Lockdown: प्रवासी मज़दूरों का दर्द, जान बचाकर लौटे गांव तो अस्पताल ने पकड़ा दी महंगी दवाइयों की पर्ची

कमीशनखोरी में कोरोना वारियर्स डॉक्टर भूले कर्तव्य।

भूखे पेट घर पहुंचे परदेशी कहाँसे खरीदें महंगी दवाएं।

भदोही. लॉक डाउन के चलते बेरोज़गार हो गए, जैसे तैसे पैदल सायकिल या किसी और साधन से घर पहुंचे, जेब में फूटी कौड़ी भी नहीं, उसपर अस्पताल के डॉक्टर ने बाहर से महंगी दवाएं लिख दी हैं, कहाँ से लाएं। ये परदेस से लौटे गरीब प्रवासी का दर्द है। आरोप है कि भदोही के जिला अस्पताल में कोरोना की जांच के बाद डॉक्टर बाहर की महंगी दवाइयां लिख रहे हैं जिससे भुखमरी-बेरोजगारी के कारण महानगरों से लौटने वाले कामगारों के सामने एक बड़ी समस्या खड़ी हो रही है कि वो महंगी दवाइयां खरीदने के लिए पैसे कहाँ से लाएं। जिला अस्पताल में मुम्बई से आने वाले कई ऐसे लोग मिले जो पैसे न होने के कारण बिना दवा खरीदे वापस लौट गए। अस्पताल अधीक्षक का कहना है कि बाहरी दवाइयां लिखने पर पूरी तरह प्रतिबंध है। बाहरी दवा लिखने की वो जांच कराएंगे।

 

चार दिनों तक अपनी ऑटो चला पूरे कुनबे को लेकर मुम्बई से भदोही पहुंचे रमेश कुमार यादव महाराजा चेतसिंह जिला अस्पताल में कोरोना की जांच कराने पहुंचे। उन्होंने बताया कि डॉक्टर ने थर्मल स्कैनर से उनकी जांच की। उन्हें कोई बीमारी नही है लेकिन बावजूद इसके उन्हें और उनके परिवार के लिए अस्पताल से बाहर की दवा लिख दी गयी। अस्पताल के बाहर प्राइवेट मेडिकल स्टोर dewपर उन्हें बताया गया कि यह दवा 700 रुपये की आएगी। लेकिन पैसा न होने के कारण उन्होंने दवाएं नही ली और घर जाकर पैसे का इंतजाम करेंगे उनके बाद यहां आकर दवा खरीदेंगे।इस रमेश ने बताया कि वो खुद बेरोजगारी झेल रहे हैं। उसपर इतनी महंगी दवाएं कहाँ से खरीदेंगे।

 

इसी तरह मुम्बई से ट्रक लेकर आये रामकुमार बिन्द को भी बाहर की दवाएं लिख दी गई। कई और लोगों ने भी बताया कि उन्हें अस्पताल से दवा न देकर बाहर की महंगी दवा लिखी गयी। कोरोना का डर है इसलिए उन लोगों ने दवा खरीदी।

 

वहीं जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने बताया कि बाहर की दवाइयां लिखने पर पूरी तरह प्रतिबंध है। कोरोना की जांच कराने आये लोगों को अगर बुखार-सर्दी है तो उसकी दवा अस्पताल से ही निशुल्क देने का निर्देश है। उन्होंने कहा कि बाहरी दवाइयां लिखने के मामले में वो जांच कराकर कार्यवाई करेंगे। लेकिन इस मामले में बड़ा सवाल यह उठता है कि जब सरकार कोरोना संक्रमितों का पूरी तरह निशुल्क इलाज कर रही है तो विस्थापित कामगारों-श्रमिको की कोरोना जांच के बाद महंगी दवाएं लिखने का अधिकार डॉक्टरों को किसने दे दिया। माना जा रहा है कि इस आपदा में भी डॉक्टर मोटे कमीशन के चक्कर मे बाहरी दवाएं लिख रहे हैं।

By Mahesh Jaiswal

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रफतउद्दीन फरीद
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