कॉलेजों की घोषणा में की जल्दी, सुविधाओं में हो रही देरी

-जिले में नए राजकीय कॉलेजों में शिक्षकों का अभाव तो कहीं भवन ही नहीं बने

By: Meghshyam Parashar

Published: 01 Mar 2020, 10:27 PM IST

नदबई. प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए राजकीय महाविद्यालय की शुरुआत तो कर दी, लेकिन शैक्षणिक प्रक्रिया के दौरान पर्याप्त संसाधान, भवन अभाव सहित मूलभूत समस्याओं से विद्यार्थियों को प्रतिदिन जूझना पड़ रहा है। नदबई, नगर, पहाड़ी, उच्चैन व वैर मुख्यालय पर संचालित राजकीय विद्यालय की स्थिति जानने का प्रयास किया तो राजकीय महाविद्यालय में विद्यार्थी ही नही, बल्कि कार्यरत शिक्षकों की पीड़ा खुलकर सामने आ गई। नदबई मुख्यालय पर जून 2018 में राजकीय महाविद्यालय की शुरुआत हुई। इसमें 21 पद स्वीकृत होने के बावजूद महज चार कर्मचारियों के भरोसे राजकीय कॉलेज का संचालन हो रहा है। रिक्त पद में मनोविज्ञान, पेंटिंग व अर्थशास्त्र शिक्षक सहित अन्य श्रेणी के कर्मचारी शामिल है। दूसरी ओर संयुक्त शासन सचिव ने गांव बैलारा में राजकीय महाविद्यालय भवन निर्माण को लेकर डेढ़ साल पहले तीन बीघा जमीन की एनओसी जारी की, लेकिन बाद में कॉलेज प्रशासन की ओर से जमीन कम बताने पर भवन निर्माण की प्रक्रिया फाइल में अटक गई।

नगर: स्वीकृत पद 21 और कार्यरत सिर्फ छह

जून 2018 में नगर मुख्यालय पर राजकीय महाविद्यालय शुरू हुआ। इसमें प्रथम व द्वितीय वर्ष के 353 विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं। कॉलेज में स्वीकृत 21 पद के बावजूद सिर्फ छह कर्मचारी कार्यरत हैं। गत सत्र में प्राचार्य की गुजारिश पर निजी कॉलेज के शिक्षकों के सहयोग से 98 प्रतिशत परिणाम प्राप्त किया। इतना ही नहीं, देवनारायण योजना में 14 छात्राओं ने स्कूटी प्राप्त कर जिले में वर्चस्व बनाया, लेकिन इस सत्र में हिंदी, अंग्रेजी, इतिहास व चित्रकला के शिक्षक पद रिक्त होने के चलते विद्यार्थियों का पाठ्यक्रम पूरा नहीं हुआ।

उच्चैन: शिक्षक ही संभाल रहे चपरासी का जिम्मा

सितम्बर 2019 में उच्चैन मुख्यालय पर राजकीय महाविद्यालय की शुरुआत हुई, लेकिन कर्मचारियों के अभाव में शिक्षक ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बनकर महाविद्यालय में साफ-सफाई सहित अन्य व्यवस्था कर रहे है। कॉलेज में 19 पद स्वीकृत होने के बावजूद प्राचार्य सहित दो शिक्षक कार्यरत है। इतना ही नहीं एक मात्र शौचालय होने से छात्राओं को प्रतिदिन परेशानी से जूझना पड़ रहा है। इस सत्र में भूगोल, लोक प्रशासन, हिंदी, राजनीति शास्त्र, अंग्रेजी साहित्य के शिक्षक का पद रिक्त होने के चलते विद्यार्थियों का पाठ्यक्रम भी पूरा नहीं हुआ।

वैर: यहां प्रतिनियुक्ति वाले शिक्षकों के भरोसे पढ़ाई

अगस्त 19 से वैर मुख्यालय पर सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे राजकीय महाविद्यालय का संचालन हो रहा है। खास बात है कि महाविद्यालय में 99 विद्यार्थी शिक्षण कर रहे है, लेकिन सिर्फ दो कमरों में राजकीय महाविद्यालय संचालन होने व शौचालय का अभाव होने के चलते विद्यार्थियों को प्रतिदिन मूलभूत समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। विभाग की ओर से करीब एक पखवाड़े पहले दो शिक्षक डेपुटेशन पर नियुक्त कर पाठ्यक्रम पूर्ण करने का प्रयास किया, लेकिन अन्य विषय का पाठ्यक्रम पूर्ण नही होने पर विद्यार्थियों को भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है।

पहाड़ी: यहां प्राचार्य का भी पद है रिक्त

राजकीय महाविद्यालय पहाड़ी में करीब छह माह से प्राचार्य का पद रिक्त है। अगस्त 2019 में राजकीय महाविद्यालय की शुरुआत तो हुई, लेकिन कॉलेज में सिर्फ दो शिक्षकों की नियुक्ति की गई। इतिहास, उर्दू, राजनीति विज्ञान, हिंदी व अंग्रेजी शिक्षक का पद रिक्त होने के चलते विद्यार्थियों का पाठ्यक्रम पूरा नहीं हुआ। दूसरी ओर भामाशाह के सहयोग से फर्नीचर की व्यवस्था की गई।

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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