गुटबाजी व आंतरिक कलह के कारण हुई भाजपा की हार

मेयर के चुनाव में जहां गुटबाजी व आंतरिक कलह के कारण भाजपा की हार हुई है तो अब डिप्टी मेयर के चुनाव में भी भाजपा ने लगभग हथियार डाल दिए हैं।

By: Meghshyam Parashar

Published: 27 Nov 2019, 11:26 AM IST

भरतपुर. मेयर के चुनाव में जहां गुटबाजी व आंतरिक कलह के कारण भाजपा की हार हुई है तो अब डिप्टी मेयर के चुनाव में भी भाजपा ने लगभग हथियार डाल दिए हैं। क्योंकि पिछले 16 घंटे से भाजपा में इस बात को लेकर ही मंथन चलता रहा कि आखिर डिप्टी मेयर पद का प्रत्याशी किसे बनाया जाएं। अंत में किसी भी पार्षद के इसकी स्वीकृति नहीं देने पर कलुआराम मीणा को ही प्रत्याशी बनाकर नामांकन पत्र दाखिल कराया गया। ऐसे में पार्टी की यह रणनीति भी सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बनी रही। जबकि कांग्रेस की ओर से शुरू से अंत तक की रणनीति के तहत गिरीश चौधरी को ही प्रत्याशी बनाया गया।

नगर निगम के डिप्टी मेयर का निर्वाचन आज


जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. जोगाराम ने बताया कि 27 नवंबर को सुबह 10 बजे नगर निगम के सभागार में समस्त नवनिर्वाचित पार्षदों की बैठक कर नगर निगम के उप महापौर पद का चुनाव किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके लिए समस्त तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। उन्होंने बताया कि सुबह 10 बजे से सुबह 11 बजे तक नामांकन पत्र दाखिल किए जाएंगे। सुबह 11.30 बजे तक नामांकन पत्रों की संवीक्षा की जाएगी। दोपहर दो बजे तक नाम वापसी होगी। इसके पश्चात आवश्यकता होने पर ढाई बजे से शाम पांच बजे तक मतदान कराया जाएगा। उसके बाद मतगणना कर परिणाम घोषित किया जाएगा।

ऐसे हुई कांग्रेस के मेयर की जीत

कांग्रेस और भाजपा के खेमे की बाड़ेबंदी का जो सच मंगलवार दोपहर मतदान के बाद खुलकर सामने आया, उसने हर किसी को हैरत में डाल दिया। क्योंकि कांग्रेस के प्रत्याशी अभिजीत कुमार ने 37 मतों के अंतर से भाजपा प्रत्याशी शिवानी दायमा को करारी शिकस्त दी है। अभिजीत को 65 में से 51 वोट मिले तो शिवानी को 14 मत मिले। इस तरह भाजपा के आठ व समर्थित दो पार्षदों ने क्रॉस वोटिंग की है। जब परिणाम सामने आया तो भाजपा के निकाय चुनाव पर्यवेक्षक पूर्व मंत्री वासुदेव देवनानी भी इस सच का सामना करने से बचते नजर आए। नगर निगम के चुनाव में इस बार भाजपा के 22, निर्दलीय 22, बसपा के तीन व कांग्रेस के 18 पार्षद जीतकर आए थे। 19 नवंबर को मतगणना के बाद से ही दावा किया जा रहा था कि कांग्रेस के जयपुर में स्थित जामडोली में कैंप में 50 से अधिक पार्षद शामिल हैं। इसमें भाजपा के भी छह से 10 पार्षदों के शामिल होने की बात सामने आई थी, लेकिन एक दिन पूर्व ही भाजपा नेताओं के व्हिप जारी करने व पार्टी के प्रति वफादारी निभाने पर आगामी समय में इसका परिणाम देने की बात कर दो पार्षदों को वापस बुलाने में सफलता मिल गई। सबसे बड़ी बात यह है कि भरतपुर के 25 साल के इतिहास में पहली बार कांग्रेस के हाथ में शहरी सरकार सरकार सौंपी गई है।
सुबह पौने 10 बजे से ही कैबीनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह बिजलीघर चौराहे पहुंचे, जहां गाड़ी से उतरने के बाद पैदल ही कांग्रेस के प्रत्याशी अभिजीत कुमार के साथ नगर निगम के गेट पर पहुंचे। जहां एक फल की दुकान के आगे ही कुर्सियां लगाकर बैठ गए। इसके कुछ देर बाद ही चिकित्सा राज्यमंत्री डॉ. सुभाष गर्ग व राज्यमंत्री भजनलाल जाटव भी वहां पहुंचे। पौने 11 बजे कांग्रेस के पार्षदों की बस आई। इसमें से जितने भी पार्षद बस से उतरे, उन्हें कैबीनेट मंत्री ने माला पहनाई। तब जाकर मतदान शुरू हो सका। इसके कुछ देर बाद भाजपा के 11 पार्षदों का एक दल मतदान के लिए पहुंचा। दोपहर करीब 12.10 बजे तक 64 वोट डाल दिए गए, लेकिन एक पार्षद वापस जाने के कारण देरी होती रही। करीब पौने दो बजे अंतिम पार्षद के वोट डालने के बाद परिणाम जारी हो सका।
कैबीनेट मंत्री ने पहनाई भाजपा के पूर्व मंत्री वासुदेव देवनानी को माला
जब भाजपा के निकाय चुनाव के पर्यवेक्षक एवं पूर्व मंत्री वासुदेव देवनानी पार्टी के पार्षदों का दल साथ लेकर नगर निगम के गेट के पास पहुंचे तो कैबीनेट मंत्री ने उन्हें भी माला पहना दी। इससे एक बार तो वहां जोरदार ठहाके लगने शुरू हो गए। इसी बीच कुछ सेकंड तक कैबीनेट मंत्री व पूर्व मंत्री देवनानी के बीच बातचीत भी हुई।

