकता है। चूंकि जिला अस्पताल में ऑपरेशन नहीं हो सकता था इसलिए डॉक्टर ने बच्चे को भोपाल रैफर कर दिया। बताया गया कि घोड़ाडोंगरी के महेंद्रवाड़ी निवासी सोहन उईके अपने तीन वर्षीय बालक को लेकर गुरुवार रात साढ़े आठ बजे जिला अस्पताल पहुंचा था। बच्चे ने खेल-खेल में सिक्का निगल लिया था जो उसके गले में फंस गया था। चूंकि बच्चे के माता-पिता मजदूरी जानकारी नहीं होने के कारण वे देर रात तक अस्पताल के चक्कर लगाते हैं, लेकिन उन्हें कोई डॉक्टर नहीं मिला। इधर गले में सिक्का फं से होने के कारण दर्द के मारे बच्चा तड़प रहा था और उसे बार-बार उल्टियां हो रही थी। बच्चे की हालत खराब हो रही थी। कुछ देर बाद डॉक्टर ने बच्चे को देखा और उसका एक्सरे कराया। जिसमें सिक्का बच्चे के गले में दिखाई दिया। मामले में जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ अशोक बारंगा ने बताया कि बच्चे को डॉक्टर द्वारा देखे जाने के बाद उसका एक्सरे कराया गया। सिक्का बच्चे के गले में फंसा हुआ है, जो ऑपरेशन करने के बाद ही निकाला जा सकता है। चूंकि बच्चा छोटा है ऑपरेशन के लिए जनरल एनेस्थीसिया देना होता है। अस्पताल में एनेस्थीसिया एक्सपर्ट नहीं है इसलिए बच्चे को माता-पिता के साथ भोपाल रैफर किया गया है।

Devendra Karande Reporting
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