ड्राइवर, कंडक्टर और क्लीनर पर आजीविका का संकट

बसों के पहिए थमे, डेढ़ हजार से ज्यादा प्रभावित

By: yashwant janoriya

Published: 26 Jun 2020, 11:48 AM IST

मुलताई. जिंदगी को रफ्तार देने वाली और चलती का नाम गाड़ी कहलाने वाली बसों के पहिए तीन माह से थमे हुए हैं। बसों के पहिए थमने से पूरा मुलताई क्षेत्र जहां प्रभावित हुआ है वहीं इससे जुड़े अन्य व्यवसाय और लगभग डेढ़ हजार कर्मचारी व एजेंट भी रोजी रोटी के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं, बावजूद अभी तक बसें कब चल पाएंगी यह तय नहीं हो पा रहा है। मुलताई क्षेत्र में लगभग 80 से अधिक बसों का संचालन किया जाता है। इससे ड्राइवर, कंडक्टर एवं क्लीनर सहित बस एजेंटों की आजीविका जुड़ी हुई है। फिलहाल 3 माह से अधिक समय से बस व्यवसाय से जुड़े लोग खाली बैठे हैं तो कुछ लोग छुट-पुट व्यवसाय करके परिवार का पेट भरने को मजबूर हैं। इधर, बस संचालक भी परेशान हो रहे हंै, क्योंकि यदि बसें प्रारंभ भी होती हैं तो इसे लाइन पर आने के लिए लंबा समय लगेगा। साथ ही इससे जुड़े लोगों को फिर से एकजुट करना होगा, क्योंकि बस चालक, कंडक्टर व क्लीनर सहित बस एजेंट ही इस व्यवसाय की धुरी हैं, जिससे पूरा व्यवसाय संचालित होता है। वर्तमान में शासन व बस संचालकों के बीच टैक्स को लेकर चल रहे विवाद के कारण जहां लोगों को सीधे सरल आवागमन का लाभ नहीं मिल रहा है।
बस चालू नहीं होने से ग्रामीणों को परेशानी : बस बंद होने से इसका सीधा असर ग्रामीणों को पड़ा है। सस्ते सुलभ किराए में वे नगर में आ जाते थे और व्यवसाय भी कर लेते थे, लेकिन अब उन्हें निजी साधनों से आना पड़ रहा है। साथ ही भारी किराया भी दे रहे है। सब्जी व्यवसाय सहित ऐसे कितने ही छोटे व्यवसाय थे जिससे ग्रामीणों की रोजी-रोटी चलती थी, लेकिन अब सिर्फ विशेष जरूरतों के लिए ही शहर आना होता है। बड़ी संख्या में लोगों ने बसों के अभाव में अपना धंधा ही बंद कर दिया है।
सरकार सुनने को तैयार नहीं, कैसे चलेंगी बसें
मु लताई में बस संचालन से वर्षों से जुड़े हाजी शमीम खान ने बताया कि सरकार की ओर से लॉकडाउन करने से बस व्यवसाय ठप पड़ गया, बावजूद तीन माह का सरकार टैक्स मांग रही है, जो देना संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि बसें नहीं चलने से लोग परेशान हैं, लेकिन सरकार अड़ी है। जब व्यवसाय ही बंद हैं तो टैक्स कैसे देंगे। उन्होंने कहा कि जहां सात प्रदेशों की सरकारों ने टैक्स माफ कर दिया है वहीं मप्र सरकार का रवैया समझ से परे हैं जिससे चलते फिलहाल बसें चालू करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि बसें बंद होने से कितने परिवार प्रभावित हुए हैं क्या इसका अंदाजा सरकार को नहीं है इसलिए लॉकडाउन के दौरान बंद बसों का टैक्स भी नहीं वसूला जाना चाहिए। यही मांग बस संचालकों की है लेकिन सरकार सुनने को तैयार नहीं ऐसी स्थिति में बसें कैसे चलेंगी।
बस स्टेंड के अन्य व्यवसाय भी प्रभावित
बसों के पहिए थमने से सिर्फ बसों से जुड़े ही लोग प्रभावित नहीं हुए वरन दूसरे व्यवसाय भी पूरी तरह प्रभावित हो चुके हैं। बसों के कारण बस स्टेंड पर होटल, पानठेले, फल एवं अन्य व्यवसाय भी चलते थे, लेकिन फिलहाल बाहर से लोग ही बस स्टेंड नहीं पहुंच रहे हैं जिससे यहां स्थित दुकानों का व्यवसाय पूरी तरह प्रभावित हुआ हैं। होटल व्यवसाय से जुड़े प्रकाश सुहाने ने बताया कि बस स्टेंड पर उन्होंने दुकान तो खोल ली है, लेकिन ग्राहक नदारद हैं इसलिए होटल खोलने के बावजूद वे खाली बैठे हैं।
नगर का व्यवसाय भी ठप : बसों के माध्यम से बड़ी संख्या में ग्रामीण अंचलों से लोग नगर में पहुंचते थे जिनके भरोसे नगर का व्यवसाय संचालित होता था, लेकिन बसें बंद होने से ग्रामीण निजी साधनों से ही उतनी संख्या में नहीं पहुंच पा रहे हैं। ऐसे में नगर का भी व्यवसाय प्रभावित हो गया है। फिलहाल सिर्फ सक्षम लोग ही अपने वाहनों से मुलताई पहुंच रहे हैं। जिससे अभी भी व्यवसाय गति नहीं पकड़ रहा है।

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