विवाद: सीएमएचओ ने एसीएमएचओ की पत्नी को भेजा नोटिस, गंभीर आरोप लगाए तो एसीएमएचओ एपीओ

-लंबे समय से चिकित्सा महकमे में चली आ रही खींचतान आई सामने, पत्नी को नोटिस मिलने के बाद एसीएमएचओ ने सीएमएचओ पर लगा दिए गंभीर आरोप, कुछ देर बाद ही भेजा एपीओ आदेश

By: Meghshyam Parashar

Published: 18 Oct 2020, 03:33 PM IST

भरतपुर. चिकित्सा महकमे में लंबे समय से चली आ रही खींचतान आखिर शनिवार को सामने आ गई। शुक्रवार को सीएमएचओ डॉ. कप्तान सिंह चौधरी ने ऋग्वेद हॉस्पीटल की संचालिका डॉ. ऋतु अहलावत (कासिनवार) को कार्यालय में उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों एवं वेतन भुगतान के प्रमाणीकरण के संबंध में नोटिस जारी कर दिया। शनिवार दोपहर डॉ. ऋतु अहलावत के पति अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनीष चौधरी ने सोशल मीडिया पर सीएमएचओ पर गंभीर आरोप भी लगा दिए। मामला बढ़ता दिखा तो कुछ घंटे बाद ही सोशल मीडिया पर एसीएमएचओ ने लिख दिया कि सबकुछ गलतफहमी में भेज दिया गया था। मेरा बयान गलत चला गया। इसे अन्यथा नहीं लें। हालांकि इसके कुछ देर बाद ही सीएमएचओ ने एसीएमएचओ डॉ. मनीष चौधरी को भी नोटिस जारी कर एपीओ कर दिया। साथ ही उन्हें शनिवार दोपहर बाद कार्यमुक्त कर उपस्थिति अग्रिम पदस्थापन के लिए निदेशक (जन स्वास्थय) चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं राजस्थान जयपुर को प्रस्तुत करने के आदेश दिए। उल्लेखनीय है कि चिकित्सा विभाग में पिछले लंबे समय से खींचतान चली आ रही है। जहां अब सीएमएचओ व एसीएमएचओ के बीच खींचतान सामने आ चुकी है तो उससे कुछ दिन पहले मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य व आरबीएम अस्पताल के अधीक्षक के बीच भी फूट सामने आई थी। चूंकि मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने आरबीएम अस्पताल से ट्रॉली पुलर व गार्डों को हटा दिया था। इससे अस्पताल की व्यवस्था काफी दिन तक खराब रही थी।

आखिर दो नोटिसों में सीएमएचओ ने क्या लिखा

-सीएमएचओ डॉ. कप्तान सिंह चौधरी ने पहला नोटिस 16 अक्टूबर को ऋग्वेद हॉस्पीटल की संचालिका डॉ. ऋतु अहलावत को भेजा है। इसमें लिखा है कि कार्यालय में प्रस्तुत दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद पाया गया है कि सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन ऑफ एडिशनल क्वालिफिकेशन (एस) यू/एस 26 ऑफ दी इंडियन मेडिकल कौंसिल एक्ट 1956 सर्टिफिकेट नंबर 10-8831 22 जुलाई 2010 जो जारी किया गया है इसमें रजिस्ट्रेशन नंबर 2007103536 दिनांक 11 अक्टूबर 2007 महाराष्ट्र मेडिकल कौंसिल, जिसमें अतिरिक्त योग्यता डिप्लोमा ओबीजी, सीपीएस मुंबई 2009 इसकी परीक्षा माह अक्टूबर 2009 में हुई थी। इसका परिणाम 27 नवंबर 2009 को जारी हुआ था एवं उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार माह नवंबर 2007 से अगस्त 2008 तक चिकित्सा अधिकारी के रूप में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रुदावल पर कार्यरत रहते हुए फिक्स मानदेय का भुगतान प्राप्त किया गया है। जबकि दस्तावेजों के अनुसार वर्ष 2007 से 2009 तक इस अवधि में सीपीएस कोर्स का डिप्लोमा प्राप्ता किया है तो स्पष्ट करें। इससे स्पष्ट है कि डिप्लोमा कूटरचित तरीके से प्राप्त किया गया है। एक सोनोग्राफी मशीन सेंटर ऋग्वेद हॉस्पीटल इंदिरा नगर पर संचालित है। इसके रजिस्ट्रेशन के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों में जो प्रमाण पत्र लगाया है, उसके समर्थन में एक शपथ पत्र भी प्रस्तुत किया है। इसके बिंदू संख्या दो में अपने को 2009 में सीपीएस मुंबई से डीजीओ किया बताया है। जबकि आज की तारीख तक राजस्थान में सीपीएस की ओर से जारी प्रमाण पत्र मान्य नहीं है। इससे स्पष्ट है कि कूटरचित दस्तावेजों की रचना कर अधिकारियों को गुमराह किया गया है।

-सीएमएचओ ने दूसरा नोटिस शनिवार को दोपहर बाद अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को दिया है। इसमें उन्हें एपीओ किया गया है। पत्र में लिखा है कि सात अक्टूबर 2020 को जिला कलक्टर के निर्देशन में हुई बैठक में निर्देशों की पालना में डिप्थीरिया के आउटब्रेक के लिए आपका मुख्यालय कामां करते हुए निर्देशित किया गया था। निर्देशों के तहत काम नहीं होने व दैनिक रिपोर्ट प्राप्त नहीं होने पर जिला कलक्टर की ओर से 14 अक्टूबर को दूरभाष पर दिए गए निर्देशों की पालना में इस कृत्य के कारण स्पष्टीकरण चाहा गया था। जिला कलक्टर के आदेशों की अवहेलना एवं राजकार्य में उदासीनता बरतने के कारण आपको 17 अक्टूबर दोपहर बाद कार्य मुक्त कर आदेश दिए जाते हं कि उपस्थिति अग्रिम पदस्थापन के लिए निदेशक जन स्वास्थ्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं राजस्थान जयपुर को प्रस्तुत करें।

एसीएमएचओ ने सोशल मीडिया पर ये लिखा

एसीएमएचओ डॉ. मनीष चौधरी ने एक वाट्सग्रुप पर सुबह 11 बजकर 53 मिनट पर सीएमएचओ के नोटिस की प्रति के साथ लिखा कि जिला कलक्ट व एसडीएम ने नियमानुसार सोनोग्राफी का रजिस्ट्रेशन किया है। दस्तावेज संलग्र है। इसको पांच लाख चाहिए इसलिए पंगा कर रहा है। सीएमएचओ डॉ. कप्तान सिंह सरकारी मुलाजिम है। इनको नॉन प्रैक्टिस अलाउंस नियमानुसार मिलता है। बावजूद इसके यह अपने घर पर नर्सिंग होम चलाते हैं। मेडिकल की दुकान चलाते हैं। अस्पताल में इंडोर मरीज भर्ती करते हैं। जबकि इनके पास कोई लाइसेंस नहीं किसी तरह का नहीं है। इसके काफी बात लिखने के बाद एफआइआर दर्ज कराने की बात तक लिखी है। साथ ही नीचे डॉ. ऋतु चौधरी का नाम लिखा है। करीब तीन घंटे बाद इसी ग्रुप पर पूर्व के मैसेज को गलतफहमी में भेजना बता दिया।


-कुछ गलतफहमी हो गई थी। बाकी पूर्व में जो मैसेज गलत हो गया था। वह मैंने वापस कर दिया था। छिटपुट विवाद था। अब राजीनामा हो गया है।

डॉ. मनीष चौधरी
अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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