कुर्सी पर बैठाते ही बोले...इसकी लाज रखना मेयर साहब

कांग्रेस के मेयर अभिजीत कुमार को तीनों मंत्रियों ने जब कुर्सी पर बिठाया तो एकबारगी कैबीनेट मंत्री बोल पड़े कि इस कुर्सी की लाज रखना। मंत्री की इस बात के भी कई मायने निकाले जा सकते हैं। क्योंकि इस बार कांग्रेस का बोर्ड बनाने में तीनों मंत्रियों की मुख्य भूमिका रही है। इसलिए शहर की समस्याओं के निराकरण की बात हो या विकास कार्यो की। इन सभी को लेकर मंत्रियों की प्रतिष्ठा भी जुड़ी हुई है।

निर्दलीय पार्षद संजय शुक्ला ने कराया पौने दो घंटे तक इंतजार

दो प्रत्याशी व 62 पार्षदों के वोट डालने के बाद सिर्फ निर्दलीय पार्षद संजय शुक्ला ही वोट डालने से बचे हुए थे। वे स्नान आदि करने के बाद ही वोट डालने की बात कहकर नगर निगम से निकल गए। इसके बाद कुछ अधिकारियों के भी उनको फोन कर वोट डालने की बात कहने का मामला सामने आया, लेकिन वह करीब पौने दो बजे नगर निगम पहुंचे। जहां वोट डालने के बाद जिला कलक्टर डॉ. जोगाराम पहुंचे और मतपत्रों की गणना शुरू कराई जा सकी। तब जाकर परिणाम घोषित किया जा सका।

ऐसे समझिए भाजपा पार्षदों की क्रॉस वोटिंग का खेल

भाजपा के नेता कैंप से भाजपा की मेयर पद की प्रत्याशी शिवानी दायमा व 17 पार्षदों को साथ लेकर निकले थे, मतलब साफ था कि पांच पार्षद कांग्रेस के कैंप में पहले से ही बने हुए थे। 17 में से दो पार्षद वो भी शामिल थे, जहां दो पार्षद पद के प्रत्याशियों के नामांकन पत्र निरस्त होने के बाद दो निर्दलीय प्रत्याशियों को समर्थन दिया गया था। वे दोनों प्रत्याशी भी उस समय साथ थे, जब परिणाम सामने आया तो मात्र 14 वोट मिले। इससे साफ है कि भाजपा नेताओं के साथ आए किन्हीं तीन पार्षदों की ओर से क्रॉस वोटिंग की जा सकती है। जबकि सात पार्षद पहले से ही कांग्रेस खेमे के संपर्क में बने हुए थे।

पत्रिका इंपेक्ट: पहले ही बताया था कांग्रेस के साथ हैं 51 पार्षद

राजस्थान पत्रिका ने 20 नवंबर के अंक में ही प्रकाशित कर दिया था कि कांग्रेस के अभिजीत कुमार ही नगर निगम के मेयर बनेंगे। इसके बाद 23 नवंबर के अंक में भाजपा की मुश्किल...निर्विरोध नहीं बनना चाहिए कांग्रेस का मेयर शीर्षक से प्रकाशित खबर में ही उल्लेख कर दिया था कि कांग्रेस के पास 51 पार्षद संपर्क में बने हुए हैं।

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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