सावधान...शरीर के अंगों में खून और पानी को कम कर सकती है ठंड

- बढ़ रहे हैं चर्म के रोगी

By: Meghshyam Parashar

Published: 03 Jan 2020, 05:56 PM IST

भरतपुर.ठंड का प्रकोप इतना बढ़ गया है कि शरीर में नसें सिकुडऩे लगी हैं। इस ठंड में शरीर में खून का प्रवाह सामान्य ढंग से नहीं हो पाता है। अंगों तक खून, पानी और ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। खून का प्रवाह कम होने से जाइंट्स (जोड़ों) के दर्द में तेजी आती है। अगले एक सप्ताह राहत के आसार नहीं हैं। इसलिए, शहर वासियों की परेशानी और बढऩे जा रही है। मौसम विभाग के मुताबिक बुधवार को धूप निकलने के बाद कुछ हद तक राहत मिली, लेकिन सर्द हवाओं और पहाड़ी एरिया में लगातार हो रही बर्फबारी के कारण अधिकतम तापमान में कोई इजाफा नहीं होगा। डॉक्टर्सका मानना है कि सर्दियों में अगर शरीर का ताप 34-35 डिग्री से नीचे चला जाए तो उसे हाइपोथर्मिया कहते हैं। इसमें हाथ-पैर ठंडे हो जाते हैं, सांस लेने में तकलीफ होती है। हार्ट बीट बढ़ जाती है। बीपी कम हो जाता है। अगर शरीर का तापमान कम हो जाए तो मृत्यु भी हो सकती है। वे लोग हीटर का उपयोग कम करें, जिसे तुरंत ठंड में बाहर जाना है। अगर आपको लगातार गर्म वातावरण में ही रहना है तो हीटर का उपयोग करें, नहीं तो गर्म कपड़ों का इस्तेमाल करें। इसी से आपकी सेहत ठीक रहेगी। गर्म पेय में पानी, दूध, चार-कॉफी, सूप ले सकते हैं। नहाने के लिए गर्म पानी का प्रयोग करें।

ठंड के साथ लोगों को जकडऩे लगे चर्म के रोग

सर्दी से लोगों को चर्म रोगों की शिकायत बढ़ती जा रही है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन 100 से 125 मरीज चर्म के रोगों का उपचार कराने पहुंच रहे हैं, जबकि सामान्य दिनों में इनकी संख्या 30 से 40 प्रतिदिन रहती है। सर्दी तेज होते ही शरीर में तेलीय ग्रंथी का प्रभाव कम हो जाता है, इससे चर्म के विभिन्न रोग घेर लेते हैं। तेलीय ग्रंथी के कम होने से एग्जिमा, खुजली, लाल चकते, हाथ-पैरों की अंगुलियों में सूजन के साथ गलन से दर्द और ब्लड का आना, भूस जैसा फंगल इंफेक्शन, बालों में रूसी बढऩा आदि रोगों से लोग ग्रसित हो रहे हैं। ऐसे में इनकी संख्या अस्पताल में बढ़ रही है।

जटिल हो सकती है समस्या

इस मौसम में चिल ब्लैंस होना स्वाभिक है, जिससे अंगुलियों में सूजन व दर्द होता है। वहीं बालों में रूसी के साथ दर्द भी होने लग जाता है। इसके लिए मरीज दवाइयों के साथ बचाव के अन्य उपाय भी करें। नहीं तो ये समस्या आगे जटिल हो जाती है। बचाव के उपाय के तौर पर लोग नहाने के बाद शरीर पर एलोविरा व बेसलिन लगाएं। वहीं नारियल का तेल सिर व शरीर दोनों पर लगाएं। नहाते समय कम गर्म पानी का उपयोग करें और साबुन भी मेडिकेटेड इस्तमाल करें। चिल ब्लैंस यानि सूजन होने पर तापें नहीं बल्कि गुनगुने पानी में हाथ व पैरों की शिकाई करें। बालों के लिए नारियल तेल का उपयोग करें। वहीं चेहरे पर सूखेपन को दूर करने के लिए एलोविरा लोशन लगाएं और बालों में रूसी के लिए एंटी डेन्ड्रफ सैम्पू उपयोग में लें।

-सर्दी बढऩे के साथ चर्म की बीमारी संबंधी रोगी भी बढ़ रहे हैं। इन दिनों चर्म रोगी दवाइयों के साथ एलोविरा लोशन, नारियल का तेल, मेडिकेटेड साबुन से नहाना, बेसलिन आदि का उपयोग करें। राहत मिलेगी।नहीं तो ये समस्या जटिल हो जाती है।
डॉ. असित श्रीवास्तव, एसीएमएचओ

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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