जीआई उत्पादों के लिए राज्य स्तर पर सक्षम समिति बनी स्वागत योग्य

समिति का गठन होने से निर्यात को मिलेगा बढ़ावा

By: Neeraj Patel

Updated: 30 Jun 2020, 08:29 PM IST

भदोही. अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ के पदाधिकारियों ने मंगलवार को मर्यादपट्टी स्थित कालीन भवन में आयोजित पत्रकारों से बातचीत के दौरान सरकार द्वारा जीआई उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए बनाए गए राज्य स्तर पर सक्षम समिति का स्वागत किया। कहां कि इससे उद्योग की समस्याओ का भी समाधान होगा। इस दौरान एकमा पदाधिकारियों ने कहा कि कालीन उद्योग को सरकार द्वारा वर्ष 2010 में भौगोलिक संकेतक (जीई) की पहचान दी गई। एकमा द्वारा जीई उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए राज्य स्तर पर एक सक्षम समिति बनाने की मांग की जा रही थी।

एकमा की मांग पर सरकार ने कमेटी बना दी और कहा कि इस समिति में कालीन निर्यातकों को भी शामिल किया जाए। उत्पाद की मार्केटिंग एंव ब्रांडिंग के लिए सरकार से निर्यात मूल्य पर 5 फीसदी प्रोत्साहन राशि देने की मांग की गई। कहा कि जीआई उत्पादों के लिए समिति का गठन होने से निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।

वहीं अलग से मिशन जीआई बनारस के गठन की सराहना की गई। जिसमें प्रमुख रूप से भदोही के कालीन, मिर्जापुर की दूरी व बनारसी सिल्क की सहभागिता है। कहा कि सरकार अगर कालीन एवं दरी के निर्यात मूल्य पर 5 फीसदी प्रोत्साहन राशि देती है तो इससे कोविड-19 जैसी महामारी से उत्पन्न संकट से लड़ा जा सकेगा। हजारों की संख्या में गांव वापस आने वाले प्रवासी मजदूरों को रोजगार दिया जाएगा। इस मौके पर एकमाध्यक्ष ओंकारनाथ मिश्र, हाजी शाहिद हुसैन अंसारी, रवि पाटोदिया, वेद प्रकाश गुप्ता, आलोक बरनवाल, हाजी अब्दुल हादी व कमरुद्दीन अंसारी आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

एकमा न उठाई वेबिनार में निर्यातकों की समस्या

एकमा उपाध्यक्ष हाजी अब्दुल हादी ने बताया कि पिछले दिनों इंडो अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स यूपी ब्रांच वाराणसी द्वारा एमएसएमई में इंवेस्टमेंट के लिए लेबर लॉ एवं भविष्य निधि में परिवर्तन विषय पर एक वेबिनार का आयोजन किया गया था। जहां पर उत्तर प्रदेश में निवेश में आकर्षित करने के लिए भविष्य निधि एवं श्रम कानूनों में बदलाव पर चर्चा की गई।

इसके साथ ही बताया कि कार्यक्रम में केंद्र सरकार द्वारा भविष्य निधि विभाग में अनेक कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। वहां पर क्षेत्रीय कार्यालय कर्मचारी भविष्य निधि संगठन वाराणसी द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न का मुद्दा उठाया गया। वहीं कालीन का गलत व्याख्या करने की शिकायत हुई। जिसे सुधारने का आश्वासन दिया गया। बताया कि विभागीय अधिकारियों द्वारा कालीन निर्यातकों पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है। जिसके कारण अब तक सैकड़ों कालीन निर्यातक कंपनियों को बंद कर चुके हैं। इसकी भी शिकायत की गई और समाधान की मांग की गई।

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