बाढ़ से माचना का पानी हुआ लाल, फिल्टरेशन में आ रही दिक्कत

माचना नदी में आई बाढ़ ने नदी के पानी को लाल कर दिया है। नदी की अंदरूनी सतह में पानी लाल और मटमैला होने से फिल्टरेशन की प्रक्रिया में भी दिक्कतें आ रही है। नदी के पानी को चार चरणों में फिल्टर करने के बाद भी पानी का पीलापन नहीं जा रहा है। गुरुवार को जिन वार्डों में फिल्टर प्लांट से पानी की सप्लाई की गई। वहां पानी में पीला और भारीपन आने की शिकायतेंं भी सामने आई।

By: Devendra Karande

Published: 26 Jun 2020, 04:03 AM IST

बैतूल। माचना नदी में आई बाढ़ ने नदी के पानी को लाल कर दिया है। नदी की अंदरूनी सतह में पानी लाल और मटमैला होने से फिल्टरेशन की प्रक्रिया में भी दिक्कतें आ रही है। नदी के पानी को चार चरणों में फिल्टर करने के बाद भी पानी का पीलापन नहीं जा रहा है। गुरुवार को जिन वार्डों में फिल्टर प्लांट से पानी की सप्लाई की गई। वहां पानी में पीला और भारीपन आने की शिकायतेंं भी सामने आई। इसी समस्या के चलते ताप्ती से होने पानी की सप्लाई को भी कुछ दिनों के लिए बंद कर दिया गया है। यही स्थिति २२ गांवों की दनोरा समूह जलजल योजना में सामने आ रही है जिससे कारण उसे भी बंद करना पड़ा है। नपा की माने तो बाढ़ की वजह से माचना का पानी लाल हो गया है। पानी के साथ गाद भी आ रही है। जिसके कारण फिल्टरेशन की प्रक्रिया पर भी असर पड़ा है। पानी को साफ करने के लिए एलम, चूना और ब्लीचिंग पाउडर की मात्रा को बढ़ा दिया गया है।
माचना डैम १४ फीट तक भरा
बारिश के चलते माचना डैम १४ फीट तक भर गया है लेकिन अभी नगरपालिका ने गेट नहीं खोले हैं। नदी में पानी गेट की ऊंचाई तक पहुंच गया है। नदी की ऊपरी सतह पर तो पानी का रंग साफ नजर आ रहा है लेकिन नदी के अंदर जहां पानी खींचने के लिए पंप लगे हैं वहां गाद होने की वजह से पानी काफी मटमैल आ रहा है। पंप हाउस में लगी ३४० हार्स पॉवर की दो मोटरों से पानी खींचकर फिल्टर प्लांट तक भेजा जा रहा है। नपा की माने तो आमला तरफ तेज बारिश होने के कारण नदी में बाढ़ आई गई थी। बाढ़ में मुरम का पानी भी बहकर आया है जो काफी लाल रंग का है। पानी का रंग सुर्ख लाल होने के कारण ही इसके फिल्टरेशन प्रक्रिया में दिक्कतें आ रही है।
एलम, चूने और ब्लीचिंग की मात्रा बढ़ाई गई
फिल्टर प्लांट में नदी के पानी को साफ करने के लिए एलम, चूने और ब्लीचिंग पाउडर का इस्तेमाल किया जाता है। एक दिन में करीब १५ से १८ सिल्ली एलम का इस्तेमाल किया जाता था। एक सिल्ली का वजन करीब १९ किलो तक है। इस प्रकार करीब ३५० किलो एलम रोजाना डाला जाता था, लेकिन पानी मटमैला आने से अब इसकी मात्रा बढ़ाकर २३ सिल्ली तक कर दी गई है। यानि ४४० किलो तक एलम इस्तेमाल की जा रही है। इसी प्रकार ३० किलो चूने की एक बोरी का इस्तेमाल एक दिन में किया जाता था लेकिन अब इसकी मात्रा बढ़ाकर ४० किलो कर दी गई है। वहीं ब्लीचिंग पाउडर दो बोरी यानि ५० किलो किया जाता था लेकिन इसकी मात्रा भी बढ़ाकर चार बोरी यानि १०० किलो तक कर दी गई है। रोजाना इतनी मात्रा में ही कैमिकलों का इस्तेमाल पानी शुद्धिकरण के लिए किया जा रहा है।
वार्डों में हुई पीले पानी की सप्लाई
नगरपालिका द्वारा गुरुवार को फिल्टर प्लांट से जो पानी की सप्लाई की गई उसमें काफी पीला और भारीपन था। हालांकि पानी को फिल्टर कर सप्लाई किया गया था लेकिन जैसा पानी नदी में मौजूद हैं उससे पानी का पीलापन निकल पानी मुश्किल है। हालांकि नगरपालिका के कर्मचारियों का कहना था कि नदी में गाद की वजह से पानी काफी मटमैला हो चुका हैं जिससे ठीक तरह से साफ होने में थोड़ा समय लगेगा। चूंकि फिल्टरेशन की प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है इसलिए पानी धीरे-धीरे साफ हो रहा है। नदी के पानी को साफ करने के लिए प्लांट में कैरी फ्लाकुलेटर लगा है लेकिन गाद की वजह से इसके चलने की प्रक्रिया भी धीमी हो गई है। पानी को ठीक तरह से सेट होने में काफी समय लग रहा है।
रोजाना ८० लाख लीटर पानी की सप्लाई
फिल्टर प्लांट से रोजाना ८०लाख लीटर पानी की सप्लाई शहर की ओवर हैड टंकियों में की जाती है। जहां से पानी पाइप लाइनों के जरिए लोगों के घरों तक सप्लाई किया जाता है। बताया गया कि बैतूल शहर में करीब दस हजार से अधिक नल कनेक्शन लगे हुए हैं और एक दिन के अंतराल से पानी शहर के वार्डों में सप्लाई किया जाता है। इस समय ताप्ती नदी से पानी की सप्लाई को बंद कर दिया गया है क्योंकि ताप्ती का पानी माचना से भी गंदा आ रहा है। जिसे फिल्टर करने में काफी समय लग रहा है और दिक्कतें भी आ रही है। ताप्ती में पानी के साथ मिट्टी और कंकड़ सहित गाद भी आ रही है जिससे पानी का कलर काफी लाल सुर्ख है।

Devendra Karande Reporting
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