पढ़े, लॉक डाउन ने बढ़ाई लोगों के राशन-पानी की चिंता, होम डिलेवरी के नाम पर कुछ नहीं

कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए लगाए गए २१ दिन के लॉक डाउन ने लोगों के राशन-पानी की चिंता को बढ़ा दिया है। प्रशासन व्यवस्था बनाने के लिए होम डिलेवरी की बात तो कह रहा है लेकिन अभी तक यह व्यवस्था शुरू नहीं हो सकी है। पिछले चार दिनों से अभी तक राशन पहुंचाने के कोई इंतजाम नहीं हो सके हैं।

बैतूल। कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए लगाए गए २१ दिन के लॉक डाउन ने लोगों के राशन-पानी की चिंता को बढ़ा दिया है। प्रशासन व्यवस्था बनाने के लिए होम डिलेवरी की बात तो कह रहा है लेकिन अभी तक यह व्यवस्था शुरू नहीं हो सकी है। पिछले चार दिनों से अभी तक राशन पहुंचाने के कोई इंतजाम नहीं हो सके हैं। राशन के लिए इधर-उध भटक रहे हैं। लॉक डाउन के चौथे दिन पुलिस जिले भर में सक्रिय नजर आई। सड़क पर जो भी लोग अनावश्यक रूप से नजर आए पुलिस ने उनकी पिटाई लगाई। इस चक्कर में ऐसे लोग भी पीट गए जो इमरजेंसी सेवाओं के लिए बाहर निकले थे। कहीं-कहीं पर पुलिस द्वारा उठक-बैठक लगाए जाने का मामला भी सामने आया है। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान शराब दुकानें भी बंद कराई। लॉक डाउन के चलते पुलिस और नगरपालिका वाहन शहर में लगातार भ्रमण करते नजर आए। वहीं जो कुछ दुकानें सुबह के समय गली-मोहल्ले में खुल गई थी उन्हें बंद कराया गया। दुकानदारों को समझाईश के बाद छोड़ा गया।वहीं मंगलवार शाम को २१ दिन के लॉक डाउन की घोषणा हुई गली-मोहल्ले में खुली दुकानों पर राशन के लिए लोगों की भीड़ लग गई थी। विदेश से आकर खुले में घूम रहे लोगों पर प्रशासन ने अब एफआईआर की तैयारी भी कर ली है।
घर कब पहुंचेगा राशन पता नहीं
लॉक डाउन के दौरान होम डिलेवरी के रूप में राशन कब तक लोगों के घरों में पहुंचेगा इसका पता नहीं। यदि समय से राशन नहीं पहुंचेगा तो लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। अभी से ही घरों में राशन समाप्त होने की बात सामने आ रही है। गांव से शहर में आकर रहने वाले छात्रों के पास राशन खत्म हो गया है। समाजसेवी राजेश सरियाम ने बताया कि राशन के लिए छात्र परेशान हो रहे हैं। लोग शहर की गली-कूचों में राशन के लिए भटक रहे हैं। राशन की होम डिलेवरी को लेकर जिले के नोडल अधिकारी एवं जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी एके कुजूर से चर्चा की गई तो उनका कहना था खाद्यान्न की होम डिलेवरी को लेकर अभी चर्चा भर हुई है। व्यापारी संघ रिटेलर्स दुकानदारों की सूची उपलब्ध कराएगा। जिसके बाद रूट चार्ट बनाकर शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में सप्लाई की व्यवस्था की जाएगी। इसमें कितना समय लगेगा यह अभी कहा नहीं जा सकता।
मिनी ट्रक के भरोसे से पूरे शहर में सब्जी बेच रहे
लॉक डाउन के दौरान सब्जी-भाजी को लेकर भी लोगों की परेशानियां सामने आई, क्योंकि लोगों को इस संबंध में जानकारी नहीं है कि कैसे और किससे सब्जी बुलवाई जाए। हालांकि उद्यानिकी विभाग मिनी ट्रक के माध्यम से सब्जियों लोगों के घरों तक पहुंचाने की व्यवस्था की है लेकिन यह इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। सभी घरों तक वाहन नहीं पहुंच पा रहा है। पहले दिन बुधवार को बैतूल शहरी क्षेत्र में एक वाहन के माध्यम से कुल 1400 किलो फल-सब्जियां उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराई गई है। दूसरे दिन बुधवार को बैतूल शहरी क्षेत्र में चार वाहनों, शाहपुर में एक वाहन, सारनी में एक वाहन द्वारा किसानों से फल-सब्जियां सीधे उपभोक्ताओं को घर पहुंच सुविधा द्वारा उपलब्ध कराई जा रही है, लेकिन सवा लाख की आबादी वाले बैतूल शहर में एक दिन में ३३ वार्डों तक सब्जी के वाहन नहीं पहुंच पा रहे हैं। इन वाहनों की पहुंच कुछ ही क्षेत्रोंं तक सिमित होकर रह गई है। कुछ घरों में तो पिछले चार दिनों से सब्जी तक हैं, लोग दाल भर से काम चला रहे हैं। वहीं सब्जी, फलों के सरकारी रेट लिस्ट को लेकर भी लोग सवाल उठा रहे हैं लेकिन लॉक डाउन में जिस तरह से ट्रांसपोर्ट की सुविधा बंद है उससे सामग्री महंगी होना जायज है।
बेवजह घरों से निकल रहे लोगों को पीट रही पुलिस
लॉक डाउन के चलते पुलिस ने सड़कों पर आम लोगों की आवाजाही न के बराबर कर दी है। जो बेवजह सड़क पर घूमता हुआ नजर आ रहा है उसे पुलिस के डंडे का शिकार हो ना पड़ रहा है। वैसे इस समय पुलिस का डंडा सभी पर एक सामान चल रहा है। अत्यावश्यक सेवा से जुड़े दूध विक्रेताओं पर भी पुलिस बेवजह डंडा भांज रही है। इसके अलावा यदि कोई इंमरजेंसी में दवा लेने के लिए मेडिकल जा रहा है और पर्चा भी बता रहा है तो भी उसे डंडे का शिकार होना पड़ रहा है। जबकि आम जनता के लिए इमरजेंसी में मेडिकल सेवा को शुरू रखा गया है। कई अन्य लोग जो इमरजेंसी काम से निकल रहे हैं उन्हें भी रोककर डंडे का डर बताया जा रहा है। हालांकि लॉक डाउन का सभी शहरवासी पूरा पालन कर रहे हैं लेकिन कुछ लोगों की वजह से इंमरजेंसी सेवा देने वाले भी पुलिस के निशान में आ रहे हैं।
विदेश से लौटे ३८ लोगों पर रखी जा रही नजर, बारह निकले तो एफआईआर
विदेश से लौटे ३८ लोगों की स्वास्थ्य विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा निगरानी की जा रही है। उनके घरों में ब्लू स्टीकर लगाए गए हैं। सभी को लॉक डाउन के दौरान घरों में रहने के लिए कहा गया है। यदि वे या उनके परिवार का कोई भी सदस्य घर से बाहर निकलता है तो उनके विरूद्ध एफआईआर दर्ज की जाएगी। कलेक्टर राजेंद्र सिंह ने बताया कि विदेश से लौटे सभी लोगों और उनके परिवारों को हिदायत दी है कि वे घरों के अंदर ही रहे। यदि बाहर निकलते हैं तो उनके विरूद्ध अपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाएगा।

Devendra Karande Reporting
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