जिस गांव में बना है भाजपा का भव्य कार्यालय, वहां भाजपा प्रत्याशी को मिले सिर्फ 6 प्रतिशत वोट

UP Panchayat Chunav Result: भाजपा ने भदोही के जिस गांव में अपना भव्य कार्यालय बनाया है उसी गांव में भाजपा प्रत्याशी (जिला पंचायत) को महज 6 प्रतिशत वोट ही मिल सके हैं।

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

भदोही.

UP Panchayat Chunav Result: यूपी के भदोही में जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज होने के लिए भाजपा ने जिले की सभी 26 सीटों पर पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ा। पर जिले के जिस गांव में भाजपा का भव्य कार्यालय बना हुआ है और वहां दिन रात पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं का जमावड़ा लगा रहता है उसी गांव से भाजपा के प्रत्याशी को सपा प्रत्याशी के मुकाबले सिर्फ लगभग 6 फ़ीसदी ही वोट मिले हैं। ऐसे में यह एक बड़ा सवाल उठता है की जिस जगह भाजपा का कार्यालय बना है वहीं पर भाजपा अपना जनाधार क्यों नहीं कायम कर पाई।


आपको बता दें कि भाजपा का कार्यालय ज्ञानपुर के जोरई ग्राम सभा में बना हुआ है। यहां काफी बड़ा और भव्य कार्यालय भाजपा ने बनाया है। यहां लगातार कोई न कोई कार्यक्रम होता ही रहता है और जिले से लेकर प्रदेश स्तर तक के नेताओं का पार्टी कार्यालय में कार्यक्रम चलता ही रहता है। भाजपा कार्यालय का यह इलाका जिला पंचायत सदस्य के वार्ड नंबर 13 के अंतर्गत आता है जहां से भारतीय जनता पार्टी ने पिपरिस निवासी छात्र नेता रहे समाजसेवी अखिलेश प्रकाश पाल को अपना प्रत्याशी बनाकर चुनावी मैदान में उतारा था।

 

इस सीट पर समाजवादी पार्टी युवजन सभा के निवर्तमान जिला अध्यक्ष मनोज यादव को जीत हासिल हुई है। जबकि अखिलेश प्रकाश पाल दूसरे स्थान पर रहे हैं। लेकिन इस वार्ड के 19 गांव में लगभग हर गांव में अखिलेश पाल को अच्छे-खासे वोट मिले लेकिन पार्टी कार्यालय वाले ग्राम सभा में जो वोट मिले हैं वह सपा प्रत्याशी के मुकाबले सिर्फ 6 फ़ीसदी ही है ऐसा बताया जा रहा है कि मनोज यादव को इस गांव से करीब 1800 वोट मिले हैं जबकि अखिलेश को लगभग 100 वोटों के आसपास ही वोट मिल सके हैं। जबकि बताया जा रहा है कि इस ग्राम सभा में कुल 2800 वोट पड़े थे ऐसे में अगर देखा जाए तो कुल पड़े वो तो की तुलना में भाजपा प्रत्याशी के काफी कम वोट मिले। इसे लेकर राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जिस गांव में पार्टी का कार्यालय हो वहां पार्टी को इतने कम वोट मिलना यह सवाल पैदा करता है कि दीपक तले अंधेरा क्यों रहा।

By Mahesh Jaiswal

रफतउद्दीन फरीद
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