आजादी के बाद भी सपने अधूरे

आजादी के बाद भी सपने अधूरे
bharatpur

Mukesh Kumar Sharma | Updated: 11 Aug 2015, 11:53:00 PM (IST) Bharatpur, Rajasthan, India

कॉलेज की पढाई के दौरान अपनी धरती मां को आजाद कराने की हसरत लिए स्वतंत्रता आंदोलन का हिस्सा

बयाना।कॉलेज की पढाई के दौरान अपनी धरती मां को आजाद कराने की हसरत लिए स्वतंत्रता आंदोलन का हिस्सा बनने वाले गोपालराम भावरा का शरीर आज बेशक उतना चुस्त नहीं है, लेकिन उनकी आंखों में आंदोलन की चमक साफ नजर आती है। बुलंद आवाज के धनी गोपालराम जुनूनी लड़ाई के किस्से सुनाते हुए खो से जाते हैं।


23 मार्च 1930 को कस्बा निवासी पंडित रामचंद भावरा के घर जन्मे गोपालराम घर के सबसे बड़े बेटे हैं। वर्तमान में 86 वर्ष होने के बाद भी उनका जज्बा कइयों को प्रेरणा देता है। स्कूली शिक्षा करने के बाद भरतपुर के एमएसजे कॉलेज आकर उन्होंने प्रवेश ले लिया।


कई लोगों के सम्पर्क में आने के बाद वे आजादी के दीवानों की टोली का हिस्सा बन गए। उन्होंने बताया कि कॉलेज में प्रवेश के समय सामईखेड़ा निवासी मित्र केशवदेव शर्मा ने उन्हें सशस्त्र क्रांति का इतिहास पुस्तक पढ़ने को दी, उसे पढ़ने के दौरान ही आजादी की लड़ाई में पूरी सक्रियता से कार्य करने के बारे में सोच लिया था।


उसके बाद हैदराबाद और करांची की दो बार यात्रा की और आन्दोलन कारियों के लगातार सम्पर्क मे रहकर आगे कदम बढाए।


भावरा आजादी की लड़ाई के दौरान सुभाषचंद बोस से सर्वाधिक प्रभावित रहे। बेगार विरोधी आन्दोलन में धारा 144 को तोड़ते हुए गिरफ्तार हुए और जेल की यात्रा की। भावरा हिंदी के साथ ही संस्कृत, अंग्र्रेजी व रसियन भाषा के अच्छे जानकार हैं।


65 साल बाद पूरी हुई हसरत

स्वतंत्रता सेनानी गोपालराम भावरा ने बताया कि दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र के रूप में एक बार उनके साथी राष्ट्रपति भवन देखने जा रहे थे, तो उनसे भी चलने को कहा। वर्ष 1950 में उन्होंने अपने साथियों से कहा कि राष्ट्रपति भवन तभी जाउंगा जब वहां से बुलावा आएगा। इस बार जब राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की ओर से उन्हें बुलावा पत्र मिला तो वे 6 5 साल पुरानी हसरत को पूरा करने के लिए दिल्ली राष्ट्रपति भवन गए। जहां राष्ट्रपति ने दुपट्टा, शॉल व ट्रांजिस्टर भेंट किया।

आज भी है कसक


भावरा ने बताया कि 15 अगस्त 1947 के दिन वो भरतपुर मे ही थे, उस दिन उन्होंने आजाद भारत और उसकी व्यवस्थाओं को लेकर जो सपने देखे थे वे आज भी अधूरे हैँ। उन्होंने कहा कि देश में भ्रष्टाचार नहीं होने ,किसी पर शासन की ओर से जुल्म नहीं होने व सामान अधिकार मिलने की बातें आजादी के बाद भी पूरी नहीं हो सकी है।

युवा समझे अपनी जिम्मेदारी


युवा पीढ़ी को देश के बारे में स्वतंत्र चिंतन करना चाहिए। उस चिंतन में हम अपने स्तर पर देश के लिए क्या कर सकते है, इस पर विचार करें। जब तक सभी लोग देश को लेकर चिंतन नहीं करेंगे, आजादी के दीवानों के सपने अधूरे ही रहेंगे।
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