महंगा कोयला बना मुसीबत, 9 पैसे प्रति यूनिट तक बढ़ी लागत

मप्र शासन के सभी बिजली घर कोयले की समस्या से जूझ रहे हैं, प्रमुख प्लांटों में दो से तीन दिनों का ही कोल स्टॉक है

By: rakesh malviya

Updated: 15 Nov 2018, 02:42 PM IST

सारनी. मप्र में बिजली की मांग के रोज नए रिकार्ड बन रहे हैं। बुधवार को सर्वाधिक डिमांड 12 हजार 936 मेगावाट रही। आने वाले दिनों में मांग 14 हजार मेगावाट तक पहुंचने का अनुमान है। जिसे पूरा करने में सभी बिजली कंपनियों के बीच आपसी समन्वय आवश्यक होगा। फिलहाल मप्र शासन के सभी बिजली घर कोयले की समस्या से जूझ रहे हैं। प्रमुख प्लांटों में दो से तीन दिनों का ही कोल स्टॉक है। वह भी तब जब विद्युत इकाइयों को क्षमतानुरूप नहीं चलाया जा रहा या फिर इकाई बंद रखी जा रही है। इसी से अंदाजा लगा सकते हैं कि सरकारी बिजली घरों में कोयला संकट किस कदर गहरा गया है। सर्वाधिक डिमांड के समय को छोडक़र चारों थर्मल पॉवर प्लांटों की इकाइयों को क्षमता से कम लोड पर चला रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य कोयले की कमी से निपटना है। श्रीसिंगाजी, सतपुड़ा, बिरसिंहपुर और अमरकंटक पॉवर प्लांट में कुल स्टॉक 2 लाख 87 हजार मीट्रिक टन है। इसमें सबसे कम कोल स्टॉक सतपुड़ा पॉवर प्लांट सारनी के पास है। यहां ग्राउंड स्टॉक महज 27 हजार मीट्रिक टन के करीब है। खासबात यह है कि सतपुड़ा को बीते माह से एसईसीएल का कोयला ज्यादा आपूर्ति हो रहा है। इसका असर विद्युत उत्पादन लागत पर पड़ रहा है। दरअसल एसईसीएल का कोयला परिवहन भाड़ा बढऩे से महंगा साबित हो रहा है। यही वजह है कि विद्युत उत्पादन लागत में 7 से 9 पैसे प्रति यूनिट तक बढ़ोत्तरी हुई है।

सतपुड़ा को छोडक़र सभी की स्थिति सुधरी -
पॉवर मैनेजमेंट कंपनी द्वारा जारी एमओडी (मैरिड आर्डर डिस्पैच) में सतपुड़ा को छोडक़र सभी प्लांटों की उत्पादन लागत में सुधार आया है। इसकी वजह वेकोलि का कोयला श्रीसिंगाजी थर्मल पॉवर प्लांट को आपूर्ति होना है। वहीं सतपुड़ा को एसईसीएल से रेलवे रैकों के जरिए प्राप्त होने वाला कोयला काफी महंगा है। जिसका असर प्रति यूनिट विद्युत उत्पादन लागत पर पड़ रहा है। मप्र पॉवर जनरेटिंग कंपनी के जानकार बताते हैं कि गवर्नमेंट ऑफ इंडिया की पॉलिसी के तहत नजदीकी खदान क्षेत्रों के प्लांटों को प्राथमिकता के आधार पर कोयला आपूर्ति करना है। यही वजह है कि एसईसीएल का कोयला सतपुड़ा को मिल रहा है और डब्ल्यूसीएल का कोयला खंडवा पहुंच रहा है। इस गलत नीति के चलते प्रदर्शन पर असर पडऩे के अलावा सतपुड़ा की मुश्किलें भी बढ़ गई है।

खबर पर नजर
पत्रिका ने 10 नवंबर के अंक में ही बता दिया था कि अक्टूबर माह की एमओडी में सतपुड़ा पॉवर प्लांट से बिजली उत्पादन 7 से 10 पैसे प्रति यूनिट तक महंगा होगा। मंगलवार को जारी हुई एमओडी में पुरानी इकाइयां 6, 7, 8 और 9 नंबर से विद्युत उत्पादन प्रति यूनिट 9 पैसे तक महंगा हो गया है। वहीं नई इकाई की उत्पादन लागत 7 पैसे प्रति यूनिट महंगी हुई है। सितंबर माह की एमओडी में पुरानी इकाइयों की उत्पादन लागत 2.59 पैसे थी जो बढक़र 2.68 पैसे तक जा पहुंची है। वहीं नई इकाई की लागत 2.14 से 2.21 पैसे प्रति यूनिट हो गई है।

एक नजर में पॉवर प्लांट -
प्लांट - उत्पादन - कोल स्टॉक
सतपुड़ा - 1018 - 37,000
अमरकंटक - 216 - 56,000
श्रीसिंगाजी - 1753 - 1,33,000
बिरसिंहपुर - 1004 - 61,000
(नोट :- विद्युत उत्पादन मेगावाट और कोल स्टॉक मीट्रिक टन में हैं।)
मप्र में कहां कितनी डिमांड -
पश्चिमी मप्र - 5240
पूर्वी मप्र - 3430
मध्यक्षेत्र - 4004
रेलवे - 243
(नोट :- डिमांड मेगावाट में हैं।)
एमओडी पर एक नजर -
प्लांट - पहले - अब
सतपुड़ा - 2.59 - 2.68
सतपुड़ा (500) - 2.14 - 2.21
श्रीसिंगाजी - 2.67 - 2.63
बिरसिंहपुर - 2.21 - 2.21
बिरसिंहपुर(500) - 2.07 - 2.06
अमरकंटक - 2.52 - 2.51
(नोट :- मप्र पॉवर मैनेजमेंट कंपनी द्वारा जारी एमओडी में इस तरह बदली विद्युत उत्पादन की दरें। सर्वाधिक 9 पैसे प्रति यूनिट सतपुड़ा की उत्पादन लागत बढ़ी है। प्रति यूनिट उत्पादन रुपए में हैं।)

इनका कहना -
डिमांड लगातार बढ़ रही है। एमओडी में सतपुड़ा से विद्युत उत्पादन महंगा हुआ है। कोल स्टॉक 37 हजार मीट्रिक टन के आसपास है। विदेशी कोयला 15 नवंबर के बाद सतपुड़ा को मिलेगा।

अमित बंसोड़, पीआरओ, सतपुड़ा, सारनी।

rakesh malviya Desk
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