Article 370 हटने के बाद जगी उम्मीद, भदोही के रास्ते कश्मीर में बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

Article 370 हटने के बाद जगी उम्मीद, भदोही के रास्ते कश्मीर में बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
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Sarweshwari Mishra | Publish: Aug, 08 2019 01:14:03 PM (IST) Bhadohi, Bhadohi, Uttar Pradesh, India

कॉलीन उद्योग की तकनीक को साझा कर वहां के कालीन बुनकरों को दिया जा सकता है रोजगार, कालीन उद्योग से और बुनकरों को जा सकता है जोड़ा पूरे देश से दस हजार करोड़ की कॉलीन की जाती है निर्यात

भदोही. केंद्र सरकार द्वारा धारा 370 हटाये जाने के बाद कश्मीर में रोजगार के जरिये खुशहाली का रास्ता भदोही से निकल सकता है। इसका रास्ता कॉलीन उद्योग से निकल सकता है क्योंकि कश्मीर और भदोही दोनों ही जगहों पर कॉलीन एक सांस्कृतिक विरासत और परम्परा है। ऐसे में तकनीक का आदान प्रदान कर कश्मीर में कॉलीन के जरिये रोजगार को बढ़ावा दिया जा सकता। कश्मीर में बहुत ही हाई क्वॉलिटी के हस्तनिर्मित कॉलीन बनते हैं जिसके बहुत महंगे होने के कारण उसके मांग में भारी कमी आयी है ऐसे में भदोही के कालीनों का निर्माण कश्मीर में होने से वहां के लोगों को रोजगार मिल सकता है।

 

भदोही और कश्मीर कॉलीन के बड़े निर्माता है। यहां की अर्थव्यस्था कालीन निर्यात और निर्माण पर निर्भर है। दोनों की सांकृतिक विरासत है, ऐसे दोनों के बीच की दूरी कम होने से देश को कश्मीर से जोड़ने में कालीन एक अहम भूमिका निभाएगी। भदोही के कालीन उद्योग से जुड़े लोग सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए हुए मानते हैं कि कालीन दोनो जगहों की सांस्कृतिक विरासत है। जहां लाखों लोग इस रोजगार से जुड़़कर कला संस्कृत के साथ इस हस्तकला से पूरी दुनिया मे अपनी पहचान बना रखी है। धारा 370 के कारण जहां कश्मीर में बेरोजगारी बढ़ी और वहां के उद्योग धंधे पर प्रतिकूल असर पड़ा है इससे यह उद्योग वहां सिमटता जा रहा है, लोग बेरोजगार हो रहे थे। अब केंद्र सरकार के निर्णय से जनपद में बनने वाले कालीन और कश्मीर में बनने वाले कालीन के बीच व्यापार बढ़ सकता है। वही दोनो के बीच तकनीकी का आदान प्रदान भी हो सकेगा। भदोही का कालीन लो नॉट का बनाता है वही कश्मीर के कारीगर बहुत अच्छी क्वालिटी के हाई नॉट सिल्क कारपेट का निर्माण करते है। लेकिन कश्मीर के कालीन की मांग लगातार घट रही है। ऐसे में माना जा रहा दोनों के बीच में दूरी घटने से दोनों अपने कालीन के निर्माण और निर्यात में सहयोग करेंगे तो इससे दोनों जगह रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

 

लोगों का मानना है दोनों के बीच कॉलीन एक पुल का काम काम करेगा । अब तक देश 370 की वजह से कटे इस राज्य में कालीन नए अवसर के पैदा करेगा। इसे लेकर भारतीय कॉलीन प्रौधोगिकी संस्थान के निदेशक आलोक कुमार का मानना है कि भदोही और कश्मीर के कालीन के तकनीक को आपस मे ट्रांसफर कर रोजगार बढ़ाया जा सकता है। कश्मीर में हाई नॉट का कॉलीन बनता है ऐसे में वहां के लोग यहां की कालीनों को आसानी से और कम समय मे बना सकते हैं। इससे वहां रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

 

इसे लेकर कालीन निर्यात संवर्धन परिषद के अध्यक्ष सिद्धनाथ सिंह का मानना है कश्मीर में धारा 370 हटने के बाद आवागमन आसान होगा। बायर, सप्लायर में एक भय रहता था, अनिशिचता के कारण वहां लोग जाने से बचते थे, वह खत्म होगा। इसी कारण बहुत सारे कश्मीर के निर्यातकों ने दिल्ली में अपना ऑफिस खोल लिया था और वहीं से काम करने लगे थे। कश्मीर का कालीन काफी अच्छी क्वालिटी को होता है। वहां यह काम ज्यादातर ज्यादातर औरतें करती है, जो बहुत अच्छा कालीन बनाती हैं। उनके काम में काफी सफाई है, लेकिन अब वहां काम खत्म होने से उन्हें काम की आवश्यकता है। इस निर्णय के बाद ट्रेड बढ़ेगा। हमारा रिश्ता पहले से भी अच्छा था और भी मजबूत होगा। झिझक खत्म हो जाएगी, आदान प्रदान बढ़ेगा। इधर कई वर्षों में कश्मीर के सिल्क का निर्यात 500 करोड़ के आसपास था लजो लगातार घट रहा था, लेकिन इस निर्णय के बाद आपसी सामंजस्य से वहां का उद्योग बढेगा।

BY- Mahesh Jaiswal

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