परंपरा के नाम पर जिंदगी से खिलवाड़, गोबर में फेंके जाते हैं मासूम बच्चे

सदियों से चली आ रही गोबर में बच्चों को लिटाने की परंपरा, डॉक्टर्स बताते हैं बच्चों को हो सकती हैं बीमारियां..

By: Shailendra Sharma

Published: 15 Nov 2020, 04:43 PM IST

बैतूल. हमारे देश में तरह तरह की परंपराए हैं और इन परंपराओं के नाम पर आज भी देश में लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जाता है। हर त्यौहार के बाद ऐसी कोई न कोई परंपरा मनाई जाती है जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकती है। ऐसी ही एक परंपरा दीपावली के बाद गोवर्धन पूजा के दिन मध्यप्रदेश के बैतूल में मनाई जाती है। इस परंपरा में गोबर से बने गोवर्धन पर छोटे-छोटे बच्चों को लिटाया जाता है।

गोबर के ढेर पर बच्चों को लिटाने की परंपरा

गोवर्धन पूजा के दिन बैतूल जिले में एक बच्चों को गोबर के ढेर पर लिटाने की परंपरा है। माता-पिता ही अपने मासूम बच्चों को गोबर से बने गोवर्धन पर लिटाते हैं। रोते-बिलखते बच्चों को देखकर भी माता-पिता का दिल नहीं पसीजता। लोग बताते हैं कि ऐसा करने से बच्चे तंदरुस्त रहते हैं। मान्यता है कि बच्चों को गोबर पर लिटाकर गोवर्धन भगवान से अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं। ऐसा आयोजन बैतूल जिले में कई जगहों पर होता है। स्थानीय लोग कहते हैं कि हमलोग ऐसा आजमा चुके हैं। वहीं जानकार कहते हैं कि यह सिर्फ आस्था का विषय है। ग्वाला समाज के लोग ज्यादा पढ़े लिखे नहीं होते हैं। अंधविश्वास की वजह से ऐसा करते हैं, क्योंकि गोबर में कई प्रकार के कीटाणु होते हैं जो बच्चों के लिए नुकसानदेह है।

 

 

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बच्चों को हो सकती है खतरनाक बीमारियां

एक तरफ जहां स्थानीय लोग परंपरा को मनाते हैं और उनका कहना है कि ऐसा करने से बच्चे तंदरुस्त रहते हैं वहीं डॉक्टर कहते हैं गोबर में सक्रबटायफस जैसे खतरनाक बैक्टीरिया होते हैं, इससे फैले इंफेक्शन से बच्चे की जान भी जा सकती है। प्रशासन इसे लेकर इलाकों में जागरूकता अभियान भी चलाती है लेकिन उसका कोई असर होता नहीं दिखता। आज भी कई इलाकों में इसका आयोजन होता है। जबकि इन इलाकों में बच्चे गोबर से फैलने वाले बीमारियों के शिकार भी होते हैं।

 

गोवर्धन पूजा के दिन की अजीबोगरीब परंपराएं

बता दें कि गोवर्धन पूजा के दिन कई तरह की अजीबो गरीब परंपराएं मनाई जाती हैं। कहीं पर भैंसों को लड़ाने की परंपरा है तो कहीं पर गायों की दौड़, बैलगाड़ी दौड़ की परंपरा भी हैं। उज्जैन में परंपरा के नाम पर लोग दौड़ती हुई गायों के आगे लेट जाते हैं जो कि काफी खतरनाक होता है।

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