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बधाई नहीं उगाही : बेटा हो तो एक हजार, बेटी पर परिजनों को देने पड़ रहे 500 रुपए

- पैसे नहीं देने पर मिलती है दुत्कार

भरतपुर

Published: February 27, 2022 09:50:15 am

भरतपुर . जिले के सबसे बड़े जनाना व संभाग के सबसे बड़े आरबीएम अस्पताल में जांच के नाम पर दलाली की शिकायत अभी थमी भी नहीं है कि अब जनाना अस्पताल में बेटा-बेटी के जन्म पर बधाई के नाम पर उगाही का खेल सामने आया है। यह खेल यहां लंबे समय से चल रहा है।
उगाही के इस खेल को रोकने की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन, जनाना अस्पताल प्रशासन व जिला प्रशासन की है, लेकिन जिम्मेदारों ने कार्रवाई की बजाय भ्रष्टाचार के इस सिस्टम से मुंह मोड़ लिया है। इससे पहले भी जनाना व आरबीएम अस्पताल भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की नजर में आ चुके हैं। यहां समय-समय पर कार्रवाई भी होती रही है, लेकिन अब भी मरीजों से लूट कम नहीं हो रही है। यही कारण है कि कार्रवाई के अभाव में इस सिस्टम को चलाने वालों के भी हौसले बुलंद हो चले हैं। आश्चर्य की बात यह है कि ऐसा हाल प्रदेश के उस जिले में हैं, जहां दो कैबीनेट मंत्री समेत पांच मंत्री हैं। इसके बाद भी व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हो पा रहा है।
बधाई नहीं उगाही : बेटा हो तो एक हजार, बेटी पर परिजनों को देने पड़ रहे 500 रुपए
बधाई नहीं उगाही : बेटा हो तो एक हजार, बेटी पर परिजनों को देने पड़ रहे 500 रुपए
बख्शीस के नाम पर ढीली कर रहे जेब

सरकारी अस्पताल में मुफ्त में डिलीवरी होती है। इसके लिए राज्य सरकार से लाखों रुपए का फंड मिलता है। यहां के स्टाफ ने लोगों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए बधाई शब्द का मतलब ही बदल दिया है। स्टाफ के कुछ लोग, इनमें सफाई कर्मचारी से लेकर सुरक्षा गार्ड भी शामिल हैं। बेटे-बेटी होने पर 500 से 1000 रुपए तक बधाई मांगी जाती हैं। दे दो तो दुआओं के साथ सेवा चाकरी में कमी नहीं छोड़ते, नहीं दो तो बुलाने पर भी घंटों इंतजार कराते हैं। शनिवार को राजस्थान पत्रिका ने जब ऐसी शिकायतों को लेकर पड़ताल की तो रोचक तथ्य निकल कर सामने आए, जो कि अस्पताल प्रशासन से लेकर जिम्मेदारों को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। जननी सुरक्षा योजना में सरकार प्रसूताओं को अस्पताल बुलाने के लिए लाखों लुटा रही है, लेकिन बख्शीस के रूप में इसे जनता की जेब से निकलवाने का काम कर्मचारी कर रहे हैं। सरकार से पगार पाने वाले कर्मचारियों की ओर से खुलेआम महिला अस्पताल में बच्चों के जन्म के बाद बख्शीस मांगी जाती है। जनाना अस्पताल में बेटा होने पर खुशी में 1100 रुपए तो बेटी के पैदा होने पर 500 रुपए मांगे जाते हैं। इसके बाद में सौदेबाजी के बाद जितने में सौदा पट जाए वो अच्छा। अगर तीमारदार इनकी मुराद पूरी नहीं करता है तो जच्चा एवं बच्चा की देखभाल में कंजूसी करने से यहां के कर्मचारी गुरेज नहीं करते।
हर दिन होती हैं 30 से 35 डिलीवरी, हर माह एक हजार

