पंचायतों ने नहीं ली पर्यावरण अनुमति बंद पड़ी है जिले की 17 रेत खदानें

पंचायतों ने नहीं ली पर्यावरण अनुमति बंद पड़ी है जिले की 17 रेत खदानें

poonam soni | Updated: 27 May 2019, 02:44:56 PM (IST) Hoshangabad, Hoshangabad, Madhya Pradesh, India

जिले में कुल 26 रेत खदानें, 7 को चला रहे ठेकेदार

बैतूल. जिले में पंचायतों का रेत खदान चलाने से धीरे-धीरे मोह भंग होता जा रहा है। नई रेत खनन नीति के तहत खनिज विभाग द्वारा डेढ़ दर्जन से अधिक रेत खदानें पंचायतों को हैंडओवर की थी। पंचायतों ने कुछ दिनों तक तो रेत खदानों का संचालन किया लेकिन पर्यावरण अनुमति की अवधि खत्म होने के बाद संचालन से हाथ खड़े कर दिए हैं। किसी भी पंचायत ने रेत खदान के संचालन को लेकर दोबारा से पर्यावरण की अनुमति नहीं ली है जिसके कारण यह रेत खदानें बंद हालत में हैं। चूंकि पंचायत रेत खदान का संचालन नहीं कर पा रही है बताया जाता है कि इसलिए इन खदानों से चोरी छुपे अवैध उत्खनन शुरू हो गया है।
जिले में रेत खदानों की संख्या २६ है इनमें से ७ रेत खदानें ठेकेदारों द्वारा संचालित की जा रही है जबकि १७ खदानें पंचायतों को दी गई थी। शेष दो खदानें बंद हालत में है। पंचायतों ने शुरूआत में रेत खदान का संचालन तो ठीक-ठाक किया लेकिन रेत के कारोबार में विवाद के चलते पंचायतों ने संचालन बंद कर दिया है। तो वहीं कुछ पंचायतों का कहना है कि खनिज विभाग द्वारा उन्हें रेत खदानें हैंडओवर कर तो दी लेकिन उक्त खदानों में रेत ही

मौजूद नहीं थी। इस वजह से वह संचालन ही नहीं कर पाए और न ही खनिज विभाग द्वारा उन्हें रायल्टी काटने के अधिकार दिए गए।

ये है पंचायतों के पास रेत खदानें
लोनिया
झारकुंड
बाकुड
सीतलझिरी
निवारी
रातामाटी
फूलबेरिया
डेहरगांव/भयावाड़ी
कोदारोटी
कुम्हारिया
भीलावाड़ी
माथनी
चिखली आमढाना
शाहपुर/ पतौवापुरा
हरन्या
सोनतलाई
बारछी

पंचायतों को लेना था अनुमति
खनिज विभाग जहां पंचायतों को रेत खदानें हैंडओवर किए जाने की बात कह रहा है वहीं पंचायतों का यह कहना है कि खनिज विभाग ने उन्हें रेत खदानें तो आवंटित कर दी लेकिन खदान संचालन के लिए उन्हें आज तक पर्यावरण की अनुमति ही नहीं दी गई और न ही रेत खदान संचालन को लेकर रायल्टी रसीदे जारी की गई। ऐसे में रेत खदानों का पंचायतों द्वारा संचालन किए जाने का तो सवाल ही नहीं उठता है। खनिज विभाग को पर्यावरण अनुमति पंचायतों को दिलाई जाना थी लेकिन किसी को भी अनुमति नहीं दिलाई गई जबकि विभाग का कहना था कि पर्यावरण की अनुमति स्वयं पंचायतों द्वारा ली जाना थी।

शासन ने अब बैन लगाया
शासन ने रेत खदानें पंचायतों को दिए जाने पर फिलहाल बैन लगा दिया है। बताया गया कि पंचायतों को रेत खदान आवंटित किए जाने के लिए पुन: नए तरीके से शासन स्तर पर नीति का निर्धारण किया जा रहा है। इस वजह से खदानें पंचायतों को अभी हैंडओवर नहीं की जा रही है। ज्यादातर रेत खदानें बंद पड़ी है। हालांकि इन खदानों से चोरी-छुपे रेत का अवैध उत्खनन लगातार जारी है। जिस पर किसी प्रकार की कोई रोक नहीं लग रही है। होशंगाबाद में हुई खनिज विभाग की बैठक में कमिश्नर ने भी अवैध उत्खनन पर रोक लगाने के खनिज विभाग को निर्देश दिए थे लेकिन मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।

७ नई खदानें शुरू करने की तैयारी
खनिज विभाग द्वारा चोपना एवं घोड़ाडोंगरी क्षेत्र में सात नई रेत खदानें शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इन रेत खदानों का सर्वे भी विभाग द्वारा कर लिया गया है। यह खदानें जल्द ही नीलामी की जाएगी। इन खदानों में प्रचूर मात्रा में रेत होना बताया जा रहा है। जो स्थिति है उसमें वर्तमान में ७ रेत खदानों का संचालन ठेकेदारों द्वारा किया जा रहा है। उल्लेखनीय हो कि पिछले दो सालों से जिले में अल्पवर्षा के चलते नदियों में रेत न के बराबर रह गई है। ऐसे में रेत के कारोबार में भी तेजी आई है। इससे रेत के दाम भी दो सालों में दोगुने हो गए हैं। जिसके कारण गरीबों के पक्के घरों का निर्माण भी महंगा होता जा रहा है।

जिले की करीब १७ पंचायतों को रेत खदानें शासन के निर्देशानुसार आवंटित की गई थी लेकिन पंचायतों द्वारा इसके संचालन से हाथ खड़े कर दिए गए हैं। पंचायतों द्वारा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का सर्टिफिकेट नहीं लिया गया। जिसके खदानें बंद पड़ी हैं। चंूकि पुन: नई रेत खनन नीति बन रही है इसलिए पंचायतों को रेत खदानें देने पर िबैन लगा दिया है।

- ओपी बघेल, जिला खनिज अधिकारी, बैतूल

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