चीन में आएंगे भारतीय कालीन उद्यमियों के अच्छे दिन

चीन में आएंगे भारतीय कालीन उद्यमियों के अच्छे दिन

Sarveshwari Mishra | Publish: Feb, 15 2018 03:03:06 PM (IST) Bhadohi, Uttar Pradesh, India

भारत सरकार के सहयोग से खुलेगा वेयरहाऊस

भदोही. विदेशी बाजारों में भारतीय कालीन उद्दमियों के अच्छे दिन आने वाले हैं। अब जल्द ही चाइना में भारतीय कालीनों का दबदबा देखने को मिलेगा। इसके लिए भारत सरकार के सहयोग से कालीन निर्यात को बढ़ावा देने के लिए चीन में जल्द ही एक वेयरहाऊस खुलेगा।

 

 

इसके बारे में कपड़ा मंत्रालय के अधीन कालीन निर्यात सम्वर्धन परिषद के चेयरमैन महावीर शर्मा ने भदोही में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में बताया कि चाइना के ईयू शहर में एक वेयर हाउस खोलने की तैयारी है जिसके लिए सरकार के सहयोग से लगभग सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गयी है। इससे भारत का कालीने निर्यात दो हजार करोड़ तक बढ़ सकता है। वहां वेयर हाउस बनने से निर्यातक अपना माल रख सकेंगे और मार्केटिंग कर सकेंगे। इसके लिए परिषद ने चैन में एक कम्पनी भी रजिस्टर्ड कराई है जो वहां पर निर्यातकों के उत्पाद हो रखेगी जहां से निर्यातक खुद भी अपने माल आयातक को दे सकेगी और परिषद भी निर्यातकों के उत्पादों की मार्केटिंग कराएगी।

 

 

इससे छोटे निर्यातकों को काफी फायदा होगा। उन्होंने कहा कि चाइना में ड्यूटी व वैट मिलाकर 34 फीसदी है जिसे कम कराने का प्रयास हो रहा है। चाइना में कुल पांच फेयर आयोजित होते हैं जिसमे भारत के काफी निर्यातक भाग लेते हैं। इस वेयरहाउस बन जाने से वह अपने उत्पादों को वहां रख सकेंगे जिससे बार बार उत्पाद चाइना से इंडिया वापस न लेना पड़े और वराह भर निर्यातक अपने उत्पाद की वहां मार्केटिंग कर सके। उन्होने बताया की परिषद ऐसे देशों पर फोकस करने जा रही है जहां से हमारे उत्पाद को रिएक्सपोर्ट किया जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार हो नए देशों में कालीन निर्यात को बढ़ावा देने के लिए 15 नए प्रपोजल दिए गए हैं।

 

 

साथ ही बताया कि परिषद कालीन के पॉल्यूशन फ्री विषय पर एक रिपोर्ट तैयार करा रही है जिसमें आयातकों को बताया जा सके कि हमारा उत्पाद पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल है। उद्योग में महिला बुनकर को ट्रेनिंग देने, कालीन पर पांच फीसदी जीएसटी की मांग के साथ ड्रा बैक समाप्त हो के कब बाद आरओएसएल स्कीम के तहत कालीन उद्योग को शामिल कर इसका लाभ मिलने से ड्रा बैक का नुकसान काफी हद तक कम हो जाएगा। श्री शर्मा ने कहा कि हस्तनिर्मित कालीन को मशीन निर्मित कालीनों से कड़ी टक्कर मिल रही है।

 

 

इसका मुकाबला करने के लिए सभी को मिलकर दुनिया के तमाम देशों को बताना होगा कि हस्तनिर्मित कालीन उत्पाद ही नहीं बल्कि एक कला है और इसे कला के रूप में देखा जाना चाहिए। इससे इस उद्योग से ताकत मिलेगी। इस दौरान परिषद के उपाध्यक्ष सिद्धनाथ सिंह, संदीप कटारिया, उमेश गुप्ता, अब्दुल रब, रजा खान, जफर हुसैनी सहित परिषद अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

By- Mahesh Jaiswal

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