Bharatpur news: केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में ये क्या कर दिया...पक्षी छोड़ गए घोंसले

Bharatpur news: केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में ये क्या कर दिया...पक्षी छोड़ गए घोंसले
Keoladeo National Park

Rohit Sharma | Updated: 24 Jun 2019, 11:48:13 AM (IST) Bharatpur, Bharatpur, Rajasthan, India

भरतपुर. विश्वविख्यात (Keoladeo National Park) में किस तरह लापरवाही बरती जा रही है, इसकी बानगी रविवार को देखने को मिली। उद्यान के कुछ ब्लॉकों में जलकुंभी और सूख चुकी वनस्पति को हटाने का कार्य चल रहा है।

भरतपुर. विश्वविख्यात (Keoladeo National Park) में किस तरह लापरवाही बरती जा रही है, इसकी बानगी रविवार को देखने को मिली। उद्यान के कुछ ब्लॉकों में जलकुंभी और सूख चुकी वनस्पति को हटाने का कार्य चल रहा है। कार्य में लगे मनरेगा श्रमिकों ने एक स्थान पर सूखी जलकुंभी को एकत्र कर उसमें आग लगा दी, जिस स्थान पर जलकुंभी जलाई, उसके नजदीक ही पेड़ों पर (Monsoon messenger) के नाम विख्यात (Open billed stork) समेत अन्य पक्षी नेस्टिंग कर रहे थे। अचानक उठे धुएं के भारी गुब्बार के चलते यह पक्षी अपने घोंसले छोड़कर चले गए। खास बात ये है कि इस लापरवाही के बाद भी घना प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया है। उद्यान में विंटर सीजन समाप्त होने के बाद हर साल अप्रेल से जून मध्य तक घना प्रशासन की ओर से ब्लॉकों में सफाई कार्य कराया जाता है। इसमें विशेषकर पानी में उगने वाली जलकुंभी और नष्ट हो चुकी वनस्पति को निकाला जाता है। ये खराब वनस्पति ब्लॉकों में पानी सूखने के बाद निकाली जाती है। इस कार्य के लिए मनरेगा श्रमिकों को लगाया जाता है। ये मनरेगा श्रमिक ब्लॉक में अलग-अलग स्थानों पर सफाई और बंद हो चुके रास्तों से मिट्टी हटाने का कार्य करते हैं।

 

इसी के तहत रविवार सुबह घना में सांपन मोरी और केवलादेव के बीच 'डीÓ ब्लॉक में निकाली (water hyacinth) में सूखने के बाद श्रमिकों ने उसमें आग लगा दी। निकाली जलकुंभी पूरी तरह सूखी नहीं होने से आग लगने से भारी धुआं हो गया, जिससे आसपास के पेड़ों पर नेस्टिंग कर रहे ओपन बिल स्टॉर्क, स्नेक बडर््स, कॉरर्मोनेंट समेत अन्य पक्षी घोंसलों को छोड़कर उड़ गए। जबकि इससे पहले जलकुंभी और सफाई के बाद निकलने वाले कचरे को ट्रेक्टर-ट्रॉली में भरकर बाहर फेंका जाता रहा है। इस वाक्ये ने यह बता दिया कि उद्यान में मनरेगा श्रमिकों के कार्य पर घना प्रशासन की ओर से कोई निगरानी नहीं है। जबकि इलाके में फोरेस्टर व रेंजर की ड्यूटी रहती है। उधर, घना निदेशक डॉ.अजीत उचोई ने बताया कि घना में सफाई कार्य के दौरान सूखी जलकुंभी को हटाकर श्रमिकों ने एक तरफ रख दिया था। जलाने की जानकारी नहीं है। पक्षी घोंसलों में मौजूद हैं।

 

सबसे पहले बनाते हैं घोंसला

ओपन बिल स्टॉर्क लॉकल माइग्रेटी पक्षी है जो (Monsoon) से पहले (Keoladeo National Park) पहुंचता है और सबसे पहले घोंसला बनाने और पुराने घोंसलों को दुरुस्त करने का कार्य शुरू करता है। इसकी चोंच मजबूत होने से ये हल्की मोटी सूखी लकड़ी आसानी से पेड़ पर एकत्र कर घोंसले का निर्माण करता है। ये पक्षी जुलाई-अगस्त तक रहते हैं और उसके बाद चले जाते हैं। इनके छोड़े घोंसलों में ही दूसरी प्रवासी पक्षी अपना ठिकाना बनाते हैं। एक तरह से यह पक्षी घना में कॉलोनी बनाने का कार्य करते हैं। लेकिन घना प्रशासन की लापरवाही के चलते इन पक्षियों ने समय से पहले ही घोंसला छोड़ दिया।

 

एनसीआर क्षेत्र में कचरा जलाने पर पाबंदी

भरतपुर (NCR) में आता है। (NGT) ने दिल्ली समेत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में खुले में कचरा जलाने पर पूर्ण रूप से पाबंदी लगा रखी है। यह कदम एनसीआर में बढ़ रहे प्रदूषण को देखते हुए लिया गया था। इसी के तहत एनजीटी पूर्व में ही क्षेत्र में 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल वाहनों के परिवहन पर प्रतिबंध लगा चुकी है। इसके अलावा ईंट-भट्टों को भी नए मॉडल के साथ चलाने की अनुमति दी थी।

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