अब निगम प्रशासन की कमियां निकालने निकले मेयर व पार्षद, और सामने आया ऐसा सच...

-आश्रय स्थल में गोवंश को पानी न हरा चारा, भामाशाहों के भूसा दान करने का ही रिकार्ड गायब
-नौंह कचरा घर जा रही ट्रेक्टर ट्रॉली में मिली झाडिय़ां
-मेयर ने सीएसआई को लगाई फटकार

By: Meghshyam Parashar

Published: 23 May 2020, 07:05 PM IST

भरतपुर. शहर में विकास का जिम्मा संभालने वाली शहरी सरकार अब खुद ही व्यवस्थाओं का आंकलन व उसका सच जानने के लिए निकली है। शनिवार को जब मेयर अभिजीत कुमार के नेतृत्व में टीम ने सुभाष नगर स्थित गोवंश आश्रय स्थल का निरीक्षण किया तो हकीकत निकल कर सामने आई। वहां गोवंश के लिए पानी तक का माकूल इंतजाम नहीं था, बल्कि हरा चारा तक उपलब्ध नहीं कराया गया था। सिर्फ भूसे का ढेर लगा हुआ था। भामाशाहों की ओर से गोवंश के लिए चारा भी दान किया जाता रहा है, लेकिन उसका कोई रिकॉर्ड नहीं था। गोवंश को छोडऩे से लेकर किसानों के लाए गोवंश तक का रिकॉर्ड संधारित नहीं था। ऐसे में मेयर ने रजिस्टर में नोट लगाकर प्रकरण की जांच कराने का निर्णय लिया है। उल्लेखनीय है कि नगर निगम में पिछले एक माह से चल रहे विवाद का खुलासा राजस्थान पत्रिका ने 22 मई के अंक में किया था। इसके बाद 22 मई को पार्षदों ने बैठक कर विरोध व्यक्त किया था। तब जाकर कमेटी बनाकर प्रकरणों की जांच कराने का निर्णय लिया गया था।
सुबह करीब 11 बजे मेयर अभिजीत कुमार व डिप्टी मेयर गिरीश चौधरी दो दर्जन पार्षदों के साथ सुभाष नगर स्थित गोवंश आश्रय स्थल व निर्माणाधीन इकरन गोशाला का अवलोकन करने पहुंचे। सुभाष नगर की गोशाला में गोवंश के रहने की स्थिति, छाया, पानी की उचित व्यवस्था नहीं होने पर रोष व्यक्त किया। इसमें सामने आया कि भामाशाहों की ओर से भूसा व हरा चारा दान करने डाला जाता है। इसका कोई भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं था। साथ ही नगर निगम से हरा चारा नहीं भेजा जाता है, सिर्फ भूसा ही कभी-कभी आता है जो कि न के बराबर मिला। इस पर मेयर ने गोशाला प्रभारी को आगामी दिवस में सारा रिकॉर्ड संधारित कर निगम कार्यालय में उपस्थित होने के लिए निर्देश दिए। नोंह पुलिया पर पहुंच कर नगर निगम के ठेकेदार की कचरा परिवहन की ट्रॉली को रोककर चैक किया। इसमें पाया गया कि कचरे के स्थान पर बबूल की झाडिय़ा उसमें जा रही थी। कचरा परिवहन के वाहनों की जांच की तो पाया कि टेंडर की शर्तों के अनुसार अनुपात में कचरा भरा हुआ नहीं था। उनके पास निगम का टोकन तक नहीं था। इकरन गोशाला में जाकर देखा तो वहां कार्य पड़ा हुआ था। गर्मी के मौसम में सरकारी कर्मचारियों को बैठने व बिजली तक की व्यवस्था नहीं थी। इससे बीमार कर्मचारी आए दिन अस्पताल जा रहे हैं। निगम का छप्पर भी सही नहीं था। ऐसे में छाया का स्थायी इंतजाम करने के निर्देश दिए। गोशाला में गोवंश को चारा व दाना रखने के लिए गोदाम व पशुओं के लिए छाया की व्यवस्था नहीं होने पर आश्रय स्थल व गोशाला की निगरानी के लिए पार्षद कपिल फौजदार, योगेश चौधरी, समंदर सिंह व मोतीसिंह को कमेटी में शामिल किया गया। निरीक्षण में पार्षद मुकेश कुमार पप्पू, सुरजीत सिंह, चंदा पंडा, रूपेंद्र सिंह, सुरेश धर्मपुरा, नीरज सेवर, लालसिंह सेवर, प्रकाश सेवर, विजय सिंह भारती, रामेश्वर सैनी, अशोक लवानियां, गोविंद सिंह, वीरेंद्र कालू, देवेंद्र, किशनपाल आदि उपस्थित थे।

ये निरीक्षण नहीं...नाराजगी को परिणाम तक लाने की है कोशिश

नगर निगम के मेयर व पार्षदों का यह निरीक्षक पहली बार हुआ है। क्योंकि यह दौर खींचतान का है। ऐसे में मेयर व पार्षदों का एक गुट किसी भी तरह खामियों को सामने लाने की कोशिश में जुटा हुआ है। ताकि विकास कार्यों का दावा करने की उस मुहिम का सच सामने आ सके। चूंकि खास बात यह भी है कि सफाई निरीक्षक अनिल लाहौरा के एपीओ प्रकरण के बाद मामला अभी शांत भी नहीं हुआ है। ऐसे में यह विवाद फिर नई चुनौती खड़ा कर सकता है।

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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