महंगी रेत पर भाजपाईयों का अनूठा प्रदर्शन, तराजू से तौलकर पैकेटों में बेची रेत

कांग्रेस सरकार की रेत नीति के विरोध में भाजपाइ सोमवार को सड़क पर उतर पड़े। भाजपाइयों ने शहर में हाथ ठेले पर तराजू से रेत बेचकर अनूठा विरोध प्रदर्शन किया। शहर में ढोल-बाजों के साथ रैली भी निकाली गई और महंगी रेत के विरोध में जमकर नारेबाजी की गई। रेत के दाम कम किए जाने की मांग को लेकर भाजपाइयों ने जिला प्रशासन को एक ज्ञापन भी सौंपा।

By: Devendra Karande

Published: 30 Jun 2020, 05:03 AM IST

बैतूल। कांग्रेस सरकार की रेत नीति के विरोध में भाजपाइ सोमवार को सड़क पर उतर पड़े। भाजपाइयों ने शहर में हाथ ठेले पर तराजू से रेत बेचकर अनूठा विरोध प्रदर्शन किया। शहर में ढोल-बाजों के साथ रैली भी निकाली गई और महंगी रेत के विरोध में जमकर नारेबाजी की गई। रेत के दाम कम किए जाने की मांग को लेकर भाजपाइयों ने जिला प्रशासन को एक ज्ञापन भी सौंपा। जिसमें बताया गया कि रेत ठेकेदार १२५ रुपए प्रति घन मीटर की रेत के १२०० रुपए घन मीटर तक वसूल रहे हैं। िबैतूल जिले में पिछले पांच सालों में रेत के दाम सर्वाधिक उंचाई पर पहुंच गए हैं। एक डंपर रेत के दाम १८ से २० हजार रुपए तक है। ऐसे में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बनाने वाले गरीबों का सपना टूट गया है। वहीं रेत के साथ सीमेंट्र, ईट और लोहे के दाम भी बढऩे से भवन निर्माण की लागत भी बढ़कर दोगुनी हो गई है।
तराजू से तौलकर बेची रेत
भाजपा विधि प्रकोष्ठ के पदाधिकारी कपिल वर्मा, गंज मंडल अध्यक्ष विकास मिश्रा व कोठीबाजार मंडल अध्यक्ष विक्रम वैद्य के नेतृत्व में सैकड़ों भाजपाई ओपन ऑडिटोरियम के पास एकत्रित हुए। यहां से भाजपाइ हाथ ठेले में रेत रखकर बेचने निकले और जगह-जगह प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की। भाजपाइ तीन हाथ ठेलों में बैनर-पोस्टर लगाकर रेत बेचकर विरोध जता रहे थे। हाथ ठेलों में रेत से भरे पैकेट रखे गए थे जिन्हें आम जनता को पचास रुपए प्रति पैकेट की दर से बेचा जा रहा था। भाजपाइयों के प्रदर्शन का यह तरीका अनूठा था इसलिए सभी का ध्यान आकर्षित कर रहा था। भाजपा कार्यकर्ता स्टेडियम चौक से बस स्टैंड, कोर्ट रोड होते हुए सीधे कलेक्टोरेट पहुंच। यहां नारेबाजी करने के बाद जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर रेत के दाम कम किए जाने की मांग की गई।
यह है रेत महंगी होने का कारण
प्रदेश में आई कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने नई रेत नीति के तहत रेत खदानों के गु्रप बनाकर ठेके दिए थे। सरकार की सोच थी कि अलग-अलग रेत के ठेके दिए जाने से अवैध उत्खनन को बढ़ावा मिलेगा और रेत के दाम भी बढ़ेंगे। नई रेत नीति में बड़े गु्रप ही रेत का ठेके ले सकते थे। ऐसे में पूरे जिले की खदानों का ठेका एक ही ठेकेदार के लेने के कारण रेत के कार्य में प्रतिस्पर्धा खत्म हो गई और ठेकेदार की एक तरफा मोनोपल्ली के चलते बैतूल जिले में रेत के दाम पहले से दोगुने हो गए। बैतूल जिले में सतना की उमा रेसिडेंसी नाम की फर्म ने लगभग ३२ करोड़ में रेत का ठेका लिया है। वहीं रेत महंगी होने का दूसरा कारण बड़ी मात्रा में रेत महाराष्ट्र भेजी जा रही है। जिसके कारण भी रेत के दाम महंगे कर दिए गए हैं।
१२०० रुपए घन मीटर तक वसूल रहे दाम
माइनिंग कार्पोरेशन द्वारा ठेकेदार से १२५ रुपए प्रति घनमीटर के आधार पर रायल्टी वसूल की जा रही है, लेकिन रेत ठेकेदार अधिक मुनाफा कमाने के लिए आम जनता को १२०० रुपए प्रति घन मीटर की दर से रेत बेच रहे हैं। जिससे रेत के दाम सातवें आसमान पर पहुंच गए हैं। आज से पांच साल पहले जहां एक डंपर रेत ८ से १० हजार रुपए में आती थी वहीं आज एक डंपर रेत के दाम १८ से २० हजार रुपए तक वसूल किए जा रहे हैं। जिसके कारण रेत काफी महंगी हो गई है। इसी प्रकार ट्राली में आने वाली रेत भी आठ से दस हजार रुपए प्रति ट्राली पर पहुंच गई है।
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महंगा हुआ आशियाना बनाना
बैतूल। लॉक डाउन के बाद सभी चीजों के दाम तेजी से बढऩे के कारण आशियाना बनाने का सपना काफी महंगा हो गया है। खासकर गरीबों के लिए पक्का घर बनाना मुश्किल है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शहरी क्षेत्र में ७० से अधिक हितग्राहियों ने आवास योजना की राशि तक सिलेंडर कर दी है। वहीं जिन्होंने आवास निर्माण का काम शुरू किया था उन्होंने भी महंगाई की वजह से काम बंद करा दिया है। सबसे ज्यादा फजीयत प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीबों की हो रही है। पुराना कच्चा मकान तोड़कर नया बनाने के चक्कर में अभी तक मकान का काम पूरा नहीं हो सका है। महंगाई की वजह से काम भी रूका पड़ा है। आवास योजना के हितग्राहियों का कहना था कि मकान बनाने के लिए सरकार पहली किस्त ६० हजार रुपए की देती है। यदि २० हजार रुपए में एक डंपर रेत आएगी तो मकान कैसे बनेगा। रेत के अलावा ईंट, लोहा, सीमेंट के दाम भी बढ़ गए हैं। वहीं सरकारी निर्माण कार्यों के लिए भी रेत महंगी दरों पर ही मिल रही है।

Devendra Karande Reporting
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