scriptBharatpur Enchantment of the pen | कलम की करामात से संवर रहा जीवन | Patrika News

कलम की करामात से संवर रहा जीवन

- एक साल में 80 बच्चों ने छोड़ा कूड़ बीनना

भरतपुर

Published: December 31, 2021 07:41:06 pm

भरतपुर . घर में फाकाकशी के माहौल के बीच उनके सपने नन्हीं उम्र में ही बदरंग हो चले थे। खेल-खिलौने उनके जीवन का हिस्सा नहीं बनकर कंधों पर झोला और कचरे से जरूरी चीजें ढूंढ़ते कोमल हाथ उनका नसीब बन रहे थे। इस बीच अभावों की जिंदगी नन्हीं उम्र में बड़े तजुर्बे दे रही थी। कूड़े के ढेरों में खोते बचपन को देख स्वास्थ्य मंदिर संस्थान ने ऐसे बच्चों का जीवन संवारने की सुध ली। ऐसे बच्चों के अभिभावकों से समझाइश कर उन्हें संस्थान तक लाया गया। इस साल ऐसे 80 बच्चे कचरा बीनना छोड़कर हाथों में कलम थाम चुके हैं। अब कलम की करामात उन्हें समझ आने लगी है। यही वजह है कि वह प्रतिदिन प्रार्थना बोलते हुए शिक्षा से अपने जीवन को संवारने की राह पर हैं।
नन्हीं उम्र में कचरा बीनते देख संस्थान ने ऐसे बच्चों को शिक्षा से जोडऩे का मन बनाया। इसके लिए नया प्रकल्प 'खिलता बचपन, संवरता जीवन शुरू किया गया। संस्थान के लिए यह राह कतई आसान नहीं थी। वजह, पहले तो इनके माता-पिता इन्हें शिक्षा से जोडऩे को राजी ही नहीं थे। रोजी-रोटी के लोभ में अभिभावक इनसे कूड़ा बिचवाकर दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करने में मशगूल थे। एक बार नहीं बल्कि बार-बार ऐसे अभिभावकों को समझाया गया। साथ ही उन्हें यहभी बताया गया कि वह बच्चों को नहीं पढ़ाकर जीवन का कितना बड़ा गुनाह कर रहे हैं। ऐसे में रफ्ता-रफ्ता अभिभावक समझे और बच्चों को यहां तक भेजने के लिए राजी हुए। आज साफ-सुथरी हालत में बच्चों को पढ़ते देख उन्हें भी खासा सुकून मिल रहा है। संस्थान के अनुसार इस एक साल में ऐसे बच्चों में काफी सुधार देखने को मिला है। स्वास्थ्य मंदिर की ओर से ऐसे बच्चों को प्रतिदिन शिक्षा, भोजन और जरूरत की सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि ऐसे बच्चे अपने पुस्तैनी काम को छोड़कर शिक्षा से नाता जोड़ें। कबाड़ा बीनना छोड़ चुके ऐसे बच्चों में अब पढ़ाई के प्रति ललक जगी है। पढ़ाई के साथ-साथ ऐसे बच्चे कढ़ाई, बुनाई एवं फूल बनाने जैसे कामों से भी जुड़ रहे हैं। ताकि वह आत्मनिर्भर बन सकें। स्वास्थ्य मंदिर इस प्रोजेक्ट को भामाशाह के जरिए संचालित कर रहा है। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य ऐसे बच्चों को शिक्षा के साथ समाज की मुख्य धारा से जोडऩा है।
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