जनाना अस्पताल में रोज 30 से 35 डिलीवरी होती है। यहां हर माह करीब एक हजार डिलीवरी हो जाती हैं। वर्षभर में करीब 11-12 हजार डिलीवरी होती हैं। गर्भवती महिलाओं का सबसे पहले काउंटर पर पंजीयन कराना होता है। फिर डॉक्टर परीक्षण करते हैं। जरूरी होने पर पीएनसी वार्ड में भर्ती कर देते हैं। यदि महिला को दर्द शुरू हो जाए तो लेबर रूम में डॉक्टर जांच करते हैं कि नार्मल डिलीवरी होगी या सिजेरियन। सिजेरियन वाली प्रसूताओं को पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में भर्ती किया जाता है। नॉर्मल डिलीवरी के 48 घंटे बाद छुट्टी कर दी जाती है। सिजेरियन होने पर तीन दिन में छुट्टी कर दी जाती है।
जिसने की शिकायत, उसकी बढ़ी परेशानी

जनाना अस्पताल में बेटा-बेटी जन्म पर बधाई के नाम पर उगाही का खेल इस तरह हावी हो चुका है कि इस सिस्टम ने पूरे अस्पताल प्रबंधन को जकड़ रखा है। यदि किसी महिला के परिजन की ओर से शिकायत कर दी जाती है तो उन्हें ऑपरेशन से लेकर नॉर्मल डिलीवरी की प्रक्रिया में कभी दस्तावेज तो कभी दवाइयां बाहर से लाने को मजबूर किया जाता है। बात यहां पर ही खत्म नहीं होती है, रुपए नहीं देने पर उन्हें मिलने वाले योजनाओं के लाभ को लेकर दस्तावेज अधूरे छोड़ दिए जाते हैं। ऐसा ही सिस्टम जननी सुरक्षा योजना के तहत मिलने वाले लाभ व सिजेरियन को लेकर चल रहा है।
केस नंबर एक

- नीरज पत्नी अशोक सलेमपुर छौंकरवाड़ा को जनाना अस्पताल में भर्ती कराया गया। डिलीवरी के दौरान पुत्री का जन्म हुआ। बेटी के जन्म पर मिठाई के रूप में 300 रुपए लिए गए। साथ ही स्ट्रेचर से लेकर आने वाी महिला कर्मचारी को 50 रुपए देने पड़े।
केस नंबर दो

-भरतपुर के मालोनी गांव की प्रसूता ज्योति पत्नी पुष्पेंद्र ने बताया कि नॉर्मल डिलीवरी के दौरान स्टाफ ने 500 रुपए मांगे थे। ऐसे में उन्हें रुपए देने पड़े।

केस नंबर तीन
सीमा पत्नी पुरुषोत्तम निवासी बहनेरा ने बताया कि पुत्री की डिलीवरी के दौरान 300 रुपए दिए गए। साथ ही सफाई व स्ट्रेचर के 150 रुपए अलग से ले लिए।

केस नंंबर चार

-गुलाल कुंड निवासी योगिता ने बताया कि डिलीवरी के दौरान 700 रुपए दिए गए, पहले रुपए नहीं दिए तो व्यवहार भी ठीक नहीं था। रुपए देते ही सभी बहुत अच्छा व्यवहार करने लगे।
केस नंबर पांच

- रवीना पत्नी प्रभुदयाल की शनिवार सुबह आठ बजे डिलीवरी हुई। लेबर रूम में 600 रुपए लिए गए। सास कमला ने बताया कि सफाई के लिए 100 रुपए लिए गए।
इनका कहना है

अस्पताल में इस तरह की कोई शिकायत सामने नहीं आई है। हम भी साफ-सुथरी व्यवस्था के पक्ष में हैं। पैसे के लेन-देन की शिकायत कतई नहीं मिली है। यदि कोई लिखित में शिकायत करता है तो निश्चित रूप से स्टाफ को वहां से हटाकर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. रूपेन्द्र झा, प्रभारी जनाना अस्पताल भरतपुर

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