स्कूल की दशा सुधारने शिक्षकों ने वेतन से खर्च किए ५ लाख रुपए

स्कूल में पानी टपक रहा हो तो शिक्षक पन्नी भी खरीदकर नहीं लगाते हैं और शासन की ओर से मिलने वाली राशि की राह ताकते हैं। लेकिन जिले में ऐसे भी शिक्षक हैं जिन्होंने अपने वेतन की राशि से पांच लाख रुपए से अधिक खर्च कर पूरे स्कूल की दशा ही बदल दी है।

By: ghanshyam rathor

Published: 05 Sep 2019, 09:09 PM IST


बैतूल। स्कूल में पानी टपक रहा हो तो शिक्षक पन्नी भी खरीदकर नहीं लगाते हैं और शासन की ओर से मिलने वाली राशि की राह ताकते हैं। लेकिन जिले में ऐसे भी शिक्षक हैं जिन्होंने अपने वेतन की राशि से पांच लाख रुपए से अधिक खर्च कर पूरे स्कूल की दशा ही बदल दी है। अब यह स्कूल जिले में भर लोगों के लिए आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। शांतिपुर २ के इस प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में बच्चों का शिक्षा स्तर भी देखते ही बनता है। स्कूल की स्थिति यह है कि अभिभावक निजी स्कूलों से अपने बच्चों का नाम कटवाकर यहां दर्ज करवा रहे हैं। शिक्षकों द्वारा स्कूलों कई तरह का नवाचार भी किया है।
शांतिपुर २ के माध्यमिक शाला के शिक्षक संतोष जोठे और प्राथमिक शाला के निरंजन कुमार माखन दोनों ने मिलकर स्कूल में नवाचार करने के लिए अपने वेतन से पांच लाख २९ हजार की राशि स्कूल के विकास पर खर्च की है।माध्यमिक शाला के प्रधान पाठक संतोष जोठे ने बताया कि सप्ताह भर पढ़ाई का छात्रों का साप्ताहिकी मूल्यांकन किया जाता है। मूल्यांकन २० अंकों का होता है, जिसमें १२ नंबर विषय से जुड़े सवाल पूछे जाते है। ३ अंक वस्तुनिष्ट आधारित, ३ अंक सामान्य ज्ञान और २ अंक समाचार पत्रों की खबरों के लिए निर्धारित किया गया है। वहीं स्कूलों में प्रतिमाह स्टूटेंट आफ मंथ का चुना जाता है। स्टूटेंट आफ मंथ के लिए छात्रों की प्रतिभा देखी जाती है, जिसका नाम बोर्ड पर अंकित किया जाता है। इन दोनों ही स्कूलों में २८७ छात्र दर्ज है, जिसमें माध्यमिक शाला में १५९ छात्र दर्ज है। वहीं प्राथमिक शाला में १२९ छात्र दर्ज है। स्कूल में में सफाई कार्य के लिए एक व्यक्ति की नियुक्ति की गई है, जिससे की छात्रों को स्कूल की सफाई नहीं करनी होती है। दोनों ही शिक्षकों द्वारा किए गए नवाचार के कारण इस शासकीय स्कूल ने छात्र के प्राइवेट स्कूलों को पीछे छोड़ दिया है। बच्चों की पढ़ाई का स्तर भी उच्च स्तर का है। साथ ही जनसहयोग से स्कूल के विकास के लिए ७० हजार की राशि खर्च की है। इस स्कूल में हुए नवाचार को देखते हुए राज्य शिक्षा केंद्र के अधिकारी भी देानों शिक्षकों के कार्यों की प्रशंसा कर रहे है, इन शिक्षकों द्वारा किए गए नवाचार को प्रदेश के अन्य स्कूलों में लागू करने की तैयारी में है।
स्कूल में यह हुआ नवाचार
दोनों ही शिक्षकों ने छात्रों की सुविधा के लिए भाषण स्टैंड, पंखे सीलिंग, कूलर, रेम्प निर्माण, दर्पण, लकड़ी का मोर, हैंडवास यूनिट, गार्डन निर्माण, कम्प्यूटर, न्यूज पेपर स्टैंड, गमले, दीवार घंड़ी, फोटो फ्रेम, वॉटर फिल्टर , कारपेट, डस्टबीन , सूचना पटल, शिकायत एवं सुझाव पेटी, खोया पाया बॉक्स, कुशन , प्राथमिक उपचार पेटी, बिजली फिटिंग कार्र्य, प्रोजेक्टर , फोटो कॉपी मशीन, पानी की मोटर, स्कूल गेट, पेटिंग कार्य, खेल सामग्री, भोजन बैठक व्यवस्था, प्रेरणा पटल, सुविचार पटल, शाला की सफाई के लिए एक कर्मचारी की नियुक्ति की गई है। साथ ही महापुरूषों के २०० से अधिक छाया चित्र, ग्लोब, डस्टर स्टैंड, सहित अन्य सुविधाएं छात्रों के लिए उपलब्ध है। स्कूल का वातारवरण प्राइवेट स्कूल को भी पीछे छोड़ रहा है।

ghanshyam rathor Bureau Incharge
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