कालीन उद्योग पर Corona संकट, विदेशों में फंसे दो हजार करोड़! लगभाग इतने का ही माल भी डम्प

कोरोना के चलते ऑर्डर मिलने में भी आई भारी कमी। सालाना होता है करीब 12 हज़ार करोड़ का कालीन निर्यात का कारोबार।

 

महेश जयसवाल

भदोही. वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण तमाम उद्योग धंधे बड़े पैमाने पर प्रभावित हुए हैं तो वहीं विदेशी बाजारों पर निर्भर कालीन उद्योग की भी हालत काफी सुस्त हो गयी है। अनुमान के मुताबिक़ विदेशों में निर्यताको के दो हजार करोड़ फंसे हुए हैं। इसके अलावा ऑर्डर मिलने में बी भारी कमी आयी है। इसके पीछे कोरोना के चलते अमेरिका-यूरोप का सबसे अधिक प्रभावित होना बताया जा रहा है।

 

यूपी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के उपाध्यक्ष और कालीन निर्यातक विनय कपूर ने बताया कि हस्तनिर्मित कालीनों का सबसे बड़ा बाजार अमेरिका-यूरोप है लेकिन मौजूदा दौर में कोरोना वायरस के कारण ये सबसे अधिक प्रभावित हैं। देश से 12 हजार करोड़ की कालीन सालाना निर्यात की जाती है। बायर्स से इंडस्ट्री में लगातार लेन देन होता रहता है, लेकिन अचानक बढ़े कोरोना के प्रकोप से चलते सबकुछ ठप कर दिया और पूर्व में निर्यात किये गए माल की एक बड़ी रकम फंसी हुई है। जिसके बारे में अनुमान लगाया जा रहा है कि यह फंसी रकम दो हजार करोड़ के अधिक हो सकती है।

 

इतना ही तैयार माल पड़ा है डंप

ऐसा नहीं है कि कोरोना के चलते कालीन कारोबार को केवल घाटा हज़ारों करोड़ रुपये विदेशों में फंसे होने से ही है। बल्कि कारोबारियों की दिक्कत ये भी है कि उन्होंने पहले से लिए ऑर्डर का माल तैयार कर लिया है, लेकिन उसकी डिलीवरी कोरोना के चलते रुकी हुई है। विनय कपूर के मुताबिक जितनी रकम विदेशों में फंसी हुई है लगभग उतने का ही माल भी डम्प पड़ा है। उनका कहना है कि अगर जल्द स्थितियां नही ठीक हुई तो इंडस्ट्री में मुद्रा का संकट आ सकता है।

 

अमेरिकी संकट ने भी बधाई परेशानी

वहीं कई निर्यताको ने बताया कि पिछले दिनों जब स्थितियां कुछ ठीक हुई थी तो काम पटरी पर लौट रहा था। लेकिन अमेरिका में शुरू हुए श्वेत-अश्वेत के मामले के बाद काम मे रुकावट आयी। हालांकि उन लोगों को उम्मीद है कि जैसे-जैसे स्थितियां सुधरेंगी वैसे-वैसे ऑर्डर भी मिलेंगे और उधारी रकम भी वापस मिलने लगेगी।

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रफतउद्दीन फरीद
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