कौओं की मौत के बाद घना प्रशासन सतर्क, पशुपालन विभाग ने गठित की आरआरटी टीमें

प्रदेश के झालावाड़ जिले में एवियन इनफ्लुएंजा (बडर््स फ्लू) से कौओं की मौत के बाद यहां केवलादेव राष्ट्रीय पक्षी प्रशासन के साथ पशुपालन विभाग की टीमें भी सतर्क बनी हुई हैं।

By: rohit sharma

Published: 06 Jan 2021, 02:21 AM IST

भरतपुर. प्रदेश के झालावाड़ जिले में एवियन इनफ्लुएंजा (बडर््स फ्लू) से कौओं की मौत के बाद यहां केवलादेव राष्ट्रीय पक्षी प्रशासन के साथ पशुपालन विभाग की टीमें भी सतर्क बनी हुई हैं। उधर, पशुपालन विभाग ने मामले में त्रिस्तरीय टीम गठित की हैं और सभी को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। जिला स्तर पर एक कंट्रोल रूम भी मनाया गया है। वहीं, मुर्गी पालन करने वाले लोगों का सर्वे शुरू कर दिया है। जिससे अगर कोई मामला सामने आए तो तुरंत काबू पा लिया जाए। गौरतलब रहे कि प्रदेश में बडर््स फ्लू फैलने के बाद राज्य सरकार की ओर से मामले में एडवाइजरी जारी कर पक्षियों पर नजर बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

झालावाड़ जिले में सैकड़ों कौओं को मौत हो चुकी है। एवियन इनफ्लुएंजा के केवलादेव राष्ट्रीय पक्षी उद्यान के लिए भी खतरनाक हो सकता है। घना में इस समय सीजन चल रहा है और सैकड़ों की संख्या में स्थानीय व प्रवासी पक्षी प्रवास किए हुए हैं। उधर, राज्य सरकार ने इसके खतरे को देखते हुए प्रदेश भर में एडवाइजरी जारी की है। उद्यान प्रशासन ने बताया कि मामले में एडवाइजरी जारी हुई है। जिसके तहत पशु पालन विभाग की टीम पक्षियों की हरकतों पर नजर रखी हुई हैं। टीम ने घना में भ्रमण किया है और अभी तक सामान्य स्थिति बनी हुई है। वहीं, पक्षी विशेषज्ञों की मानें तो इस इनफ्लुएंजा से बचाव के लिए पार्क प्रशासन के साथ ही स्थानीय प्रशासन को भी अलर्ट रहकर आसपास के माहौल पर पूरी नजर रखनी होगी। पूर्व रेंजर अबरार अहमद भोलू ने बताया कि एवियन इनफ्लुएंजा कौवों के माध्यम से अन्य पक्षियों में भी फैल सकता है। लेकिन फिलहाल केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में किसी तरह का कोई खतरा नहीं है। यहां पर स्थिति सामान्य बनी हुई है। आसपास के गांव के साथ घना के कर्मचारियों को प्रवासी पक्षियों पर नजर रखने के साथ ही कौवों पर भी नजर रखनी होगी।


जिले को 14 भागों में बांटा, टीम गठित

वहीं, पशुपालन विभाग ने जिले को 14 ब्लॉक में बांटकर पक्षियों की हरकतों पर निगरानी शुरू कर दी है। पशुपालन विभाग के उपनिदेशक (पशुधन) डॉ.प्रेम कुमार कक्कड़ ने बताया कि जिले में रेपिड रेस्पांस टीम, मुख्यालय पर कंट्रोल और प्रत्येक पशुपालन विभाग के हॉस्पीटल को इलाके में नजर रखने के लिए कहा है।


जिले के मुर्गी फॉर्मों में का होगा सर्वे

उधर, बड्र्स फ्लू की आशंका को लेकर जिले भर के मुर्गी फॉर्मों का भी सर्वे किया जाएगा। जिले में करीब 100 से अधिक मुर्गी फार्म संचालित है। पशुपालन विभाग की ओर से इन मुर्गी फार्म की जांच की जाएगी। जिले में सबसे अधिक फार्म कामां व पहाड़ी इलाके में संचालित हैं। इन सभी सर्वे किया जाएगा।

- घना में पशुपालन विभाग की टीमों ने जांच की है, फिलहाल ऐसा कुछ नहीं मिला है। घना की टीमें नजर रखे हुए हैं। इस समय सीजन होने से अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।
- अभिषेक शर्मा, एसीएफ केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान

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