विलुप्त हो रही आदिवासी संस्कृति और भाषा पर हो रहा शोध

जनजातीय संस्कृति पर प्रकाशित होगी पुस्तक

By: pradeep sahu

Updated: 25 Apr 2018, 08:36 PM IST

बैतूल. विलुप्त हो रही आदिवासी बोली और संस्कृति पर सरकार द्वारा शोध किया जा रहा है। शोध के बाद इन संस्कृति और भाषा को बढ़ावा देने नए सिरे से कार्ययोजना बनाई जाएगी। आदिवासियों पर शोध के लिए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्व विद्यालय अमरकंटक से आए दल ने जिले में आदिवासियों पर शोध कर इसकी रिपोर्ट तैयार की है। शोध के दौरान दल जिले के लगभग आधा दर्जन गांवों में पहुंचा।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्व विद्यालय अमरकंटक मप्र से आए अधिकारियों के दल ने बैतूल में आदिवासियों पर शोध किया। दल में सहायक प्रो.डॉ.धीरेन्द्र प्रताप भाषा विज्ञानी, डॉ.सौरभ मिश्रा, डॉ.विनय तिवारी, शोध सहायक हेमंत राय भाषा विज्ञानी, कार्य सहायक भरत आरमो शामिल रहे। दल में शामिल में डॉ मिश्रा ने बताया कि लुप्त हो रही प्रमुख गोंड जनजातियों की बोली भाषा, संस्कृति, औषधी, दवाइयां, गीत-संगीत, नृत्य से संबंधित शोध कार्य किया। शोध के दौरान चिचोली ब्लॉक के ग्राम दूधिया, असाढ़ी, गोधना घोड़ाडोंगरी ब्लॉक के ग्राम कान्हावाड़ी, बैतूल ब्लॉक में ग्राम खेड़ला सहित अन्य गांवों में पहुंचे। आदिवासी परिवारों से बोली, भाषा सहित परिवार से संबंधित जानकारी ली गई।

कवड़े ने बताया कि आने वाली पीढिय़ा गोंड जनजाति की संस्कृतियों एवं समाज से परिचित हो सके इसलिए शोध कार्य के अंतर्गत गोंडी बोली भाषा एवं उनकी संस्कृति से संबंधित पुस्तकें प्रकाशित की जाएगी। वहीं बच्चों के पाठ्यक्रमों में भी इन सभी पुस्तकों को जोडऩा संभावित होगा। दल द्वारा पूरे प्रदेश में घूम-घूमकर यह शोध कार्य किया जा रहा है। आने वाले समय पर इस पर अमरकंटक में एक कार्यशाला भी होगी,जिसमें आदिवासी समाज के लोगों को शामिल किया जाएगा। कवड़े ने बताया कि पूर्व में छह राज्यों की गोंडवाना शब्द कोष पुस्तक का विमोचन भी कर्नाटक में किया है।
चिखलमांदी को किया शूट - दल के सदस्यों ने ग्राम गोधना में आदिवासियों की शादी में होने वाली चिखलामांदी परंपरा को भी शूट किया। भ्रमण के दौरान लोक कलाकार बसंत कवड़े, सुखनंदन अहाके, शंभू कवड़े, बालकिसन उइके, जितेश कवड़े ने दल का सहयोग किया। दल जनजातियों की 10 बोली गोंडी, बेगा, साहरिया आदि भाषा पर कार्य कर रहा है। शोध कार्य पूर्ण कर दल छिंदवाड़ा के लिए रवाना हुए हैं।

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