मध्यप्रदेश में मिला दुर्लभ प्रजाति का भारतीय पैंगोलिन

betul news- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में दुर्लभ प्रजाति का पैंगोलिन मिला है। बताया जाता है कि यह भारतीय पैंगोलिन है जो उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों में पाया जाता है। यह पैंगोलिन पुलिस कर्मियों को गश्त के दौरान मिला था।


आमला ( बैतूल )। मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में दुर्लभ प्रजाति का पैंगोलिन मिला है। बताया जाता है कि यह भारतीय पैंगोलिन है जो उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों में पाया जाता है। यह पैंगोलिन पुलिस कर्मियों को गश्त के दौरान मिला था। इसके बाद वन विभाग ने मेडिकल टेस्ट कराने के बाद उसे दोबारा से जंगल में छोड़ दिया है।

वन परिक्षेत्र अधिकारी एमके पनेचा के मुताबिक वन परिक्षेत्र अधिकारी महेंद्र प्लेचा के अनुसार डायल 100 ने वन विभाग को पेंगोलिन सुरक्षित सौंपा है। पेंगोलिन की उम्र लगभग एक साल की है। पेंगोलिन को जंगल में छोड़ दिया गया है।

मिनोचा के मुताबिक इसे संरक्षित वन्य अनूसूचि में नंबर-1 पर रखा गया है। भारतीय पैंगोलिन का चिकित्सीय परीक्षण कराने के बाद उसे जंगल में छोड़ दिया गया। बताया जा रहा है कि यह जीव बेशकीमती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करोड़ों रुपए बतायी जाती है। दरअसल, उत्तेजक और शक्तिवर्धक दवाएं बनाने में इसका उपयोग होने के कारण इसकी मांग विदेशों में अधिक है। इसके कारण यह शिकारियों के निशाने पर अक्सर रहता है।

उत्तर भारत में पाया जाता है पेंगोलिन
पेंगोलिन उत्तर भार में ज्यादातर पाया जाता है। शिमला, श्रीनगर, ओलमोरा, मंसूरी, कसौला, पहाड़ी वाले क्षेत्र में अधिकतर पाया जाता है। असाध्य बीमारी की दवाई के लिए इस पर तस्करों की नजर रहती है और तो और नेशनल स्तर पर पेंगोलिन की तस्करी भी होती है। बताया जाता है कि अंधविश्वास के कारण जादू टोना करने वाले लोग भी इसका इस्तेमाल करते हैं। बताया जा रहा है कि आमला से पहले पेंगोलिन धार जिले में पाया गया था। भारतीय पैंगोलिन की यह प्रजाति काफी कम देखने को मिलती है। इसकी तेज फुफ्कार से जहां लोग डर जाते हैं, वहीं अपने आप को सुरक्षित करने के लिए पैंगोलिन अपने शरीर को सिकोड़कर गेंद की आकृति का बना लेता है। इसका वजन 9 से 10 किलो तक होता है जबकि लंबाई करीब 59 सेमी होती है।

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