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रबी सीजन : मांग से आधा मिला यूरिया-डीएपी, फिर भी नहीं बिका

locationभरतपुरPublished: Nov 14, 2022 11:55:10 am

Submitted by:

Gyan Prakash Sharma

विक्रेताओं के यहां ४९२६ एमटी खाद व १०३८ एमटी डीएपी उपलब्ध

रबी सीजन : मांग से आधा मिला यूरिया-डीएपी, फिर भी नहीं बिका
रबी सीजन : मांग से आधा मिला यूरिया-डीएपी, फिर भी नहीं बिका
भरतपुर . जिले में रबी फसल बुवाई के सीजन में मांग की तुलना में आधा यूरिया और डीएपी ही उपलब्ध हुआ। इसके बाद भी यह दुकानों पर रखा रह गया। वर्तमान की बात करें तो विक्रेताओं के यहां यूरिया ४९२६.४६ मीट्रिक टन (एमटी) व डीएपी १०३८.७४ एमटी उपलब्ध है।
कृषि विभाग के अनुसार जिले में लाइसेंस वाले उर्वरक विक्रेताओं की संख्या ८०० से अधिक है। यह संख्या भरतपुर शहर में करीब १५ है। जिले में खाद की आपूर्ति करने के लिए सरकार से अक्टूबर व सितम्बर में ३० हजार एमटी यूरिया व २२ हजार एमटी डीएपी की मांग की गई थी, लेकिन १४ हजार ५६२. ३४ एमटी यूरिया और १० हजार २१८.६१२ एमटी डीएपी ही मिली। ऐसे में यह मांग के अनुसार करीब आधा स्टॉक ही ही है। दूसरी ओर, बिक्री की बात करें तो जिले में सितम्बर-अक्टूबर माह के दौरान उर्वरक विक्रेताओं के यहां १४५६२ एमटी यूरिया और ११ हजार एमटी डीएपी उपलब्ध कराया गया है, जिसमें से ९६३५.८८ एमटी यूरिया और ९१८०.५३८ एमटी डीएपी की बिक्री हुईहै, बाकी बचा हुआहै। कृषि विभाग के सूत्रों के अनुसार कभी-कभी किसानों ककी जरूरत के लिहाज से स्टॉक नहीं होता है तो खाद की किल्लत हो जाती है। कुछ क्षेत्रों में ज्यादा हैक्टेयर में एक साथ बुवाई शुरू होती है तो खाद की किल्लत का सामना करना पड़ता है, लेकिन ज्यादातर मौकों पर खाद उपलब्धहो ही जाता है।
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डीएपी का विकल्प हो सकता है एसएसपी
कृषि विभाग के अनुसार सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) डीएपी का विकल्प हो सकता है, क्योंकि यह एक फॉस्फोरस युक्त उर्वरक है, जिसमें १६ प्रतिशत फॉस्फोरस एवं ११ प्रतिशत सल्फर की मात्रा पाई जाती है। यह डीएपी की अपेक्षा सस्ता है और बाजार में आसानी से उपलब्धहै।
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अब तक १५ के खिलाफ कार्रवाई
सरकार की ओर से २६६.५० रुपए प्रति कट्टा यूरिया एवं १३५० प्रति कट्टा डीएपी की कीमत तय की गई है। इससे अधिक कीमत में बेचने वाले जिले के १५ विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की गई। जिले में नवम्बर माह में २२ हजार एमटी उर्वरक की जरूरत है। सरकार से २० हजार एमटी यूरिया व दो हजार एमटी डीएपी की मांग की गई है।
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इसलिए हो गई किल्लत
सूत्रों का कहना है कि गत वर्ष के अनुसार इस वर्ष भी ३.९२ लाख हैक्टेयर में फसलों की बुवाई की जा रही है, जिनमें मुख्य फसलें सरसों, गेहूं व चना हैं। इस वर्ष मौसम की स्थिति के अनुसार सरसों एवं गेहूं की बुवाई करीब-करीब साथ ही हुई है। सितम्बर माह में बुवाई के समय यकायक इनकी डिमांड बढ़ी, लेकिन बारिश होने के कारण समय पर बुवाई नहीं हुई और यह मांग घट गई। जिले के ८०० उर्वरक विक्रेताओं के पास फिलहाल उर्वरक उपलब्ध है। इस वर्ष जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग के माध्यम से समय पर यूरिया एवं एसएसपी उपलब्ध कराकर सरसों की फसल की बुवाई का कार्य किया गया है।
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